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Sunday, March 3, 2024
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बीजेपी के राम मंदिर इवेंट के मुकाबले ममता बनर्जी की सद्भावना रैली कांग्रेस के लिए एक सबक

रिपोर्टर | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी द्वारा कोलकाता में ‘संहति रैली’ (सांप्रदायिक सद्भाव के लिए रैली) निकाली गई थी जिसकी राजनितिक हल्के में काफ़ी चर्चा है.

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के नफरत अभियान को चुनौती देने वाली इस रैली को एक अच्छे राजनीतिक जवाब और भलाई के काम के रूप में देखा जा रहा है. इससे भी अहम बात यह है कि ममता की यह रैली एक विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस के लिए एक सबक की तरह है.

बनर्जी ने भाजपा पर धर्म को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया और राम के उल्लेख में सीता को गायब कर देने के लिए बीजेपी पार्टी को महिला विरोधी बताया. ममता बनर्जी ने कहा कि “वे राम के बारे में बात करते हैं, लेकिन सीता के बारे में क्यों नहीं करते? वनवास के दौरान वह भी राम के साथ थीं. बीजेपी वाले उनके बारे में नहीं बोलते क्योंकि वे महिला विरोधी हैं. हम देवी दुर्गा के उपासक हैं, इसलिए बीजेपी को हमें धर्म के बारे में व्याख्यान देने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.”

कोलकाता में हाजरा से पार्क सर्कस तक अपनी पांच किलोमीटर की रैली के दौरान कालीघाट मंदिर, एक गुरुद्वारे, एक मस्जिद और एक चर्च में प्रार्थना करने के बाद बनर्जी ने सांप्रदायिक सद्भाव और धार्मिक सौहार्द पर ज़ोर देते हुए मनरेगा मज़दूरी का भुगतान करने से केंद्र के कथित इनकार से लेकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तक लगभग हर राजनीतिक मुद्दे पर बात की.

जुलूस के समापन पर बनर्जी ने कहा कि, “बंगाल के लोगों पर देश को बचाने, धार्मिक सद्भाव को बचाने और सभी धर्मों के लोगों को बचाने की बड़ी ज़िम्मेदारी है.” ‘हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई’ के नारे के साथ, उन्होंने लोगों से आगामी आम चुनावों में भाजपा के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया.

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी लोगों से धर्म के नाम पर वोट नहीं देने बल्कि राज्य के हित में वोट करने का आह्वान किया. मुख्यमंत्री द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंकने से पहले विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया.

ममता बनर्जी ने आगे कहा “कोई राम की पूजा करें या अल्लाह की करें, मुझे कोई आपत्ति नहीं है. मेरी आपत्ति यह है कि देश में बेरोज़गारी अपने चरम पर है. लोगों की खान-पान की आदतों में दखल देने की कोशिश की जा रही है. हालिया घटनाक्रम के अनुसार बनर्जी ने ऐलान किया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी.

बनर्जी ने पार्टी पर हिंदू वोटों को बांटने का आरोप लगाते हुए न सिर्फ़ भाजपा पर निशाना साधा, बल्कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं पर दलाल के रूप में काम करने और मुस्लिम वोटों को बांटने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने वाम दलों पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया है.

राजधानी कोलकाता में भी राम मंदिर के उद्घाटन का जश्न मनाते हुए कई रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी की रैलियां भी शामिल थीं. जादवपुर विश्वविद्यालय में मंदिर उद्घाटन का जश्न मनाने वाली रैली निकालने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए रैली निकालने वाले स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के छात्रों के बीच हाथापाई हुई.

एसएफआई समर्थकों की पुलिस कर्मियों के साथ भी बहस हुई और उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर के बाहर एक रैली आयोजित की और कहा कि वे सांप्रदायिक राजनीति नहीं करने देंगे. तृणमूल कांग्रेस की योजना पश्चिम बंगाल के हर ब्लॉक में ‘सर्व धर्म समन्वय’ (सभी धर्मों का सद्भाव) की थीम पर रैलियां आयोजित करने की है.

तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष का राम मंदिर कार्यक्रम में भाग न लेने और कोलकाता में एक समानांतर रैली आयोजित करने का फैसला ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के नेताओं के साथ-साथ इंडिया (INDIA) गठबंधन के कई दलों ने 22 जनवरी के कार्यक्रम को नज़रअंदाज़ करने का फैसला किया.

हालांकि, बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई ने राम मंदिर मुद्दे पर राज्य में आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है.

एक अन्य घटनाक्रम में, मेट्रो रेलवे सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए दक्षिणेश्वर मंदिर में स्काईवॉक के एक हिस्से को तोड़ने के पूर्व प्रस्ताव पर मेट्रो रेलवे अधिकारियों और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच विवाद पैदा हो गया. बनर्जी ने दक्षिणेश्वर मंदिर स्काईवॉक में कोई भी बदलाव करने से इनकार कर दिया. स्काईवॉक का निर्माण 2018 में 80 करोड़ रुपये के बजट के साथ किया गया था.

भाजपा के राम मंदिर के विभाजनकारी अभियान पर आलोचनात्मक टिप्पणी करते हुए बनर्जी ने कहा कि, “राम की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ (अभिषेक) राजनेताओं का काम नहीं है. “यह संतों और साधुओं का काम है. हम अयोध्या जाकर क्या करेंगे? राजनेता होने के नाते हमारा काम बुनियादी ढांचे का निमार्ण करना है, मैं वह करूंगी.” पार्क सर्कस मैदान, जहां रैली समाप्त हुई वह एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है.

दूसरी ओर, भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पर हिंदू भावनाओं की अवहेलना का आरोप लगाया है. भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि बनर्जी सांप्रदायिक टकराव के लिए ज़मीन तैयार कर रही हैं.

मालवीय ने अतीत में पश्चिम बंगाल में धार्मिक जुलूसों और हाल ही में कुछ साधुओं पर कथित हमलों की घटनाओं का हवाला दिया. जब भाजपा पूरे देश में माहौल खराब कर रही है ऐसे समय में ममता के रैली आयोजित करने के फैसले को राजनीतिक विश्लेषकों ने मास्टरस्ट्रोक बताया है .

बनर्जी के इस कदम को कांग्रेस के लिए एक सबक के रूप में देखा जाना चाहिए, जो बाबरी मस्जिद मामले को इधर उधर करती रही है और भारतीय लोकतंत्र के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर मज़बूत रुख अपनाने में विफल रही है.

देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के रूप में कांग्रेस को मंदिर प्रतिष्ठा दिवस पर भाजपा को चुनौती देने के लिए देश भर के सभी प्रमुख शहरों में शांति मार्च और सद्भाव रैलियां आयोजित करने का नेतृत्व करना चाहिए था.

कांग्रेस, जिसने अयोध्या विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस को नींव प्रदान की, ने राम मंदिर से राजनीतिक लाभ उठाने के भाजपा के अभियान पर कमज़ोर रूप से सवाल उठाया है.

राहुल गांधी, कमल नाथ और अशोक गहलोत सहित पार्टी के अपने नेता बहुसंख्यक समुदाय को प्रभावित करने की कोशिश में मंदिरों में जा रहे हैं, लेकिन उनकी रणनीति की सफलता अभी भी संदिग्ध है.

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को उम्मीद है कि वह हिंदुत्व का राग अलापकर इस साल के लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन में सुधार करेगी.

पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से भाजपा ने 2019 में 18 सीटें जीती थीं और इस बार उसने 35 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है.

बनर्जी मुस्लिम मतदाताओं को अपने पाले में रखने की तैयारी कर रही हैं, क्योंकि वे राज्य की आबादी का 30% हैं और लगभग 100 विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. भाजपा उन पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाकर बनर्जी की रणनीति का मुकाबला करने का प्रयास करेगी.

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