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Monday, July 15, 2024
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UGC ने लोकपाल नियुक्त न करने वाले 157 विश्वविद्यालय को डिफॉल्ट सूची में डाला, सबसे ज्यादा यूपी की यूनिवर्सिटी के नाम

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | यू जी सी ने लोकपाल नियुक्त न करने वाले विश्वविद्यालयों को डिफॉल्ट सूची में डाल दिया है और उनके नाम सार्वजनिक कर दिए हैं।यू जी सी ने जिनको डिफॉल्ट सूची में डाला है उनमें सबसे ज्यादा यूपी के हैं।

यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नियमों के तहत देश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में लोकपाल की नियुक्ति किया जाना अनिवार्य है। इस नियम के तहत सभी विश्वविद्यालय अपने यहाँ लोकपाल को नियुक्त करते हैं।

यूजीसी ने पिछले साल 31 दिसंबर तक सभी विश्वविद्यालयों को अपने यहाँ लोकपाल नियुक्त करने का अल्टीमेटम दिया था। लेकिन ज्यादातर विश्वविद्यालयों ने इसे नहीं माना और अपने यहाँ लोकपाल को नियुक्त नहीं किया।

इस पर यूजीसी ने इसके लिए इस साल दूसरी डेडलाइन 30 मई निर्धारित की। लेकिन विश्वविद्यालयों ने इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया और अपने यहाँ लोकपाल की नियुक्ति नहीं की।

इसी क्रम में यूजीसी ने लोकपाल नियुक्त न करने वाले विश्वविद्यालयों को डिफॉल्ट घोषित करने और उनका नाम सार्वजनिक करने का निर्णय लिया।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव प्रो. मनीष जोशी की ओर से इस संबंध में कल यानी बुधवार को इन डिफॉल्ट विश्वविद्यालयों की सूची जारी की गई और उनके नाम सार्वजनिक किये गए।

डिफॉल्ट किए गए विश्वविद्यालयों में सबसे अधिक संख्या 108 स्टेट विश्वविद्यालयों यानी सरकारी विश्वविद्यालयों की है। 47 निजी विश्वविद्यालय और 2 डीमड – 2 – बी यूनिवरसिटी हैं। इनमें दिल्ली के मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग और इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टिट्यूट हैं।

स्टेट यूनिवर्सिटी की सूची में सबसे ज्यादा यूपी की 10 यूनिवर्सिटी हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, चंद्रशेखर आजाद यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नालाजी, जननायक चंद्रशेखर यूनिवर्सिटी, महाराजा सुहेल देव स्टेट यूनिवर्सिटी, प्रो.राजेंद्र सिंह यूनिवर्सिटी, सरदार वल्लभ भाई पूर्वांचल यूनिवर्सिटी, यूपी पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, यूपी किंग जार्ज यूनिवर्सिटी ऑफ डेंटल साइंस लख़नऊ, उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस, अग्रवन हेरिटेज यूनिवर्सिटी आगरा, वरुण- अर्जुन यूनिवर्सिटी, महावीर यूनिवर्सिटी, और टीएस मिश्रा यूनिवर्सिटी हैं।

हैरत की बात यह है कि यह स्टेट यूनिवर्सिटी सरकारी यूनिवर्सिटी हैं। इनकी सारी व्यवस्था यूपी सरकार करती है और इन पर यूपी सरकार का कंट्रोल होता है। लेकिन इनमें भी यूजीसी के नियमों का पालन नहीं किया गया है और नियमतः लोकपाल नहीं नियुक्त किया गया है।

अब जब सरकारी विश्वविद्यालयों में यूजीसी के नियम नहीं माने जा रहे हैं, तो अन्य से क्या उम्मीद की जा सकती है। सरकारी विश्वविद्यालयों में लोकपाल की नियुक्ति न करने के पीछे सरकार की मंशा में खोट नजर आती है, क्योंकि राज्य सरकार सरकारी विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता की नीति नहीं लागू करना चाहती है।

यूजीसी ने जिन अन्य विश्वविद्यालयों को डिफॉल्ट घोषित किया है, उनमें मध्य प्रदेश के और राजस्थान के 7-7 विश्वविद्यालय हैं। 4 विश्वविद्यालय उत्तराखंड के हैं।

डिफॉल्ट की सूची में हरियाणा भी हैं। हरियाणा की महाराणा प्रताप हार्टिकल्चर यूनिवर्सिटी करनाल, सोनीपत की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा और जगन्नाथ यूनिवर्सिटी झज्जर है। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर की एकमात्र यूनिवर्सिटी माता वैष्णों देवी यूनिवर्सिटी और हिमाचल प्रदेश की अर्नी यूनिवर्सिटी तथा दिल्ली की दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी शामिल हैं।

विश्वविद्यालयों में अपने यहाँ लोकपाल की नियुक्ति न करने के कारण यूजीसी द्वारा संबंधित विश्वविद्यालयों को डिफॉल्ट घोषित करने से और उनके नाम सार्वजनिक करने से यह साबित हो गया है कि निजी विश्वविद्यालयों की तर्ज पर चलते हुए अब सरकारी विश्वविद्यालयों ने भी कानूनों को नहीं मानने का मन बना लिया है।

विश्वविद्यालयों का यह काम भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला और गलत परम्परा की शुरुआत करने वाला है। इसे कहीं से उचित नहीं कहा जा सकता है।

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