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Sunday, March 3, 2024
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उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे में एकरूपता के दावे हुए धराशायी

इंडिया टुमारो

देहरादून | समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लिए उत्तराखंड की भाजपा सरकार द्वारा गठित समिति ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दी. बहुप्रचारित ‘एकरूपता’ पहले दिन ही विफल हो गई क्योंकि मसौदे में अनुसूचित जनजाति (एसटी) को इसके दायरे से बाहर कर दिया गया.

यह मसौदा 5 फरवरी से शुरू होने वाले आगामी सत्र में 6 फरवरी को राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा. यूसीसी के लिए मसौदा समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने की थी.

सीएम धामी ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने बीजेपी के एजेंडे के मुताबिक यूसीसी लाने का वादा किया था. उनके मुताबिक ड्राफ्ट रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सरकार यूसीसी का प्रारूप तैयार करेगी और संबंधित बिल विधानसभा में लाएगी और उसे लागू करेगी.

हालांकि श्री धामी ने दावा किया कि उत्तराखंड में यूसीसी का कार्यान्वयन किसी को निशाना बनाने या किसी का विरोध करने के लिए नहीं है, लेकिन मुस्लिम समूहों का आरोप है कि यूसीसी के उनके विरोध पर विचार नहीं किया गया. उनका यह भी आरोप है कि उत्तराखंड का यूसीसी मसौदा मुस्लिम पर्सनल लॉ पर सीधा हमला है क्योंकि वह यूसीसी लागू होने पर बेमानी हो जाएगा.

ऐसा माना जाता है कि उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित होने के बाद यह विधेयक अन्य भाजपा शासित राज्यों के लिए एक ‘मॉडल’ होगा. इस विधेयक के आधार पर गुजरात और असम विधानसभाएं अपने विधेयक को अपना सकती हैं.

अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या पचास हज़ार मानी जाती है, जो राज्य की 1.25 करोड़ की जनसंख्या का लगभग चार प्रतिशत है, हालांकि अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि एसटी राज्य की जनसंख्या का 2.9 प्रतिशत है. अनुसूचित जनजातियाँ मुख्यतः देहरादून, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली और चम्पावत में पाई जाती हैं. उत्तराखंड में एसटी के उल्लेखनीय समूहों में जौनसारी, भोटिया, थारू, राजिस और बुक्सा शामिल हैं.

माना जा रहा है कि बीजेपी ने देशभर के अनुसूचित जनजाति समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश की है कि उन्हें यूसीसी से छूट मिलेगी. बीजेपी की इस रणनीति से झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में उसका काम आसान हो जाएगा, जहां एसटी आबादी काफी ज्यादा है.

यूसीसी मसौदा रिपोर्ट में चार खंड हैं. पहली यूसीसी पर समिति की रिपोर्ट है. दूसरा भाग अंग्रेजी में ड्राफ्ट कोड है. तीसरा समिति की सार्वजनिक परामर्श रिपोर्ट है और चौथा खंड हिंदी में मसौदा संहिता है.

हालांकि मसौदा रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन यह बताया गया है कि इसमें बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने, विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने, सभी धर्मों की लड़कियों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष घोषित करने और लिव-इन रिलेशन के लिए स्व-घोषणा करने तथा पति और पत्नी दोनों को तलाक का समान अधिकार देने की सिफारिश की गई है.

बताया जा रहा है कि यूसीसी मसौदा समिति ने हलाला, इद्दत और तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने की सिफारिश की है. यहां यह उल्लेख किया जा सकता है कि हलाला को मुस्लिम विद्वानों द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है और तीन तलाक पहले से ही केंद्रीय कानून के अनुसार दंडनीय अपराध है. मसौदे का हास्यास्पद हिस्सा इद्दत को दंडनीय अपराध बनाना है. इसके बारे में विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है.

विवाह पंजीकरण यूसीसी मसौदा समिति ने सिफारिश की है कि विवाह का पंजीकरण निर्धारित समय में अनिवार्य किया जाए. इसका मतलब है कि केवल निकाह या सात फेरे ही किसी शादी को मान्यता देने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे. विवाह पंजीकरण का प्रावधान पहले से ही है लेकिन अब इसे अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई है.

लिव-इन रिलेशनशिप यूसीसी मसौदा समिति ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी सुझाव दिया है. लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े को स्वयं इसकी घोषणा करनी होगी और यदि किसी साथी की उम्र शादी की कानूनी उम्र से कम है, तो उसे माता-पिता को सूचित करना होगा.

विरासत यूसीसी मसौदा समिति ने लड़कियों और लड़कों के लिए विरासत में समान अधिकारों की घोषणा की है. यह स्पष्ट है कि इससे मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत इस्लामी विरासत प्रणाली अप्रभावी हो जाएगी. यह इस्लामी विरासत प्रणाली को प्रभावित कर सकता है.

विवाह की आयु प्रारूप समिति द्वारा सिफारिश की गई है कि लड़कियों की विवाह की आयु (18 वर्ष) और लड़कों (21 वर्ष) को यथावत रखा जाए. इससे मुस्लिम लड़की की शादी की उम्र प्रभावित होगी जो युवावस्था की उम्र से निर्धारित होती है.

बताया जा रहा है कि यूसीसी मसौदा समिति को पत्रों, ईमेल और अपने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जनता से 2.3 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं. समिति ने राज्य भर में 38 सार्वजनिक बैठकें भी कीं और सार्वजनिक बातचीत के माध्यम से सुझाव प्राप्त किए.

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