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Monday, July 15, 2024
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चुनाव आयोग ने जारी किया 5 चरणों का डेटा, 76.3 करोड़ मतदाताओं में से 50.7 करोड़ ने डाला वोट

इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | चुनाव आयोग ने शनिवार को पहले पांच चरणों में हुए चुनाव के सभी लोकसभा सीटों पर हुए मतदान का डेटा जारी कर दिया है. आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पहले पांच चरणों में 76.3 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं में से 50.7 करोड़ लोगों ने वोट डाला है.

चुनाव आयोग ने पहले पांच चरणों में हुए मतदान के दौरान वोट डालने वाले वोटरों की संख्या का आंकड़ा जारी किया जिसके लिए राजनीतिक दलों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की वकालत करने वाले संस्थानों को सुप्रीम कोर्ट का रुख़ करना पड़ा.

शनिवार को चुनाव आयोग ने पहले पांच चरणों में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में पात्र मतदाताओं और डाले गए वोटों की पूर्ण संख्या जारी की और कहा कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि वोटर मतदान डेटा जारी करने में “देरी” के बारे में भ्रमों को विराम दिया जा सके.

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी कि चुनाव आयोग को मतदान के 48 घंटों के भीतर फॉर्म 17सी सार्वजनिक करने का आदेश दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने 24 मई की सुनवाई में चुनाव आयोग को ऐसा आदेश देने से इनकार किया है.

अपने बयान में चुनाव आयोग ने सफाई दी और बयान में ज़ोर इस बात पर रहा कि डाले गए वोटों की संख्या में कोई भी बदलाव संभव नहीं है. बयान में चुनाव आयोग ने कहा कि, “चुनावी प्रक्रिया को खराब करने के लिए झूठी कहानियां और शरारती डिजाइन का एक पैटर्न उसने नोट किया है.”

चुनाव आयोग का यह बयान सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रत्येक बूथ पर मतदान समाप्त होने के 48 घंटों के भीतर डाले गए और खारिज किए गए वोटों सहित मतदान प्रतिशत डेटा जारी करने की मांग वाली याचिकाओं को स्थगित करने के एक दिन बाद आया.

विभिन्न याचिकाओं में चुनाव आयोग को 2024 के लोकसभा चुनावों में अगले दौर के मतदान से शुरू होने वाले प्रत्येक चरण के बाद इस डेटा को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चुनाव आयोग के इस दावे से असहमति जताई थी कि अदालत ने फॉर्म 17सी में दिए गए डेटा के खुलासे से जुड़े मुद्दों का निपटारा कर लिया है, जो एक मतदान केंद्र पर डाले गए वोटों के रिकॉर्ड से संबंधित है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 17सी में दर्ज बूथ-वार मतदाता आंकड़े जारी करने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने से इनकार कर दिया था.

पहले पांच चरण के आंकड़े जारी करते समय आयोग ने दोहराया कि पूरा मतदाता डेटा फॉर्म 17सी के हिस्से के रूप में सभी उम्मीदवारों के अधिकृत एजेंटों के पास उपलब्ध है, जिसकी एक प्रति मतदान के बाद उनके साथ साझा की जाती है.

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, “देश भर में लगभग 10.5 लाख मतदान केंद्रों के साथ, लगभग 40 लाख एजेंट (प्रत्येक मतदान केंद्र पर 3-4 एजेंट मानकर) और लगभग 8,000 उम्मीदवारों को फॉर्म 17सी के माध्यम से सभी मतदान डेटा मिलते हैं.”

आयोग ने कहा कि एक निर्वाचन क्षेत्र में डाले गए वोटों की कुल संख्या, जैसा कि फॉर्म 17सी में दर्ज है, किसी की काल्पनिक शरारत से भी कभी नहीं बदली जा सकती है.

आयोग ने कहा कि मतदान डेटा जारी करने में कोई देरी नहीं हुई है. उसके मुताबिक मतदान के दिन शाम 5.30 बजे तक हर दो घंटे के आधार पर अपडेट किया जाता है. आधी रात तक, प्रतिशत के रूप में अनुमानित ‘मतदान समाप्ति’ डेटा दिखाता है.

निर्वाचन आयोग के अनुसार, चुनावी ड्यूटी में लगी टीमों के आने और दोबारा मतदान के समय के आधार पर मतदान के दूसरे, तीसरे या चौथे दिन डेटा को अंतिम रूप दिया जाता है.

ज्ञात हो कि सभी विपक्षी दल और तमाम नागरिक संगठन हर चरण में मतदाताओं की वास्तविक संख्या जारी करने की मांग कर रहे थे. चुनाव आयोग मतदान प्रतिशत जारी कर रहा था लेकिन इसमें 3 से 11 दिन तक का समय लग रहा था.

आंकड़े सार्वजनिक करने के साथ ही जारी प्रेस नोट में चुनाव आयोग ने कहा, “चुनाव संचालन नियम 1961 के नियम 49 वी (2) के अनुसार उम्मीदवारों के एजेंटों को हमेशा ईवीएम और वैधानिक कागजात, जिसमें मतदान केंद्र से स्ट्रॉन्ग रूम में स्टोरेज तक फॉर्म 17 सी भी शामिल है, ले जाने की अनुमति है.”

यह मामला चुनाव संचालन नियम, 1961 के फॉर्म 17सी और फॉर्म 17सी (भाग2) से डेटा के तेजी से जारी होने को लेकर है, जिसमें प्रत्येक मतदान केंद्र के नाम से शुरू होने वाले और मतदाताओं की संख्या सहित कई डेटा दर्ज होते हैं. इसमें खारिज किए गए मतों की संख्या और अंततः स्वीकृत मतों की संख्या भी होती है.

फॉर्म 17सी का दूसरा भाग भी अहम होता है. यह मतगणना के दिन लागू होता है, जब मतदान के दिन स्वीकृत वोटों की कुल संख्या के मुकाबले सभी उम्मीदवारों के वोटों की संख्या की जांच की जाती है. इसका मकसद वोटों में हेरफेर से बचना है.

विपक्षी पार्टियों और संस्थाओं का आरोप था कि चुनाव आयोग वोटिंग के बाद जो डेटा जारी कर रहा है उसमें और अंतिम आंकड़ों में पांच फीसदी से ज्यादा का अंतर है.

असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स-ADR ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें मांग की गई कि चुनाव आयोग मतदान संपन्न होने के 48 घंटों के भीतर हर पोलिंग बूथ पर डाले गए वोटों का डेटा जारी करे. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 24 मई की सुनवाई में चुनाव आयोग को ऐसा आदेश देने से इनकार किया था.

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