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Monday, July 15, 2024
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सरकार को प्रेस की आज़ादी कम करने वाले क़ानून वापस लेने चाहिए : विभिन्न प्रेस संगठनों की मांग

इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | भारत के प्रमुख प्रेस संगठनों ने प्रेस की स्वतंत्रता को कम करने वाले कानूनों के विरोध में एक संयुक्त बैठक आयोजित की. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रेस की आज़ादी को संकुचित करने वाले कानूनों को वापस लेने के लिए केन्द्र सरकार से आग्रह करना था.

इस बैठक में सभी प्रमुख प्रेस संगठनों ने मिलकर संयुक्त रुप से एक संकल्प पत्र प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने अपने विभिन्न सुझावों और मांगो का उल्लेख किया.

मीडिया संगठनों ने सरकार से भारतीय प्रेस परिषद के स्थान पर एक ऐसा निकाय बनाने की मांग की है, जिसमें प्रसारण और डिजिटल मीडिया भी शामिल हों.

पत्रकारों के 15 संगठनों के प्रतिनिधियों ने 28 मई को आयोजित की गई एक बैठक में हिस्सा लिया. यह सभी मांगे इस बैठक में रखी गयी.

इस बैठक में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया और उसमें उन सभी बिंदुओं पर का उल्लेख किया गया, जिसकी मांग लंबे समय से पत्रकार संगठन करते रहे हैं.

बैठक में प्रस्तुत प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तावित भावी प्रेस कानून मीडिया की स्वतंत्रता में बाधा न डालें तथा नागरिकों की निजता के अधिकार को बरकरार रखे.

इस बैठक में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, डिजिपब न्यूज़ इंडिया फाउंडेशन, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन, वर्किंग न्यूज़ कैमरामैन एसोसिएशन, इन्डियन वीमन प्रेस कोर्प्स कोर सहित मुंबई, कोलकाता, त्रिवेंद्रम और चंडीगढ़ के प्रेस क्लब और अन्य पत्रकार संगठनों ने भाग लिया.

बैठक में पत्रकारों के संगठनों ने अपने संयुक्त बयान में कहा, “प्रस्तावित प्रसारण सेवा (विनियमन) विधेयक-2023, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम-2023, प्रेस और पत्रिकाओं का पंजीकरण अधिनियम-2023, और सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन नियम- 2023 जैसे कानूनों के प्रावधानों का उद्देश्य प्रेस को चुप कराना है. ये वे प्रावधान सरकार को किसी भी ऑनलाइन सामग्री को हटाने का अधिकार देते हैं जिसे सरकार गलत या भ्रामक मान लें.”

प्रेस संगठनों ने यह भी मांग की कि सरकार श्रमजीवी पत्रकार और अन्य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें) और विविध प्रावधान अधिनियम, 1955 और श्रमजीवी पत्रकार (पारिश्रमिक दर निर्धारण) अधिनियम, 1958 को बहाल करे, साथ ही प्रसारण और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में काम करने वाले पत्रकारों को भी कानूनों के दायरे में शामिल करे.

पत्रकारों के संगठनों ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की बात की है कि लोगों के जानकारी प्राप्त करने (जानने) के अधिकार का हनन न हो सके.

सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रुप से इस बात पर सहमति जताई कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तावित भावी कानून प्रेस की स्वतंत्रता में बाधा न डालें, तथा नागरिकों की निजता के अधिकार को बरकरार रखे.

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