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Monday, May 27, 2024
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एटीएस ने कहा रिहाई मंच को ख़त्म क्यों नहीं कर देते : एडवोकेट मुहम्मद शोएब

इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | एटीएस की गैर कानूनी हिरासत से रिहा होने के बाद रिहाई मंच अध्यक्ष एडवोकेट मोहम्मद शोएब ने कहा कि दमन उत्पीड़न के खिलाफ रिहाई मंच को चुप कराने के लिए उन्हें उठाया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि, रिहाई मंच को खत्म करने को कहा गया.

उन्होंने कहा कि, रिहाई मंच की किसान आंदोलन और अन्य जनांदोलन में जुड़ाव पर भी एटीएस ने सवाल उठाए. मंच प्रमुख से रिहाई मंच, पीएफआई, आजमगढ़ में चल रहे एयरपोर्ट विरोधी आंदोलन, फर्जी एनकाउंटर पर उठने वाले सवालों, घंटाघर आंदोलन, सीएए, एनआरसी विरोधी आंदोलन, एटीएस पर फर्जी तरीके से आतंकवाद के नाम पर फसाने के आरोप, राजीव यादव के चुनाव के समर्थन में लखनऊ प्रेस क्लब में हुए प्रेस कांफ्रेंस के समेत विभिन्न मुद्दों पर पूछताछ हुई.

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शोएब ने कहा कि कर्नाटक में हो रहे चुनावों में वोटों के ध्रुवीकरण के लिए गिरफ्तारियां की गई. मुसलमानों में डर का माहौल पैदा करने के लिए कि वह सोचने पर मजबूर हों कि जब वकील की गिरफ्तारी हो सकती है तो किसी की भी हो सकती है.

उन्होंने कहा कि, एक वकील होने के नाते यह गिरफ्तारी वकालत के पेशे पर हमला है.

रिहाई मंच अध्यक्ष मोहम्मद शोएब ने कहा कि, 7 मई को तकरीबन साढ़े सात बजे सुबह जब मैं सो कर भी नहीं उठा था तभी पुलिस और कुछ सादी वर्दी में लोग आए और कहे कि अमीनाबाद थाने चलना है. कुछ बातचीत करनी है. नित्य क्रिया के बाद मैं उनके साथ चला, उन्होंने गाड़ी में बैठाया और गाड़ी अमीनाबाद थाने ना ले जाकर एटीएस हेडक्वार्टर अमौसी ले गए. एक हाल में जहां पहले से कुछ लोग मौजूद थे वहां बैठाया और कुछ देर बाद मेरा पारिवारिक व्योरा फूफा, मामा से लेकर जो भी मेरे रिश्तेदार रहे हो उन सब के बारे में पूछा.

उन्होंने दावा किया कि एटीएस ने पूछा कि, आप कितनी बार विदेश गए तो मैंने कहा कि मेरा पासपोर्ट ही नहीं है. नेपाल जाने के बारे में पूछा तो मैंने कहा बढ़नी में मेरे एक दोस्त थे तो गया था. उन्होंने पूछा कि पीएफआई से कब जुड़े तो मैंने कहा कि मेरा संगठन रिहाई मंच है तो मैं किसी दूसरे संगठन से क्यों जुडूंगा. किसी को जोड़ना होगा तो रिहाई मंच से जोड़ूंगा. क्योंकि रिहाई मंच हमारा संगठन है और मैं सोशलिस्ट पार्टी इंडिया का संसदीय बोर्ड का सदस्य हूं.

उन्होंने बताया कि यह भी पूछा गया कि और कौन साथ हैं तो हमने कहा कि रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव हैं. उन्होंने कहा कि रिहाई मंच खत्म क्यों नहीं कर देते तो मैंने कहा की रिहाई मंच गरीब, गुरबों, वंचितों की आवाज है और जब तक मैं रहूंगा तब तक चलेगा उसके बाद जो लोग होंगे उनके ऊपर है कि वह चलाएंगे.

एटीएस के एक एडिशनल एसपी ने कहा कि आप नौजवानों का भविष्य क्यों बर्बाद कर रहे हैं तो मैंने कहा, “अपना जीवन जनता के कार्यों में लगाया और यह बर्बाद करना नहीं है बल्कि यह देश बेहतर बनाने की कोशिश है.

उन्होंने कहा कि राजीव यादव के बारे में पूछा तो बताया कि वह संगठन के महासचिव हैं और जन आंदोलनों में रहते हैं तो एक एटीएस वाले ने कहा कि आपके आंदोलन से एयरपोर्ट बनना रुक तो नहीं हो जाएगा. जिसपर मैंने कहा यह किसानों मजदूरों के जीवन का सवाल है और आम जनता का सवाल है. लोगों के मकान जमीन छीनकर एयरपोर्ट बना लेंगे तो वह किसान मजदूर कहां जाएंगे इसलिए यह आंदोलन चलेगा. मुसलमान क्यों नहीं पढ़ते, यह पूछा तो मैंने कहा कि सरकारी नौकरी में पारदर्शिता नहीं है. तो एटीएस ने कहा कि ऐसा मदरसों की वजह से हो रहा है.

मोहम्मद शोएब ने कहा कि मैं जब घर से निकला था तो मेरा मोबाइल एटीएस ने ले लिया था. मुझे एक वीडियो दिखाया गया और कहा गया कि आपके टेलीग्राम में यह था, क्या टेलीग्राम आप इस्तेमाल करते हैं. मैंने कहा इस वीडियो को तो मैंने देखा नहीं है पर मैं टेलीग्राम भी नहीं इस्तेमाल करता हूं. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की फोटो दिखाए उसके बारे में पूछा जिसमें पीस पार्टी के अयूब अंसारी, भागीदारी आंदोलन के पीसी कुरील, वोटर्स पार्टी के भरत गांधी और अन्य लोग थे. मैंने कहा हां यह प्रेस कॉन्फ्रेंस हमारे संगठन के राजीव यादव जो निजामाबाद से चुनाव लड़ रहे थे उनके समर्थन में लखनऊ प्रेस क्लब में आयोजित की गई थी.

एटीएस ने पूछा क्या आप स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं, तो मैंने जवाब दिया कि मैं लोकतंत्र रक्षक सेनानी हूं. उन्होंने कहा कि आप की पेंशन बंद कर दी जाएगी और पूछा कि आपके मरने के बाद क्या राजकीय सम्मान दिया जाएगा. मैंने कहा हां पूरे राजकीय सम्मान के साथ लोकतंत्र सेनानी को विदा करने की परंपरा है और आप अगर रहेंगे तो आप भी सलामी देंगे. एक वीडियो दिखाया जिसमें मैंने बोला है कि सरकार ने पुलिस को स्वच्छंद कर दिया है, किसी को भी पकड़ लेते हैं, मारते हैं, कोई भी कानून और संविधान का पालन नहीं करते.

उन्होंने कहा, “मैंने जवाब देते हुए कहा हां मैंने बोला है जब आजमगढ़ के लोगों का हाफ एनकाउंटर हो रहा था तो उन्होंने कहा कि हां पैर में गोलियां मारी जाती है. क्या आपने पीएफआई के मुकदमे लड़े हैं तो मैंने कहा नहीं मैंने मुकदमा नहीं लड़ा. किसी ने संपर्क भी नहीं किया. एक वकील के होने के नाते अगर कोई संपर्क करेगा तो जरूर लडूंगा.

उन्होंने कहा, सीएए विरोधी आंदोलन के बारे में पूछते हुए कहा कि वह तो मुसलमानों का आंदोलन था मैंने कहा नहीं वह संविधान को, देश के नागरिकों को बचाने का आंदोलन था. ताकि वंचितों से उनकी नागरिकता का अधिकार न छीना जाए. एनआरसी में असम ने साबित कर दिया है कि देश की नागरिकता खोने वाले नागरिकों में मुसलमानों की अपेक्षा गैरमुस्लिम की संख्या अधिक है. दरअसल आदिवासी, पिछड़ों, दलितों को गैर नागरिक बनाकर उनको डिटेंशन कैंप में रखकर कारपोरेट के लिए बंधुआ मजदूर बनाने के लिए सीएए लाया गया.

एटीएस के एडिशनल एसपी ने कहा कि घंटाघर आंदोलन में आपको देखा था. मैंने कहा हां उस आंदोलन में थे. पूछा कि आप एनआरसी विरोधी आंदोलन में जेल गए थे, क्या धाराएं लगी थीं. हां गया था, मैंने उन्हें जो धाराएं याद थी वह बता दीं. उन्होंने पूछा कि परिवर्तन चौक पर आगजनी, मारपीट कैसे हुई. मैंने कहा कि मुझे तो हाउस अरेस्ट किया गया था तो मुझे क्या मालूम. उन्होंने कहा कि दारापुरी को मालूम होगा तो मैंने कहा उन्हें भी कैसे मालूम होगा वो भी हाउस अरेस्ट थे.

उन्होंने कहा कि आप कहते हैं कि एटीएस फर्जी फंसाती है, क्यों कहते हैं, किस आधार पर कहते हैं. मैंने कहा कि मैंने खुद 14 लोगों को जिन्हें आतंकवाद के नाम पर मुकदमे दर्ज करके जेलों में कैद कर दिया गया था उनकी वकालत करके रिहा करवाया है. उन मुकदमों में एटीएस उनके खिलाफ कोई सुबूत नहीं पेश कर सकी. जिन्हें कोर्ट ने बाइज्जत बरी किया है. इसका मतलब यह है कि एटीएस, एसटीएफ जैसी एजेंसियां गलत तरीके से लोगों को आतंकवाद के मामले में फंसाती हैं. आपके दोस्त कौन हैं पूछा तो मैंने बताया कि संदीप पांडे, रूपरेखा वर्मा, एसआर दारापुरी मेरे दोस्त हैं.

उन्होंने कहा कि दारापुरी को आप एनआरसी आंदोलन से जानते होंगे. मैंने कहा कि पहले से जानता था. बहुत सी बातें उन्होंने की जो याद रही वह मैंने बता दी. लगभग 9 नौजवान मेरे अलावा वहां पर थे. 9 बजे के करीब सबको सबके घर पहुंचाया जाने लगा. मुझे भी मेरे घर पर दस बजे रात में लाया गया और एक टाइप शुदा कागज पर मेरी पत्नी से दस्तखत लिए गए.

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि एडवोकेट मुहम्मद शोएब को बिना किसी आरोप के उठाने वाली पुलिस में यौन शोषण के आरोपी भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं है. वकील के अधिकार और रिहाई मंच को खत्म कर इंसाफ के लिए उठने वाली आवाजों को दबाना चाहते हैं. पूरे देश में मुस्लिम विरोधी माहौल बनाकर भारतीय महिला पहलवानों के आंदोलन की आवाज को कमजोर करने और कर्नाटक चुनावों में ध्रुवीकरण करने के लिए गैरकानूनी तरीके से उन्हें उठाया गया.

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