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Sunday, June 23, 2024
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ईरानी राष्ट्रपति के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए ईरान कल्चर हाउस में जमा हुए लोग

-सैयद ख़लीक अहमद

नई दिल्ली | ईरान के राष्ट्रपति डॉ. सैयद इब्राहिम रईसी और ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन की 20 मई को पूर्वी अज़रबैजान के पहाड़ी क्षेत्र में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. दोनों वैश्विक राजनीतिक शख्सियतों को श्रद्धांजलि देने के लिए नई दिल्ली स्थित ईरान कल्चर हाउस में आयोजित हुई एक शोक सभा में दिल्ली और आसपास से लोग जमा हुए जहां माहौल एकदम भावपूर्ण और गमगीन था.

अलग-अलग पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले कई लोग जो ईरानी राष्ट्रपति की अकस्मात मौत से दुखी ईरानियों के साथ सहानुभूति व्यक्त करने के लिए इकठ्ठे हुए थे उन्हें भी अपनी भावनाएं व्यक्त करने के दौरान भावुक होते देखा गया. इस दुखद घटना पर भारतीयों का दुःख जताना यह बताता है कि ईरान के लोगों के साथ भारतीयों के कितने घनिष्ठ और सदियों पुराने संबंध हैं.

इस दुखद घटना पर भारतीयों ने इतनी भावुक प्रतिक्रिया पर इस्लामी गणतंत्र ईरान के दूतावास के अधिकारी भी हैरान थे. भारत में ईरान के कल्चरल काउंसलर डॉ. एफ. फरीदसर ने अपने समापन भाषण में अपने विचार प्रकट करते हुए कहा, “मुझे यहां (भारत) से कई लोगों के फोन आए और उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति की अकस्मात मौत पर दुख व्यक्त किया, लेकिन कई भारतीय लोगों को तो मुझे खुद सांत्वना देनी पड़ी और उनसे कहना पड़ा कि वे चिंता न करें, क्योंकि वे इतने ज़्यादा गमगीन थे और इस घटना पर रो रहे थे.”

शोक सभा में शामिल होने वाले प्रमुख लोगों में वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास, जमात-ए-इस्लामी हिंद (जेआईएच) के मुज्तबा फारूक और उनके साथियों सहित जेआईएच के राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद अहमद, राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. तस्लीम रहमानी, प्रोफेसर अख्तरुल वासे, फ़तेहपुरी मस्जिद के इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद और इंस्टीट्यूट ऑफ हार्मनी एंड पीस स्टडीज के संस्थापक-निदेशक डॉ. एमडी थॉमस आदि प्रमुख व्यक्तित्व शामिल रहे.

इन सभी गणमान्य व्यक्तियों ने भारत में ईरानी राजदूत महामहिम डॉ. इराज इलाही से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनके प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त की.

डॉ रायसी ने हमेशा पश्चिमी शक्तियों का विरोध किया: जमात प्रमुख सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी

जमात इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने एक दिन पहले एक शोक सन्देश जारी किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि डॉ. रईसी का निधन मुस्लिम कौम के लिए एक गहरी क्षति है. ईरानी राष्ट्रपति के योगदान को याद करते हुए सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि पश्चिमी शक्तियां जो हमेशा अन्य देशों के आर्थिक शोषण और दमन की इच्छा रखती हैं उन सभी का इब्राहिम रईसी ने मज़बूती के साथ विरोध किया.

जेआईएच प्रमुख ने आगे अपने विचार रखते हुए कहा कि डॉ. रईसी को फिलिस्तीनी के संघर्ष के प्रति उनके दृढ़ समर्थन और फिलिस्तीन में ज़ायोनी उपनिवेशवाद और अत्याचारों के खिलाफ उनके ज़बरदस्त प्रतिरोध के लिए भी याद किया जाएगा.

डॉ. रईसी मुस्लिम देशों की अमेरिका, उसके सहयोगियों पर निर्भरता खत्म करना चाहते थे: WPI प्रमुख डॉ. एसक्यूआर इलियास

राजनीतिक दल वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया (डब्ल्यूपीआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एसक्यूआर इलियास ने संकट की इस घड़ी में ईरान के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. रईसी की मौत न केवल ईरान के लिए बल्कि पूरे मुस्लिम जगत के लिए बेहद दुखद घटना है. वह साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ ऐसी चट्टान की तरह खड़े थे जो अन्य देशों, विशेषकर मुस्लिम देशों के राजनीतिक और आर्थिक जीवन पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण चाहते हैं.

यह बताते हुए कि डॉ. रईसी ने रूस और चीन के साथ सफलतापूर्वक मजबूत संबंध स्थापित किए हैं, डॉ. इलियास ने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति ने मुस्लिम देश की अमेरिका और उसके सहयोगियों पर निर्भरता ख़त्म करने के लिए तमाम कोशिशें की. इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, उन्होंने दशकों से ईरान की क्षेत्रीय नीतियों के प्रबल विरोधी सऊदी अरब के साथ ईरान के संबंधों में सुधार किया.

डब्ल्यूपीआई प्रमुख ने कहा कि, डॉ. रईसी ने फ़िलिस्तीन पर अपने देश की नीति को पूरी दुनिया के सामने खुले तौर पर ज़ाहिर किया और उन्होंने हमास नेतृत्व के साथ बहुत मज़बूत और घनिष्ठ संबंध स्थापित किए हैं. डॉ. इलियास के मुताबिक, लेबनान के हिजबुल्लाह और यमन के हौथिस की इज़राईल के खिलाफ कार्रवाई ईरान के समर्थन के बिना संभव नहीं थी.

डब्ल्यूपीआई नेता ने यह भी कहा “हालांकि डॉ. रईसी के निधन से ईरान में कोई राजनीतिक शून्य पैदा नहीं होगा, लेकिन डॉ. रईसी को हमेशा एक मज़बूत राजनीतिक नेता और बुद्धिमान राजनेता के रूप में हमेशा याद किया जाएगा.

सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन यूनानी मेडिसिन (सीसीआरयूएम) के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. सैयद अहमद खान ने कहा कि फिलिस्तीनी आज़ादी आंदोलन में डॉ. रईसी की भूमिका बहुत अहम रही है और उनके निधन से मुस्लिम कौम वाकई गहरे सदमे में है.

मध्य-पूर्व के जानकारों के अनुसार, डॉ. रईसी के नेतृत्व में ईरान उन तीन देशों में से एक रहा है जिसने इज़राईल के कब्ज़े का विरोध करने के लिए फिलिस्तीनियों को मदद की थी. अन्य दो देश तुर्की और कतर हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में चाहे 28 जून को होने वाले चुनावों के बाद राष्ट्रपति पद कोई भी संभाले लेकिन फिलिस्तीन के संबंध में डॉ रईसी की नीति और अमेरिका के नेतृत्व वाली पश्चिमी शक्तियों की अन्यायपूर्ण नीतियों के खिलाफ ईरान देश का प्रतिरोध जारी रहेगा,

हेलिकॉप्टर हादसे के एक गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता: डॉ. ज़फरुल इस्लाम खान

फिलिस्तीनी मुद्दे पर कई किताबें लिखने वाले और मध्य-पूर्व के जाने माने विशेषज्ञ डॉ. ज़फरुल इस्लाम खान ने डॉ. रईसी और मुस्लिम कौम के प्रति उनके नज़रिए को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हेलीकॉप्टर हादसा जिसमें डॉ. रईसी की मौत हो गई वो एक दुर्घटना थी या उन्हें ख़त्म करने की इज़राइली साज़िश थी ऐसा कुछ भी हादसे के सम्बन्ध में कहना जल्दबाज़ी होगी. उन्होंने कहा कि सच्चाई जांच के बाद ही पता चलेगी जो ईरानी सेना के अधिकारियों की एक टीम द्वारा शुरू की जा चुकी है.

हालाँकि, उन्होंने कहा कि फ्रांस, स्वीडन, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और हाल ही में सीरिया के दमिश्क में ईरानी अधिकारियों, परमाणु वैज्ञानिकों और सैन्य जनरलों की हत्या में इज़राईली हाथ रहा है, इस इतिहास को देखते हुए गड़बड़ी के पहलू से इनकार नहीं किया जा सकता है. इस साल अप्रैल में दमिश्क में ईरानी दूतावास के परिसर में इज़राईल द्वारा अचानक किए गए एक हमले में 8 सेना जनरलों सहित लगभग 13 ईरानी अधिकारी मारे गए थे.

डॉ. ज़फरुल इस्लाम खान का कहना है कि इज़राइल ने कभी भी इन गतिविधियों में अपनी संलिप्तता स्वीकार नहीं की. दमिश्क की घटना ने ईरान को जवाबी कार्रवाई करने और इज़राइल के सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए मजबूर किया, इस हमले ने विश्व शक्तियों को हैरान कर दिया था क्योंकि एक क्षेत्रीय धौंस दिखाने वाले देश इज़राईल को अमेरिका और यूरोपीय शक्तियों के सैन्य और आर्थिक समर्थन के कारण हमेशा अजेय माना जाता रहा है.

उन्होंने कहा कि, डॉ. रईसी के नेतृत्व में ईरान ने इस इज़राईली भ्रम को भी उस वक्त तोड़ दिया जब अमेरिकी और यूरोपीय बलों द्वारा खाड़ी क्षेत्र में ईरानी ठिकानों की कुछ मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने के बावजूद इज़राईल में एक सैन्य अड्डे के पास उसके ड्रोन और मिसाइलों में विस्फोट हो गया.

यह कहते हुए कि डॉ. रईसी की मृत्यु बहुत चौंकाने वाली है और ईरान की राजनीति में एक शून्य पैदा हो गया है, डॉ. खान ने कहा कि, हालांकि इसका ईरान की सैन्य और प्रशासनिक स्थिति या विदेश नीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि देश एक बहुत मज़बूत संवैधानिक व्यवस्था पर आधारित है.

“डॉ रईसी की मृत्यु की पुष्टि के कुछ ही घंटों के भीतर, ईरान ने देश के उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति नियुक्त कर दिया, जिन्होंने तुरंत राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की घोषणा भी कर दी. यह सब कार्रवाई दर्शाती है कि ईरान को चलाने वाला एक मज़बूत संवैधानिक तंत्र है और इसलिए, चाहे कोई भी देश का राष्ट्रपति बने, ईरान को कोई नुकसान नहीं होगा.”

डॉ. खान के मुताबिक, अगर जांच के बाद डॉ. रईसी की हत्या में साज़िश की बात साबित हुई तो यह 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद ईरानी राजनीतिक नेताओं, सैन्य जनरलों और वैज्ञानिकों को खत्म करने की साज़िश की पहली घटना नहीं होगी.

डॉ. खान ने आगे बताया कि, 30 जून, 1981 को इस्लामिक रिपब्लिकन पार्टी के मुख्यालय पर एक शक्तिशाली विस्फोट में ईरान के लगभग 70 प्रमुख राजनीतिक नेताओं की मौत हो गई थी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश अयातुल्लाह मोहम्मद बेहश्ती भी शामिल थे, जो अयातुल्लाह खामनेई के बाद दूसरे सबसे शक्तिशाली ईरानी नेता थे. मरने वालों में कई मंत्री और संसद सदस्य भी शामिल थे.

उन्होंने कहा, “लेकिन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद विकसित ईरानी संवैधानिक व्यवस्था इतनी मज़बूत है कि इसका सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. नेतृत्व की दूसरी पंक्ति ने तुरंत कार्यभार संभाला और बिना एक क्षण गंवाए सब कुछ पटरी पर ला दिया.” इसी तरह की दूसरी घटनाएं भी हुईं हैं लेकिन ईरानी अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहे और अपने खिलाफ वैश्विक साज़िशों को नाकाम कर दिया.

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ज़फरुल इस्लाम खान ने कहा, “हालांकि ईरान को अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण बहुत नुकसान हुआ है, लेकिन साथ ही उसने सभी क्षेत्रों में अकल्पनीय विकास भी हासिल किया है. “

उन्होंने कहा, “ईरान के विकास का मुख्य कारण सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार न होना है, जिसके कारण पूरा बजट विकासात्मक परियोजनाओं पर खर्च किया जाता है,” डॉ. खान का मानना है कि ईरान की समृद्धि और विकास का एक अन्य कारण अपने पड़ोसी अरब देशों के विपरीत अपने लोगों को जीवन के सभी क्षेत्रों में दी गई आज़ादी भी है.

डॉ. ज़फरुल खान ने पश्चिमी मीडिया के उस प्रोपेगेंडा को भी खारिज किया जिसके अनुसार ईरान में महिलाओं पर अत्याचार होते थे और उन्हें हेडस्कार्फ़ के बिना अपने घरों से बाहर जाने की अनुमति नहीं होती है. उन्होंने कहा कि पिछले साल अगस्त में तेहरान और कुछ अन्य शहरों का उन्होंने दौरा किया था और ईरानी महिलाओं को तेहरान की सड़कों पर बिना सिर पर स्कार्फ के चलते हुए देखा था.

उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों द्वारा अपने रास्ते में पैदा की गई बाधाओं के बावजूद अविश्वसनीय विकास हासिल कर लेने वाले देश ईरान के विरूद्ध पश्चिमी शक्तियों ने उसकी छवि खराब करने के लिए दुष्प्रचार करना शुरू कर दिया है.

शोक कार्यक्रम के अंत में, मेरठ की युवा लड़कियों की एक टीम ने डॉ. रईसी और ईरानी नेतृत्व की प्रशंसा में एक गीत प्रस्तुत किया.

अन्य शोक कार्यक्रम

दिल्ली और भारत के प्रमुख शहरों में विभिन्न स्थानों पर कई शोक कार्यक्रम आयोजित होने हैं. दिल्ली में कल ज़ाकिर नगर इलाके के जोगाबाई में एक शोक सभा आयोजित की जाएगी जिसमें ईरान कल्चरल काउंसलर डॉ. एफ. फरीदासर के भाग लेने की संभावना है.

मेरठ से आईं छात्राएं डॉ. इब्राहिम रईसी की स्मृति में शोक गीत प्रस्तुत करती हुईं।

एक अन्य कार्यक्रम शुक्रवार को जामिया कम्युनिटी सेंटर के पास नूर नगर में बाबुल इल्म मस्जिद में आयोजित करने की योजना है, जिसमें ईरानी राजदूत डॉ. इराज इलाही भाग लेंगे. इसी तरह के कार्यक्रम मुंबई, लखनऊ और हैदराबाद में भी आयोजित करने की योजना है.

भारत सरकार ने डॉ. रईसी के निधन पर शोक जताया है:

भारत ने ईरानी राष्ट्रपति रईसी की मृत्यु पर 21 मई को आधिकारिक तौर पर राजकीय शोक मनाया. पूरे देश में सभी सार्वजनिक भवनों पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका हुआ (सम्मान और शोक का प्रतीक) फहराया गया. उत्तर प्रदेश में, शीर्ष से लेकर ज़िला स्तर तक के अधिकारियों को आधिकारिक तौर पर 21 मई को सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाने का निर्देश दिया गया था.

भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ईरान सरकार को शोक संदेश भेजा:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरानी राष्ट्रपति के निधन पर शोक व्यक्त किया. एक्स पर पोस्ट किए गए एक संदेश में, पीएम मोदी ने कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राष्ट्रपति डॉ. सैयद इब्राहिम रईसी के दुखद निधन से बहुत दुखी और स्तब्ध हूं. भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. उनके परिवार और ईरान के लोगों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है. दुख की इस घड़ी में भारत ईरान के साथ खड़ा है.”

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान दूतावास का दौरा किया और डॉ. रईसी और ईरान के विदेश मंत्री के दुखद निधन पर शोक व्यक्त किया. उन्होंने ईरान को ‘भारत का मित्र’ बताया.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए दिवंगत ईरानी राष्ट्रपति और अन्य लोगों के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए बुधवार को तेहरान के लिए उड़ान भरी.

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