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Monday, July 15, 2024
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मध्यप्रदेश में ‘गाय’ से जुड़े मामले में मुसलमानो के घरों पर चलाया गया बुलडोज़र, लोगों में नाराज़गी

अनवारुल हक़ बेग

रतलाम (मध्य प्रदेश) | मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों ने चार मुस्लिम व्यक्तियों को, रतलाम जिले के जावरा में एक मंदिर में गोवंश के अवशेष फेंकने के आरोप में हिरासत में लेने के बाद, विवादास्पद तरीके से उनके घरों को ध्वस्त कर दिया. प्रशासन ने इस अनैतिक कार्रवाई को उस समय अंजाम दिया जबकि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ध्वस्तीकरण अभियान के खिलाफ़ एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था.

Indiatomorrow.net से बात करते हुए एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) मध्य प्रदेश चैप्टर के ज़ैद पठान ने बताया कि पुलिस ने सबसे पहले 18 वर्षीय शारिक कुरेशी और 20 वर्षीय सलमान को 14 जून को गिरफ्तार किया था. उन पर जावरा के एक मन्दिर में गोवंश के अवशेष को फेंकने का आरोप लगाया गया था.

ज़ैद पठान के अनुसार दोनों युवकों के घरों को बिना किसी पूर्व सूचना के उसी दिन ध्वस्त कर दिया गया जिस दिन उन्हें हिरासत में लिया गया था. जबकि दो और लोगों, नौशाद और शाहरुख को भी बाद में इसी तरह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

परिवारों की दलीलों और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एपीसीआर द्वारा विध्वंस पर रोक लगाने के लिए दायर की गई याचिका के बावजूद सरकारी अधिकारियों ने 16 जून को नौशाद और शाहरुख के घरों के भी लगभग आधे हिस्से को तोड़ दिया.

पठान ने Indiantomorrow.net को बताया कि, “प्रशासन ने 14 जून को दोपहर 12:30 बजे के आसपास नोटिस जारी किया और नोटिस जारी करने के कुछ ही समय बाद घर ध्वस्त करने का काम शुरू हो गया. अदालत ने दोपहर 2:30 बजे के आसपास स्थगन आदेश दिया, लेकिन घरों को 12:30 बजे से 1:30 बजे के बीच कोर्ट के आदेश से पहले ही ध्वस्त कर दिया गया था.”

पठान ने आगे बताया कि एपीसीआर की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने पुष्टि की है कि ध्वस्त किए गए घर कानूनी भूमि पर थे, न कि सार्वजनिक संपत्ति पर बने थे. एपीसीआर की फैक्ट चैक टीम ने शहर का दौरा किया और परिवारों और व्यक्तियों से मुलाकात की.

एपीसीआर ने कोर्ट के आदेश के बिना अंजाम दिए गए विध्वंस अभियान को अवैध करार दिया और इस बात पर भी प्रकाश डाला कि अधिकारियों पर आरोपी परिवारों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव डाला जा रहा था उन्हें धमकी दी जा रही थी कि अगर आरोपियों के खिलाफ़ कार्रवाई नहीं की गई तो ईद के दिन “बंद का आह्वान” किया जाएगा.

एपीसीआर फैक्ट चैक रिपोर्ट ने वीडियो साक्ष्य होने के पुलिस के दावे पर भी सवाल उठाया, रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित घटना के दौरान मंदिर के सीसीटीवी कैमरे बंद थे. फैक्ट चैक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि आरोपी लोगों को केवल सड़क किनारे लगे कैमरे के सीसीटीवी फुटेज में मन्दिर वाली सड़क पर सिर्फ चलते देखा गया था.

एपीसीआर टीम के अनुसार, विध्वंस अभियान के दौरान परिवारों की महिलाओं पर कथित तौर पर हमला भी किया गया, उनके साथ न सिर्फ दुर्व्यवहार किया गया बल्कि उन्हें घायल भी कर दिया गया.

दिलचस्प बात यह है कि जावरा नगर परिषद के मुख्य अधिकारी ने 14 जून को एक नोटिस जारी किया, जिसमें नौशाद और शाहरुख को नगर निगम अधिनियम और शहरी विकास नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए 24 घंटे के भीतर जल निकासी चैनल पर कथित अनाधिकृत निर्माण को हटाने के लिए कहा गया था. यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया जाएगा.

हालाँकि, ज़ैद पठान ने दावा किया कि परिवारों ने नगर परिषद की भूमि पर केवल 3 से 4 फीट तक निर्मित हिस्से को स्वयं हटाने की पेशकश भी की थी, लेकिन अधिकारियों ने उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और उनके परिसर के कानूनी हिस्से को भी  ध्वस्त कर दिया.

न्यायमूर्ति प्रकाश चंद्र गुप्ता ने अपने स्थगन आदेश में, मध्य प्रदेश राज्य सरकार, ज़िला मजिस्ट्रेट, पुलिस और जावरा नगर पालिका के मुख्य नगर अधिकारी सहित प्रतिवादियों को विवादित संपत्ति के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था. यह आदेश 16 जून को दोपहर 2:45 बजे से पहले आ चुका था तथा अगली सुनवाई की तारीख तक के लिए था. याचिका एपीसीआर मध्य प्रदेश चैप्टर की ओर से वकील सैयद अशहर अली वारसी के माध्यम से दायर की गई थी.

विध्वंस की यह घटना मध्य प्रदेश में कोई अकेला मामला नहीं है. हाल ही की एक अन्य घटना में, कुछ दिन पहले आदिवासी बहुल मंडला ज़िले में 11 लोगों के घरों को उनके रेफ्रिजरेटर में कथित गोमांस पाए जाने के बाद ध्वस्त कर दिया गया था. पुलिस ने दावा किया कि इलाके में वध के लिए गायों को लाए जाने के बारे में सूचना मिली थी, जिसके बाद मामले में 11 आरोपियों के घरों पर छापेमारी की गई और उन्हें ध्वस्त कर दिया गया.

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पहले उचित प्रक्रिया के बिना इस तरह के विध्वंस अभियानों पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की थी. फरवरी 2014 में, न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था, “स्थानीय प्रशासन और स्थानीय निकायों के लिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किए बिना कार्यवाही तैयार करके और बिना इसे समाचार पत्र में प्रकाशित करके किसी भी घर को ध्वस्त करना अब फैशन बन गया है. अदालत ने फैसला सुनाया था कि विध्वंस “अंतिम विकल्प” होना चाहिए और मालिक को अपने निर्माण को ठीक करने का उचित अवसर देने के बाद ही इसे अंजाम दिया जाना चाहिए.”

कोर्ट की इन टिप्पणियों के बावजूद, राज्य प्रशासन अपने दृष्टिकोण पर अड़ा हुआ दिखता है. प्रशासन द्वारा ऐसा व्यवहार करने के कारण उचित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों के उल्लंघन को लेकर चिंता होने लगी हैं.

विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सामूहिक दंड के रूप में अन्यायपूर्ण तरीके से घरों को ध्वस्त करने की प्रथा पर चिंता जताई है. कुछ व्यक्तियों के कृत्यों के परिणामस्वरूप महिलाओं और बच्चों सहित पूरे परिवारों को बेघर होने की सज़ा नहीं मिलनी चाहिए. मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज समूहों ने इस बेलगाम ‘बुलडोज़र कार्रवाई’ की आलोचना की है.

मध्य प्रदेश में मुस्लिम घरों को बुलडोजर द्वारा ध्वस्त किए जाने के कारण पूरे देश में मुस्लिम समुदाय और इंसाफ पसंद लोगों में आक्रोश व्याप्त है. सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, राजनेताओं और नागरिक समाज समूहों ने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण, अवैध और इस्लामोफोबिया से प्रेरित बताया है.

एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कथित गोमांस रखने को लेकर 2015 में अखलाक की पीट-पीटकर की गई हत्या के मामले से इस घटना की तुलना करते हुए ट्विटर पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार पर रेफ्रिजरेटर में गोमांस भंडारण का बहाना बनाकर 11 मुस्लिम घरों को ध्वस्त करने का आरोप लगाया और इसे मुसलमानों के खिलाफ अन्याय का सिलसिला बताया.

ओवैसी ने एक्स हैंडल पर लिखा “जो लोग इस काम को करने के लिए भीड़ जुटाते थे, वे अब इसे खुद कर रहे हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने कुछ मुसलमानों पर रेफ्रिजरेटर में गोमांस रखने का आरोप लगाया और 11 घरों पर बुलडोज़र चला दिया. अन्याय का सिलसिला रुकता ही नहीं.”

पत्रकार और आईआईटी रिसर्च स्कॉलर आसिफ मुजतबा ने विध्वंस को “भारत में मुसलमानों के खिलाफ सबसे बड़ा दमनकारी तरीका” कहा. उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मध्य प्रदेश की आबादी में मुसलमानों की संख्या केवल 6.5% होने के बावजूद, उनके प्रतिष्ठानों पर अक्सर छोटे-छोटे मुद्दों पर बुलडोजर चला दिया जाता है. उन्होंने इसे “कार्यकारी ज़्यादती और इसके अल्पसंख्यकों पर राज्य प्रायोजित आतंक” कहा.

विश्व शांति संस्थान के अध्यक्ष और एआईएमपीएलबी के प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलियास ने इस घटना को एक्स पर “राज्य आतंक” बताया.

प्रमुख इस्लामिक विद्वान समीउल्लाह खान ने ट्विटर पर इस घटना की निंदा करते हुए इसे “मुसलमानों के खिलाफ घोर अन्याय और नफरत” बताया. उन्होंने एक्स हैंडल पर, “हैशटैग इस्लामोफोबिया_इन इंडिया का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यह घटना भारत के मध्य प्रदेश के मंडला से है, ईद के त्योहार से पहले 11 मुस्लिम परिवारों के घरों पर बुलडोज़र चला दिया गया, क्योंकि पुलिस को कथित तौर पर रेफ्रिजरेटर में गोमांस संग्रहीत मिला था! यह मुसलमानों के खिलाफ घोर अन्याय और नफरत की पराकाष्ठा है, बुलडोज़र का यह चलन बर्बरता है!”

खान ने तेलंगाना की घटनाओं से इस घटना की तुलना की, जहां ईद की तैयारी कर रहे लोगों पर भाजपा समर्थकों द्वारा हमला किया गया था, उन्होंने “भाजपा के इस नए भारत” में त्योहारों के दौरान मुस्लिम समुदाय को होने वाली मानसिक यातना को उजागर किया.

दिल्ली स्थित वकील और सामाजिक कार्यकर्ता कंवलप्रीत कौर ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा, “बीफ हो या ना हो- विध्वंस तो अन्यायपूर्ण, क्रूर और अवैध है. लगता है, मध्य प्रदेश बुलडोज़र राज में उत्तर प्रदेश से आगे निकलना चाहता है. कोर्ट को तुरंत प्रभावितों के घरों के पुनर्निर्माण, परिवारों को मुआवज़ा देने और विध्वंस का आदेश देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देना चाहिए.

वकील साजिद बुखारी ने प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए विध्वंस को मध्य प्रदेश सरकार से ईद पर भारतीय मुसलमानों को मिलने वाला एक “चयनात्मक सांप्रदायिक” उपहार बताया.

हालांकि, इससे पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि गायों के खिलाफ अत्याचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

उन्होंने मंडला जिले के भैसवाही गांव में “11 अतिक्रमणकारियों” के 11 घरों और छह गोदामों को ध्वस्त करने को उचित ठहराया था, जहां पुलिस ने लगभग 150 गायों को बचाने का दावा किया था. यादव ने गायों के खिलाफ अत्याचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी.

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