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Saturday, April 13, 2024
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मुख़्तार अंसारी के जनाज़े में शामिल लोगों को डीएम ने धमकाया, DM के विरुद्ध कार्रवाई की मांग

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | राजनेता और पूर्व विधायक मुख़्तार अंसारी की मृत्यु के बाद जनाज़े में शामिल होने और उनको मिट्टी देने आए लोगों को गाज़ीपुर के डीएम द्वारा धमकाने का मामला सामने आया था जिसपर लोगो की काफी तल्ख़ प्रतिक्रिया देखने को मिली. अब इस मामले में डीएम के आचरण को लेकर शिकायत की गई है.

डीएम गाज़ीपुर ने मुख़्तार अंसारी के जनाज़े में शामिल लोगों से उनके विरुद्ध कार्यवाही करने की धमकी दी जिसका वीडियो भी काफी वायरल हुआ था. डीएम के आचरण को लेकर आज़ाद अधिकार सेना ने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से उनके विरुद्ध कार्यवाही करने की मांग की है.

आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने गाज़ीपुर कलेक्टर के व्यवहार को अखिल भारतीय सेवाएं आचरण नियमावली 1968 का घोर उल्लंघन बताया है.

राजनेता और पूर्व विधायक मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद जब उनका शव उनके घर पहुंचा तो गाज़ीपुर के प्रशासन ने उनके गांव को छावनी में तब्दील कर दिया. उनके गांव में भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों के साथ ही ख़ुफ़िया विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को निगरानी करने के लिए तैनात किया गया. गाज़ीपुर प्रशासन ने ऐसा इसलिए किया ताकि मुख़्तार अंसारी के जनाज़े में शामिल होने बाहर से आने वाले लोगों को रोका जा सके.

जनाज़े में शामिल होने वाले लोगों को रोकने के लिए गाज़ीपुर की डीएम आर्यका अखौरी ने खुद मोर्चा संभाला और खुद डटी रहीं ताकि भीड़ न हो और लोगों का भारी जमावड़ा न लगे.

ज्ञात हो कि मुख़्तार अंसारी की छवि 100 से लेकर 200 किलो मीटर के दायरे में मसीहा के रूप में है. उनको लोग मसीहा समझते हैं क्योंकि वह हर गरीब मज़लूम की हमेशा मदद करते थे. उनके दरवाज़े पर से कोई खाली हाथ कभी नहीं लौटता था.

उनको चाहने वाले लोगों का एक वर्ग विशेष बन गया था. उनको सभी जातियों के लोग चाहते थे. मुस्लिम समाज के लोगों से अधिक उनको अन्य जातियों धर्मों के लोग चाहते थे. मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद इलाके में सन्नाटा पसर गया था और लोग शोक में डूबे हुए थे.

ऐसे माहौल में सभी लोग अपने मसीहा को अंतिम विदाई देने के लिए उनके जनाज़े में शामिल होने, उनका अंतिम दर्शन करने और उनको मिट्टी देने के लिए मुख़्तार के गांव में एकत्रित होने लगे थे.

इस तरह से मुख़्तार अंसारी को मिट्टी देने के लिए लाखों लोग इकट्ठा हो गए. जब मिट्टी देने आए लोगों की भारी संख्या डीएम आर्यका अखौरी ने देखी तो वह आग-बबूला हो गई और उन्होंने लोगों को मिट्टी देने से रोकने का प्रयास किया. इसके लिए वह अफज़ाल अंसारी से भिड़ गई और उनकी अफजाल अंसारी से बहस भी हुई.

उन्होंने अफज़ाल अंसारी से लोगों को रोकने के लिए कहा. इस पर अफज़ाल अंसारी ने कहा कि, वह जनाज़े में शामिल होने आए लोगों को मिट्टी देने से नहीं रोक सकते. मिट्टी देने के लिए आने वालों को रोकना न तो संविधान के अनुसार सही है और न ही कानून में ऐसा है. ऐसा किसी धर्म में भी नहीं लिखा है.

इस पर डीएम ने अफज़ाल अंसारी को कानूनी कार्यवाही की धमकी दी. डीएम आर्यका अखौरी की यह धमकी कहीं से और किसी रूप में उचित नहीं है. डीएम ने इस तरह धमकी देकर राज्य सरकार से पीठ थपथपाने की और योगी सरकार को खुश करने का प्रयास किया.

डीएम के इस कार्य प्रणाली की खूब निंदा और हो रही है. वास्तव में डीएम आर्यका अखौरी ने निम्न स्तर का व्यवहार कर राज्य सरकार को ख़ुश करने का काम किया है. डीएम के पद की गरिमा गिरा दी है. किसी भी धर्म या जाति के व्यक्ति के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए लोगों को रोकने या उसमें दखल देने के लिए न तो भारत के संविधान में लिखा है और न ही कोई ऐसा नियम है.

कोई भी धर्म अंतिम संस्कार में शामिल होने वालों को रोकने के लिए नहीं कहता है तो डीएम आर्यका अखौरी ने इस तरह का यह निम्न स्तरीय काम क्यों किया? डीएम का यह काम सवालों के घेरे में है इसका जवाब वह ही दे सकती हैं.

गाज़ीपुर की डीएम आर्यका अखौरी के इस आचरण और कार्य प्रणाली के खिलाफ आजाद अधिकार सेना ने भारत सरकार और यूपी सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उनके खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कहा है.

आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने कल मुख्तार अंसारी के जनाज़े में गाज़ीपुर की डीएम आर्यका अखौरी के कार्य और व्यवहार को गलत माना है. उन्होंने भारतीय सेवाएं आचरण नियमावली के नियम 3 के विभिन्न उप नियमों का उल्लंघन बताते हुए इसके संबंध में डीएम आर्यका अखौरी के खिलाफ डीओपीटी, भारत सरकार और मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश को शिकायत भेजी है और उचित कार्यवाही करने की मांग की है.

अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में कहा है कि, “मृत व्यक्ति की याद में नारे लगाना और अंतिम संस्कार से जुड़ा कोई कार्य करना हमारे देश के संविधान में कहीं से भी निसिद्ध नहीं है और इसके लिए अलग से किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है.”

उन्होंने आगे कहा है कि, “इसके बाद भी आर्यका अखौरी ने गलत ढंग से अपने पद और अधिकार का धौस जमा कर लोगों को इन कार्यों से रोका तथा मृत व्यक्ति के भाई के साथ अनुचित ढंग से बातचीत कर माहौल को खराब करने का कार्य किया. यह निश्चिचित रूप से डीएम के पद की गरिमा के खिलाफ था.”

उन्होंने कहा है कि, “प्रथम दृष्ट्या आर्यका अखौरी का यह कार्य सेवा में अनुचित लाभ के लिए किया गया दिखता है. इसलिए इनके खिलाफ इस संबंध में समुचित विधिक कार्यवाही की जाए.”

गाज़ीपुर की डीएम आर्यका अखौरी ने मुख़्तार अंसारी के जनाज़े में शामिल होने आए और मिट्टी देने आए लोगों को रोकने का कार्य करके भारतीय सभ्यता और संस्कृति का भी अपमान किया है. आर्यका अखौरी को यह नहीं भूलना चाहिए कि मृत्यु अंतिम सत्य है और इससे कोई नहीं बचा है.

भारतीय सभ्यता और संस्कृति की दुहाई देने वाली भाजपा सरकार ने भी इस प्रकरण पर चुप्पी साध रखी है, भाजपा सरकार की यह चुप्पी उसके दोहरे चरित्र का सबसे बड़ा प्रमाण है.

अगर भाजपा सरकार में ज़रा सी भी नैतिकता है तो वह आर्यका अखौरी के खिलाफ कार्यवाही करे वरना भारतीय सभ्यता और संस्कृति की हितैषी होने का ढोंग और स्वांग रचना बंद करे.

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