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Monday, July 15, 2024
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फिलिस्तीन के समर्थन में पोस्ट लाइक करने पर स्कूल ने मुस्लिम प्रिंसिपल से मांगा इस्तीफ़ा

– अनवारुल हक़ बेग

नई दिल्ली | मुंबई के घाटकोपर इलाके में स्थित प्रतिष्ठित सोमैया स्कूल की बेहद काबिल प्रिंसिपल परवीन शेख़ को एक हिंदुत्ववादी न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के दबाव में स्कूल प्रबंधन द्वारा पद से इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाये जाने के बाद से ही शेख़ को छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से समर्थन मिल रहा है.

चरमपंथी हिंदुत्वा विचारधारा के समर्थक पोर्टल ‘ऑप इंडिया’ द्वारा लगातार फिलिस्तीन- इज़राइल संघर्ष और भारतीय राजनीति पर परवीन शेख़ द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए उनके विचारों को निशाना बनाया रहा है. वहीं दूसरी तरफ स्कूली छात्रों के माता-पिता और छात्रों के अलावा, लेखक, वकील, विद्वान, पत्रकार और सोशल मीडिया यूजर्स परवीन शेख के समर्थन में आवाज़ उठा रहे हैं.

दक्षिणपंथी वेबसाइट ऑप इंडिया द्वारा हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में परवीन शेख़ पर “हिंदू विरोधी” होने और हमास के प्रति सहानुभूति रखने का आरोप लगाया गया है.

ये आरोप केवल एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उनके द्वारा “लाइक” किए गए कुछ पोस्टों पर आधारित है. 24 अप्रैल की एक रिपोर्ट में, ऑपइंडिया ने इस शीर्षक के साथ रिपोर्ट प्रकाशित की, “मिलिए उमर खालिद, हमास, हिंदू विरोधी ट्वीट्स को ‘लाइक’ करने वाली और पीएम मोदी को गाली देने वाली मुंबई के प्रतिष्ठित सोमैया स्कूल की प्रिंसिपल परवीन शेख से”

ऑपइंडिया के लेख की उसके पक्षपातपूर्ण तरीके और भड़काऊ लहजे के लिए बडे़ स्तर पर आलोचना की जा रही है. लेख में आरोप लगाया गया है कि शेख का सोशल मीडिया व्यवहार “परेशान करने वाला” है और “हज़ारों मासूम बच्चों” की देखभाल करने वाले शिक्षक के लिए अशोभनीय है.

ऑपइंडिया का यह लेख परवीन शेख़ द्वारा फिलिस्तीनी मुद्दे से संबंधित पोस्ट लाइक करने, भाजपा सरकार की आलोचना करने और उमर खालिद जैसे छात्र कार्यकर्ताओं का समर्थन करने पर उनको अपराधी की भांति पेश करता है.

ऑपइंडिया के अनुसार, शेख़ ने हाल ही में सुलेमान अहमद की एक पोस्ट को ‘लाइक’ किया, जिसमें उन देशों की सूची दी गई थी, जिन्होंने फ़िलिस्तीन को संयुक्त राष्ट्र में शामिल करने के पक्ष में मतदान किया था. ऑपइंडिया की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 12 अप्रैल को, शेख़ ने जैक्सन हिंकल की एक पोस्ट को ‘लाइक’ किया था, जिसमें हमास नेता इस्माइल हानियेह के उन बच्चों और पोते-पोतियों की प्रशंसा की गई थी जो इज़राइल द्वारा मार दिए गए हैं.

ऑपइंडिया ने लेखिका अरुंधति रॉय, छात्र कार्यकर्ता शरजील उस्मानी और अभिनेत्री स्वरा भास्कर के ट्वीट्स पर शेख के ‘लाइक्स’ को उनके कथित हिंदू विरोधी व्यवहार के सबूत के रूप में प्रस्तुत किया है. वेबसाइट ने शेख द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की आलोचना करने या उनके खिलाफ टिप्पणी करने वाले शैख के ट्वीट्स पर भी आपत्ति जताई.

इसके साथ ही ऑपइंडिया ने स्कूलों में हिजाब पहनने का समर्थन करने वाले और इस पर प्रतिबंध को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन बताने वाले शेख के ट्वीट पर भी प्रकाश डाला.

मुंबई के सोमैया स्कूल की प्रिंसिपल परवीन शेख़ के पास ह्यूमन डेवलपमेंट में मास्टर डिग्री, शैक्षिक प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, शिक्षा में स्नातक डिग्री और शिक्षा में मास्टर डिग्री है. उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा ‘नेट’ भी क्वालीफाई किया हुआ है और वो एक सफल प्रिंसिपल रही हैं. शेख़ एक काबिल शिक्षाविद और पीएचडी विद्वान हैं और वह 12 वर्षों से सोमैया स्कूल से जुड़ी हुई हैं.

ऑपइंडिया की रिपोर्ट के जवाब में, सोमैया ट्रस्ट ने अपने एक्स हैंडल में लिखा है, “जब तक यह (परवीन शेख़ के सोशल मीडिया पर वयक्त किए गए विचार) हमारे संज्ञान में नहीं लाया गया तब तक हम व्यक्त की गई भावनाओं से अनजान थे. हम ऐसी भावनाओं से सहमत नहीं हैं. यह निश्चित रूप से चिंताजनक है. हम मामले की जांच कर रहे हैं.”

हालांकि, इस घटनाक्रम के बाद आश्चर्यजनक रूप से सोमैया स्कूल चलाने वाले सोमैया विद्याविहार एजुकेशन ट्रस्ट ने कथित तौर पर ऑपइंडिया रिपोर्ट द्वारा पैदा किए गए विवाद के कारण शेख़ को प्रिंसिपल के पद से इस्तीफा देने के लिए कहा है.

सौमैया ट्रस्ट के बढ़ते दबाव के बावजूद, शेख़ अपने रुख पर दृढ़ हैं और उन्होंने न सिर्फ इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है बल्कि उन्होंने बोलने की आज़ादी और अभिव्यक्ति के अपने अधिकार का बचाव भी किया है. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं लोकतांत्रिक भारत में रहती हूं, मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांत को बहुत सम्मान देती हूं क्योंकि यह लोकतंत्र की आधारशिला है. यह अकल्पनीय है कि मेरी अभिव्यक्ति पर ऐसी दुर्भावनापूर्ण भड़काने वाली प्रतिक्रिया आई है, जो उनके पक्षपाती एजेंडे को आगे बढ़ाती है”

इस मामले पर चल रही उथल-पुथल के बीच, अपने छात्रों को दिए एक मज़बूत संदेश में, उन्होंने कहा, “आपके प्रिंसिपल के रूप में, मैंने हमेशा हमारे लोकतांत्रिक समाज में हमारे द्वारा संजोए गए मूल्यों द्वारा निर्देशित, समावेशिता और सीखने का माहौल बनाने का प्रयास किया है. इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद, मेरे नेतृत्व में आपका निरंतर भरोसा और विश्वास, इन आदर्शों को बनाए रखने की मेरी प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है.”

शेख़, जिन्होंने सात वर्षों से अधिक समय तक सोमैया स्कूल के प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया है, को संस्थान के विकास और सफलता में उनके योगदान के लिए भी बडे़ स्तर पर प्रशंसित किया जाता रहा है. उनके नेतृत्व में, स्कूल ने नवीन शैक्षिक पहलों को लागू किया है और सांस्कृतिक सद्भाव, सहिष्णुता और शांति के माहौल को बढ़ावा दिया है.

माता-पिता और स्कूल के छात्र छात्रा अपनी प्रिंसिपल परवीन शेख़ में अपना अटूट समर्थन प्रकट कर रहे हैं साथ ही स्कूल प्रबंधन के रवैये पर निराशा भी व्यक्त करते हुए, शेख़ के साथ एकजुट हो गए हैं.

अपने सोशल मीडिया पोस्ट, ईमेल और बयानों में, उन्होंने शेख की ईमानदारी, पेशेवर कौशल और स्कूल समुदाय के प्रति समर्पण की प्रशंसा की है. कई लोगों ने केवल उनकी सोशल मीडिया गतिविधि के आधार पर उन्हें “राष्ट्र-विरोधी” या “हिंदू-विरोधी” करार देने के प्रयासों की आलोचना की है, उनका तर्क है कि यह उनके संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत है.

शेख़ के लिए समर्थन किए जाने वाले स्कूल समुदाय से बाहर तक मौजूद है, कार्यकर्ता और नागरिक समाज संगठन ऑपइंडिया रिपोर्ट और उसके बाद इस्तीफे का दबाव, की निंदा कर रहे हैं. उन्होंने व्यक्तियों, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदायों को उनकी निजी राय और मान्यताओं के लिए निशाना बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति की आलोचना की है और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए बड़ा खतरा करार दिया है.

प्रसिद्ध लेखिका और चित्रकार दीपा बलसावर ने इंस्टाग्राम पर शेख के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा, “यह पागलपन को रोकने और जो सही है उसके लिए खड़े होने का समय है.” उन्होंने शेख की पेशेवर कौशल और नेतृत्व की प्रशंसा की, उन्होंने लिखा, ‘उन पर लगे “दुर्भावनापूर्ण ट्वीट्स” के आरोपों को नज़रअंदाज़ किया जाना चाहिए.

पुरस्कार विजेता लेखिका अनुकृति उपाध्याय ने शेख और उनका समर्थन करने वाले स्कूल के बच्चों के अभिभावकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि, उनके द्वारा “सही पक्ष को चुनना” इतिहास में दर्ज किए जाने लायक है.

परवीन शेख़ के समर्थन में एक एडवोकेट ने लिखा, “ऑपइंडिया जैसों को मुंबई में सांप्रदायिक ज़हर फैलाने न दिया जाए.”

इस्लामिक विद्वान समीउल्लाह खान ने इसे “महिलाओं की गतिविधियों का पीछा करना(स्टॉकिंग)” कहा और “दबाव स्वीकार करना चरमपंथ की जीत है.”

Scroll.in पर, संपादक नरेश फर्नांडीस ने इस “परेशान करने वाले मामले” पर प्रकाश डाला, जबकि स्तंभकार शोभा डे ने “#supportparveenshaikh #standupfordemocracy” हैशटैग के साथ ट्वीट किया, जिसमें कहा गया कि शेख का “अनुकरणीय ट्रैक रिकॉर्ड” एक व्यक्तिगत ट्वीट से अधिक मायने रखता है.

यह विवाद जैसे-जैसे बढ़ता जा रहा है, फिर से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर बहस फिर से शुरू हो गई है. शेख के समर्थकों का तर्क है कि किसी व्यक्ति को उनकी व्यक्तिगत मान्यताओं और विचारों के लिए निशाना बनाना एक खतरनाक मिसाल कायम करता है और एक स्वतंत्र और खुले समाज के सिद्धांतों को कमज़ोर करता है.

यह घटना विशेष रूप से सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर दक्षिणपंथी प्रचार और घृणास्पद भाषण के बढ़ते प्रभाव और ऐसे अभियानों के निशाने पर आने वाले व्यक्तियों और संस्थानों के लिए संभावित परिणामों पर भी प्रकाश डालती है.

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