Wednesday, December 6, 2023
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यूपी नगर निकाय चुनावों में मोदी और योगी सरकार के मंत्रियों के क्षेत्र में भाजपा बुरी तरह हारी

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | यूपी में नगर निकाय चुनावों में भाजपा की नगर निगम में बड़ी जीत हुई है और भाजपा ने राज्य की सभी 17 नगर निगम पर कब्जा जमा लिया है। लेकिन राज्य में नगर पालिका परिषद अध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्ष की सीटों पर भाजपा की करारी हार हुई है। यूपी में नगर निकाय चुनावों में मोदी सरकार और योगी सरकार के मंत्रियों के क्षेत्र में भाजपा की करारी हार हुई है। इसको लेकर भाजपा में अंदरखाने तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

भाजपा ने कुल 91 नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष की सीट पर और 191 नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट पर जीत हासिल की है। इसके अलावा 108 नगर पालिका परिषद अध्यक्ष और 353 नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट भाजपा चुनाव में हार गई है। भाजपा अपनी जीत का डंका बजा रही है, लेकिन बड़ी हार पर चुप्पी साधे हुए है।

हैरत की बात यह है कि भाजपा जहां पर चुनाव हारी है, उस क्षेत्र के राजनेता मोदी सरकार और योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री हैं। भाजपा को इस हार से बड़ा झटका लगा है, लेकिन वह इस पर चुप्पी साधे हुए है।

भाजपा मत्रियों के क्षेत्र में हारी भाजपा :

पहले हम मोदी सरकार के मंत्रियों की चर्चा करते हैं, जिनके क्षेत्र में भाजपा हार गई है। इनमें पहला नाम केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान का है। संजीव बालियान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा का बड़ा चेहरा हैं और भाजपा की जाट राजनीति के बड़े ठेकेदार हैं। लेकिन इनके क्षेत्र में भाजपा नगर निकाय चुनावों में औंधे मुंह गिर गई है।

संजीव बालियान के मुज़फ्फरनगर जिले में 8 नगर पंचायत हैं, जिनमें भाजपा एक भी नहीं जीती है। 2 नगर पालिका परिषद हैं, जिनमें से 1 मुज़फ्फरनगर नगर पालिका परिषद पर भाजपा को जीत हासिल हुई है।

इसके बाद केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी का ज़िक्र करना ज़रूरी है। पंकज चौधरी पूर्वांचल में महराजगंज से 6 बार से लोकसभा सदस्य हैं और मोदी सरकार में वित्त राज्यमंत्री हैं। इनके क्षेत्र महराजगंज में 2 नगर पालिका परिषद और 8 नगर पंचायत हैं, जिनमें भाजपा नगर पालिका परिषद की एक भी सीट नहीं जीत सकी है और 8 नगर पंचायत में से केवल भाजपा ने 3 पर जीत हासिल की है।

इसके बाद आज़मगढ़ का नम्बर आता है। आज़मगढ़ में 3 नगर पालिका परिषद और 13 नगर पंचायत की सीट हैं। भाजपा को केवल 1 नगर पंचायत सीट पर जीत हासिल हुई है और 3 नगर पालिका परिषद अध्यक्ष की सीट पर उसको हार का सामना करना पड़ा। यहां से भोजपुरी सिनेमा के स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ सांसद हैं।

संतकबीरनगर से प्रवीण निषाद भाजपा सांसद हैं और यह निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के बेटे हैं। इनके क्षेत्र में नगर पालिका परिषद खलीलाबाद और नगर पंचायत मगहर में भाजपा की बुरी तरह से हार हुई है।

भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल के संसदीय क्षेत्र सिद्धार्थनगर जिले की 11 सीटों में से नगर पालिका परिषद बांसी, नगर पंचायत कपिलवस्तु, डुमरिया गंज, शोहरतगढ़ और बढ़नी में भाजपा जीती है तथा बाकी जगह पर भाजपा हार गई है।

बस्ती जिले से हरीश द्विवेदी भाजपा सांसद हैं और यह भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री हैं, लेकिन इसके बावजूद भाजपा यहां पर चुनाव हार गई। केंद्रीय मंत्री भानुप्रताप वर्मा के क्षेत्र में अमरौधा नगर पंचायत में भाजपा उम्मीदवार उमा देवी चुनाव हार गईं।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा टेनी के क्षेत्र लखीमपुर खीरी में लखीमपुर नगर पालिका परिषद, ओयल नगर पंचायत और खीरी नगर टाउन पंचायत में भाजपा हार गई।

भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और धौरहरा की भाजपा सांसद रेखा वर्मा के क्षेत्र में बरवर नगर पंचायत चुनाव में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी।

देवरिया से रमापति राम त्रिपाठी भाजपा सांसद हैं। इनके क्षेत्र में बरियापुर में भाजपा हार गई। सलेमपुर संसदीय क्षेत्र में लार, भटनी, मझौलीराज में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा।

भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फतेहपुर सीकरी से भाजपा के सांसद राजकुमार चाहर के क्षेत्र में फतेहपुर सीकरी नगर पालिका परिषद में बसपा ने जीत हासिल किया है। मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल के क्षेत्र हापुड़ सदर नगर पालिका परिषद ने जीत लिया है।

बुलन्दशहर के भाजपा लोकसभा सांसद डॉ. भोला सिंह के क्षेत्र की स्याना, बीबीनगर और खानपुर में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। अकबरपुर से भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले हैं। इनके क्षेत्र घाटमपुर में ओवैसी की उम्मीदवार गजाला तबस्सुम चेयरमैन बनी हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह राजू एटा से सांसद हैं। इनके क्षेत्र में 6 नगर पंचायत हैं, जिसमें अवागढ़ में भाजपा जीती है और बाकी जगह पर हार गई है। बागपत से सत्यपाल सिंह भाजपा सांसद हैं, इनके क्षेत्र में बागपत जिले की सभी 6 नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट भाजपा हार गई है। 3 नगर पालिका परिषद में से केवल खेकड़ा नगर पालिका परिषद भाजपा जीत सकी है।

यही हाल उन्नाव जिले में साक्षी महाराज का हुआ है। उन्नाव में 16 नगर पंचायत हैं, इनमें से भाजपा 3 ही जीत पाई है। 3 नगर पालिका परिषद हैं, जिनमें केवल 1 उन्नाव नगर पालिका परिषद ही भाजपा जीत सकी है।

इटावा से भाजपा के सांसद रामशंकर कठेरिया हैं। इनके जिले इटावा में 3 नगर पालिका परिषद और 3 नगर पंचायत हैं। भाजपा को यहां एक भी सीट नहीं हासिल हुई है। फरुर्खाबाद से मुकेश राजपूत भाजपा सांसद हैं। यहां पर 7 नगर पंचायत हैं, जिनमें भाजपा केवल 2 जीत पाई है और शेष पर उसको पराजय का सामना करना पड़ा है। नगर पालिका परिषद की 2 सीट हैं तो भाजपा दोनों हार गई है।

चंदौली से महेंद्र नाथ पाण्डेय मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। इनके क्षेत्र के दीन दयाल उपाध्याय नगर पालिका परिषद में सोनू किन्नर ने जीत हासिल किया है। सोनू किन्नर को महेंद्र नाथ पांडेय के इशारे पर जीत का सर्टिफिकेट नहीं दिया गया था और उसको हरा दिया गया था। लेकिन किन्नरों ने दोबारा मतगणना करने के लिए जमकर हंगामा किया, तो फिर से सोनू किन्नर को जीता हुआ घोषित किया गया। इससे भाजपा की बड़ी फजीहत हुई।

ब्रज क्षेत्र में पश्चिमी उत्तर प्रदेश आता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा नगर निगम में तो जीती है, लेकिन नगर पालिका में भाजपा अपनी सरकार के मंत्रियों के क्षेत्र में बुरी तरह से हार गई है। इस पर वह चुप्पी साधे हुए है। मथुरा के छाता से चौधरी लक्ष्मी नारायण योगी सरकार में मंत्री हैं। इनके क्षेत्र में भाजपा नगर पालिका परिषद में हार गई है। आंवला में भाजपा हार गई है, जबकि यहां से धर्मपाल सिंह भाजपा विधायक हैं और योगी सरकार में मंत्री हैं।

संभल में भाजपा हार गई है, जबकि यहां की भाजपा विधायक गुलाब देवी योगी सरकार में माध्यमिक शिक्षा मंत्री हैं। अलीगढ़ के अतरौली में भाजपा को सपा ने हराया है। अतरौली पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का गृह क्षेत्र है और यहां से उनके नाती संदीप सिंह विधायक हैं और योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री हैं।

रामपुर जिले से भाजपा विधायक औलख हैं और वह योगी सरकार में मंत्री हैं। उनके क्षेत्र में भी भाजपा हार गई है। रायबरेली से दिनेश प्रताप सिंह योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री हैं, लेकिन यहां पर भी भाजपा हार गई है।

योगी आदित्यनाथ की सरकार के मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह के तिलोई क्षेत्र की जायस में भाजपा चुनाव हार गई और यहां से कांग्रेस की मनीषा निर्वाचित हुई हैं। तिलोई अमेठी में आता है और यहां से स्मृति ईरानी सांसद हैं एवं मोदी सरकार में मंत्री हैं। इसी के साथ अमेठी के सलोन विधानसभा क्षेत्र की सलोन, नसीराबाद और परसदेपुर तीन नगर पंचायत में भाजपा चुनाव हार गई है। जबकि सलोन में भाजपा को जिताने के लिए स्मृति ईरानी ने मतदाताओं से अपील की थी। लेकिन मतदाताओं ने उनकी अपील को ठुकरा दिया और भाजपा को हरा दिया।

अमेठी में भाजपा की हार हुई है और स्मृति ईरानी के लिए खतरे की घण्टी बज गई है। योगी आदित्यनाथ की सरकार के मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी के गृह क्षेत्र प्रयागराज में भाजपा सभासद का चुनाव हार गई है। सपा ने इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है और उसको नगर पालिका और नगर पंचायत में अच्छी सफलता प्राप्त हुई है।

सपा ने अपने गढ़ आजमगढ़ में जीत हासिल की है। इसके अलावा सपा की हार के पीछे मुस्लिम समुदाय के वोटों का बंटवारा भी है। मुस्लिम समुदाय के वोटर मायावती के झांसे में आ गए और उन्होंने बसपा को वोट दे दिया। जबकि मायावती भाजपा को जिताने के लिए ही चुनाव लड़ रही थीं। लेकिन इसके बावजूद सपा का इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन रहा है।

कांग्रेस ने रायबरेली में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष की सीट जीतकर अपना परचम लहराया है। इसी जिले की लालगंज नगर पंचायत पर भी कांग्रेस ने जीत दर्ज कराई है। अमेठी के जायस में कांग्रेस ने जीत हासिल कर स्मृति ईरानी के लिए खतरे की घण्टी बजाई है। इन तीनों स्थानों समेत कांग्रेस ने यूपी में नगर निकाय चुनावों में 4 नगर पालिका और 13 नगर पंचायत में जीत हासिल की है।

इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने भी इस चुनाव में जीत हासिल कर यूपी की राजनीति में कदम रखा है। बसपा ने भी कुछ जगह पर जीत हासिल की है, लेकिन उनकी गिनती भाजपा समर्थक में की जा रही है। इस चुनाव में भाजपा अपनी जीत का डंका पीट रही है, लेकिन अपने मंत्रियों के क्षेत्र में हुई बड़ी हार पर चुप्पी साधे हुए है।

यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के गृह जिले कौशाम्बी की सराय अकील से नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट पर आम आदमी पार्टी के अनूप पटेल ने जीत हासिल की है। इस पर भाजपा ने मौन धारण कर रखा है। वहीं दूसरी ओर यूपी सरकार के मंत्री राकेश सचान के गृह जिले कानपुर देहात में घाटमपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष की सीट पर ओवैसी की पार्टी ने जीत दर्ज कर यूपी में अपनी पार्टी का खाता खोला है।

घाटमपुर में एआईएमआईएम की उम्मीदवार गजाला तबस्सुम ने नगर पालिका परिषद के चेयरमैन की सीट पर जीत हासिल कर यूपी में अपनी पार्टी की शुरूआत की है। किंतु इस पर भी भाजपा और योगी आदित्यनाथ की सरकार चुप्पी साधे हुए है। योगी सरकार और भाजपा केवल अपनी जीत का डंका बजा रही है। अपनी बड़ी हार पर उसके मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा है।

यूपी के कैसरगंज से बाहुबली ब्रजभूषण शरण सिंह भाजपा के लोकसभा सदस्य हैं। इनके गृह क्षेत्र नवाबगंज (गोंडा) में भाजपा उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई और उसको केवल 150 वोट मिले। गोंडा सदर में सपा ने जीत हासिल किया। यूपी सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के क्षेत्र पथरदेवा में भाजपा बुरी तरह से हार गई।

योगी आदित्यनाथ की सरकार में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद और सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर हैं। यह सभी योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी हैं। यह तीनों शाहजहांपुर से ताल्लुक रखते हैं। शाहजहांपुर की जलालाबाद और तिलहर नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष का चुनाव भाजपा हार गई है, तिलहर से भाजपा की विधायक सलोना कुशवाहा हैं और यह जितिन प्रसाद की करीबी हैं और इनको जितिन प्रसाद ने ही भाजपा का टिकट देकर विधायक बनवाया था।

शाहजहांपुर में कटरा से वीर विक्रम सिंह विधायक हैं, लेकिन कटरा में भाजपा नगर पंचायत का चुनाव हार गई है। यूपी के औद्योगिक विकास राज्यमंत्री जसवंत सैनी सहारनपुर के हैं और रामपुर मनिहारान से भाजपा विधायक देवेंद्र निम हैं, लेकिन यह रामपुर मनिहारान से भाजपा उम्मीदवार को नहीं जिता सके।

इसी तरह से नकुड़ के भाजपा विधायक मुकेश चौधरी सरसावां नगर पालिका परिषद में भाजपा उम्मीदवार वर्षा मोगा को जीत नहीं दिलवा सके। यूपी सरकार की मंत्री प्रतिभा शुक्ला कानपुर देहात(अकबरपुर) के रनियां से विधायक हैं। लेकिन अकबरपुर नगर पंचायत अध्यक्ष की भाजपा उम्मीदवार ज्योत्स्ना कटियार को यह नही जिता पाई। रनियां नगर पंचायत अध्यक्ष उम्मीदवार साधना दिवाकर को भी यह नहीं जिता सकीं। इस तरह से यूपी में नगर निकाय चुनावों में केंद्रीय मंत्रियों और यूपी सरकार के मंत्रियों के क्षेत्र में भाजपा की बुरी तरह से हार हुई है।

यूपी में नगर निकाय के चुनाव में भाजपा अपनी जीत का डंका बजा रही है। लेकिन अपनी बड़ी हार को छुपा रही है और इस पर चुप्पी साधे हुए है। नगर पालिका और नगर पंचायत में बड़ी हार को लेकर भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। इसको लेकर भाजपा में सन्नाटा पसरा हुआ है। इसकी वजह यह है कि अब 2024 का लोकसभा चुनाव उसके लिए आसान नहीं है, क्योंकि केंद्रीय सरकार के मंत्रियों और यूपी सरकार के मंत्रियों के क्षेत्र में भाजपा नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बहुत ही बुरी तरह से हार चुकी है।

मंत्रियों के गढ़ में हार पर ख़ामोश है भाजपा आलाकमान

भाजपा इसको लेकर काफी चिंतित है और परेशान है, लेकिन इस पर अभी कुछ नहीं बोल रही है। नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की हार से भाजपा को उसकी जमीनी हकीकत का पता चल गया है। भाजपा ने सपा को हराने के लिए इटावा जिले में बड़ी तिकड़मों को चला, किंतु कोई तिकड़म उसके काम नहीं आ सकी।

भाजपा इटावा में बहुत बुरी तरह से चुनाव हार गई। भाजपा इटावा जीत कर समूचे देश में यह बताना चाहती थी कि जब सपा इटावा नहीं बचा सकी, तो वह भाजपा का लोकसभा चुनाव में क्या मुकाबला करेगी। लेकिन भाजपा की यह चाल कामयाब नहीं हो पाई। सपा ने इटावा ही नहीं बल्कि आजमगढ़ पर भी अपना परचम लहराया।

सपा को यूपी में पूरब से लेकर पश्चिम तक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। राष्ट्रीय लोक दल को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सफलता प्राप्त हुई है। राष्ट्रीय लोक दल और सपा का यूपी में गठबंधन है। आम आदमी पार्टी ने भी यूपी में नगर निकाय चुनावों में सफलता प्राप्त कर राज्य की राजनीति में कदम रखा है।

गज़ाला तबस्सुम के ज़रिए ओवैसी की पार्टी ने भी यूपी में कदम रखा है। बसपा को भी सफलता मिली है, लेकिन लोगों की नज़र में यह भाजपा समर्थक हैं। नगर निकाय चुनावों के परिणाम ने भाजपा की धड़कन बढ़ा दी है। आने वाले 2024 का लोकसभा चुनाव अब उसके लिए आसान नहीं है।

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