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Monday, July 15, 2024
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उत्तर प्रदेश में 5 मुसलमान बने सांसद, सभी इंडिया गठबंधन से थे उम्मीदवार

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | उत्तर प्रदेश की सियासत में 5 मुस्लिम राजनेता चुनावी मैदान फतह कर सांसद बनने में सफल रहे हैं। सांसद बनने वाले यह सभी राजनेता इंडिया गठबंधन के हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा के इशारे पर 20 मुस्लिम राजनेताओं को टिकट देकर चुनाव में उतारा था लेकिन यह सभी पराजित हो गए.

इंडिया गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में कैराना, रामपुर, गाजीपुर, अमरोहा, सहारनपुर और संभल सीट से मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया था. कांग्रेस ने दो मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था. जिसमें सहारनपुर लोकसभा सीट से इमरान मसूद को और अमरोहा लोकसभा सीट से दानिश अली मैदान में थे. दोनों ही उम्मीदवार भारी बढ़त के साथ आगे चल रहे थे, हालंकि दानिश अली चुनाव हार गए.

कैराना से सपा उम्मीदवार इकरा चौधरी ने अपने प्रतिद्वंदी बीजेपी कैंडिंडेट प्रदीप कुमार को हराया. रामपुर लोकसभा सीट से सपा कैंडिंडेट मौलाना मोहीबुल्लाह ने अपने प्रतिद्वंदी बीजेपी उम्मीदवार घनश्याम सिंह लोधी को पराजित किया. संभल लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार ज़ियाउर्रहमान बर्क और गाज़ीपुर से सपा प्रत्याशी अफज़ाल अंसारी ने जीत दर्ज की.

लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन/ सपा ने कैराना सीट पर इक़रा हसन को अपना उम्मीदवार बनाया था। भाजपा ने इनके ख़िलाफ अपने सांसद प्रदीप चौधरी को चुनावी मैदान में उतारा था। इक़रा हसन पढ़ी- लिखी महिला उम्मीदवार थीं। इनको सभी जाति के लोगों का समर्थन प्राप्त था। यह जाति-धर्म से ऊपर उठकर सभी लोगों का काम करती हैं।

इक़रा हसन के पिता स्व. मुनववर हसन कैराना से सांसद रह चुके हैं। वह ऐसे शख्श थे जो संसद के दोनों सदनों के और यूपी विधानसभा तथा यूपी विधान परिषद के सदस्य रहे है, इनकी माँ भी सांसद रह चुकी हैं। इनके भाई नाहिद हसन कैराना से सपा के विधायक हैं। इक़रा हसन की हर तबके में मज़बूत पैठ है।

इक़रा को समाज से स्वीकार्यता प्राप्त है। इनको मुस्लिम, सवर्ण, दलित, पिछड़ों और जाटो का समर्थन मिला हुआ था जिसके कारण यह लगभग 1 लाख वोटों के अंतर से जीती और भाजपा उम्मीदवार प्रदीप चौधरी को कैराना से हराया।

कैराना के बाद रामपुर सीट है। रामपुर सीट को आज़म खां के कारण इसको वीआईपी सीट माना जाता है। रामपुर से आज़म खां सांसद रह चुके हैं। यूपी की बीजेपी सरकार ने बदले की भावना से आज़म खान और उनके परिवार पर तमाम मुकदमें लाद रखे हैं।

बीजेपी सरकार आज़म खां के राजनीतिक कैरियर को ख़त्म करने के लिए जुटी हुई है। भाजपा आज़म खां और उनके परिवार के किसी सदस्य को सांसद या विधायक नहीं बनने देना चाहती है। इसलिए सपा ने इस बार के लोकसभा चुनाव में मोहिबुल्ला नदवी को रामपुर से अपना प्रत्याशी बनाया।

मोहिबुल्ला नदवी को इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में भारी जन समर्थन मिला। यहाँ पर मुस्लिम वोटों का बंटवारा भी नहीं हुआ। दलित वोटर ने भी इनका साथ दिया। इसके साथ ही पिछड़े वर्ग के वोटरों और युवा वोटरों ने इनका साथ दिया जिसके कारण यह लोकसभा चुनाव जीत गए। इन्होंने भाजपा उम्मीदवार घनश्याम लोधी को लगभग 80 हज़ार वोटों से पराजित किया और सांसद बने।

संभल से सपा ने ज़ियाउर्रहमान बर्क को उम्मीदवार बनाया। वह डा. शफ़ीकुर्रहमान के पोते हैं। उनको सहानुभूति का भी वोट मिला। क्योंकि डा.शफ़ीकुर्रहमान बर्क पहले सपा उम्मीदवार थे लेकिन उनका निधन हो गया था। इसके साथ ही मुस्लिम, दलित और अन्य जातियों का भी इनको साथ मिला जिससे यह लोकसभा चुनाव जीत गये। इन्होंने भाजपा उम्मीदवार परमेश्वर लाल सैनी को हराया।

गाज़ीपुर से सांसद अफज़ाल अंसारी सपा उम्मीदवार के रूप में फिर से सांसद निर्वाचित हुए हैं। अफज़ाल अंसारी को दोबारा जनता ने चुनाव में चुना है। अफज़ाल अंसारी मुख़्तार अंसारी के बड़े भाई हैं। मुख़्तार अंसारी की अभी कुछ समय पूर्व संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। यूपी सरकार की ओर से उनकी मौत हार्ट अटैक से होना बताया गया था।

अंसारी बंधुओं का गाज़ीपुर, घोसी, आज़मगढ़, बलिया और पूर्वांचल के कई जिलों में बड़ा रसूख है। इनकी छवि जनता के बीच
मसीहा के रूप में है। यह गरीबों, वंचितों और मज़लूमों की हमेशा मदद करते हैं। इसलिए जनता इनको पूजती है और इनके लिए हर प्रकार से समर्थन करती है।

यही कारण है कि जब भी अंसारी परिवार के लोग चुनाव में खड़े होते हैं और चुनाव लड़ते हैं तो जनता इनका भारी समर्थन करती है और इन्हें जिताती है। लेकिन सरकार इनको गैंगेस्टर बताती है। जबकि जनता के यह हीरो हैं। इस बार भी जनता ने इनको 1 लाख से अधिक वोटों से जिताया है। यहाँ पर भाजपा की बुरी तरह से हार हुई है।

इंडिया गठबंधन में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में सहारनपुर से लोकसभा चुनाव लड़े इमरान मसूद ने लगभग 1 लाख वोटों से जीत हासिल की है। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार राघव लखनपाल को हराया है। बसपा ने माजिद अली को वोट काटने के लिए इनके खिलाफ चुनाव में उतारा था। लेकिन मुस्लिम मतदाताओं ने माजिद अली का साथ नहीं दिया और वोटों का बंटवारा नहीं हुआ जिससे इमरान मसूद जीत गए।

इमरान मसूद को भाजपा विरोधी सभी लोगों के वोट मिले जिससे राघव लखनपाल हार गए। अमरोहा से कुँवर दानिश अली को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया था। यहाँ से भाजपा के कंवर सिंह तंवर जीत गए। यहाँ पर मुस्लिम वोट बंट गया जिससे कुँवर दानिश अली चुनाव हार गये।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा को जिताने के लिए भाजपा के इशारे पर इस बार 20 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव में उतारे थे। लेकिन मायावती की इस चाल को मुस्लिम समाज के वोटरों ने भांप लिया और उन्होंने बसपा के मुस्लिम उम्मीदवारों का साथ नहीं दिया।

मुस्लिम वोटरों ने एकजुट होकर इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों का साथ दिया जिससे मायावती के सभी 20 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव में पराजित हो गए। मायावती की पार्टी बसपा का खाता तक नहीं खुला। मायावती का कोर वोटर इंडिया गठबंधन के साथ चला गया जिसके कारण यूपी में इंडिया गठबंधन ने 43 सीट ( 37+6) जीत कर उत्तर प्रदेश में बड़ा राजनीतिक बढ़त बनाई

इसके साथ ही इंडिया गठबंधन ने भाजपा के विजय रथ को यूपी में बढ़ने से रोक दिया और भाजपा को 33 सीट ही मिली। इस चुनाव में बसपा अब ख़त्म होती दिखाई दी।

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