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Sunday, March 3, 2024
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डा. कफ़ील ख़ान पर दर्ज हुई FIR, उनकी किताब को लेकर लगाए गए कई ‘गंभीर’ आरोप

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | गोरखपुर के प्रसिद्ध डाक्टर, डॉ. कफ़ील खान के खिलाफ यूपी की राजधानी लखनऊ के कृष्णानगर थाने में एक एफआईआर दर्ज कराई गई है जिसमें उनकी किताब को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

लखनऊ के कृष्‍णानगर थाने में डॉ. कफील ख़ान और पांच अन्‍य लोगों के खिलाफ उनकी किताब के प्रकाशन पर मामला दर्ज किया गया है, जिसका कुछ पाठ कथित तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ होने का दावा किया गया है।

पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में कई ऐसी धाराएं लगाई गई हैं, जो तहरीर से मेल नहीं खाती हैं और तहरीर के अनुसार यह धाराएं डा. कफ़ील खान पर नहीं बनती हैं।

डा.कफ़ील खान पर एफआईआर दर्ज होने के बाद आज़ाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने इस कार्रवाई का विरोध किया है और इसकी कड़ी निंदा की है।

डा. कफ़ील खान को परेशान करने के लिए यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार कोई मौका हाथ से नहीं जाने देने देती है। योगी सराकर को जब भी कोई मौका मिलता है तो वह खुद कफ़ील खान को कानूनी दांव – पेंच में फंसाने का काम करती है या सरकार के इशारे पर सरकार समर्थक लोग कफ़ील खान को फंसाने का काम करते हैं।

ऐसा ही इस बार हुआ है, जब कफ़ील खान के खिलाफ एक व्यक्ति ने राज्य की राजधानी लखनऊ में उनके खिलाफ एक एफ आई आर दर्ज करवाई है।

लखनऊ के कृष्णानगर थाने में मनीष शुक्ला पुत्र उमाशंकर शुक्ला,निवासी एल डी ए कालोनी कानपुर रोड,लखनऊ ने एक तहरीर देकर डा.कफ़ील खान और उनके 4-5 साथियों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करवाई है, जिसमें उसने कफ़ील खान और उसके साथियों द्वारा यूपी सरकार के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करने, दंगा भड़काने और कफ़ील खान की लिखी पुस्तक को बंटवाने का आरोप लगाया है।

पुलिस को दी गई तहरीर हास्यास्पद है और लगता है कि किसी बच्चे ने एक मनगढंत स्टोरी लिखी है। मजे की बात यह है कि पुलिस ने भी एफ आई आर दर्ज करते वक्त अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल नहीं किया है।

पुलिस ने भी एफ आई आर दर्ज करने में ऐसी धाराएं लगाई हैं, जो दी गई तहरीर के अनुसार धाराएं नहीं लग सकती हैं यानी वह धाराएं नहीं बनती हैं। FIR में गढ़ी गई कहानी और उनपर लगाईं गई धाराएं बिलकुल अलग हैं जिसपर पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने भी विरोध जताया है.

एफ आई आर में दर्ज धाराएं 465, 467, 471 और 295 ऐसी धाराएं हैं, जो पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार तहरीर से ही नहीं बनती हैं, लेकिन पुलिस ने डा. कफ़ील खान और उनके 4 -5 अज्ञात साथियों के खिलाफ दर्ज एफ आई आर में इन धाराओं को लगाया है। पुलिस ने इस तरह से इन धाराओं में एफ आई आर दर्ज कर डा. कफ़ील खान को लम्बे समय तक जेल में रखने की मंशा ज़ाहिर की है।

ज्ञात हो कि डा. कफ़ील खान गोरखपुर में बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में कार्यरत थे। एक बीमारी के चलते दर्जनों बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद इनपर आरोप लगाते हुए इनकी सेवाएं खत्म कर दी गई थीं और इनको जेल में बंद कर दिया गया था। यह काफी समय तक जेल में बंद रहे थे। इनको हाईकोर्ट ने ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया था तब कहीं जाकर यह जेल से बाहर आए थे। बाद में इन्होंने राजनीति में भी कदम रखा था और देवरिया से विधान परिषद का चुनाव भी लड़ा था।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इनसे व्यक्तिगत खुन्नस रखते हैं। योगी आदित्यनाथ को लगता है कि डा. कफ़ील खान आगामी लोकसभा चुनाव भाजपा के खिलाफ लड़ सकते हैं, इसलिए डा.कफ़ील खान को अभी से जेल भेजनें का इंतजाम किया गया है और इसीलिए उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है। बताया जाता है कि डा.कफ़ील खान इस समय यूपी से बाहर किसी अन्य राज्य में मेडिकल कालेज में पढ़ा रहे हैं।

पुलिस को दी गई तहरीर में जिस पुस्तक का उल्लेख किया गया है वह पुस्तक किसी से छुपी हुई नहीं है। डा.कफ़ील खान की यह पुस्तक कई वर्षों से अमेजान पर उपलब्ध है और लोग इसको लेकर पढ़ते हैं।

डा.कफ़ील खान की अंग्रेजी और हिंदी में लिखित और प्रकाशित पुस्तक “गोरखपुर अस्पताल त्रासदी” अमेजान के लिंक को सर्च करके देखा जा सकता है। इस तरह से पुलिस् को दी गई तहरीर में इस पुस्तक के बारे में कही गई बातें बड़ी हास्यास्पद लगती हैं।

आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने डा. कफ़ील खान के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसकी कड़ी निंदा की है।

अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि, “एफआईआर के तहरीर के अवलोकन से ही यह जान बूझकर परेशान करने के लिए दर्ज किया दिखता है। एफ आई आर में कई ऐसी धाराएं लगाई गई हैं, जो स्वयं तहरीर से ही नहीं बनती हैं। इनमें कूट रचना से जुड़ी धाराएं 465, 467, 471 तथा किसी उपासना स्थल को क्षतिग्रस्त करने से जुड़ी धारा 295 आई पी सी शामिल है।”

अमिताभ ठाकुर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, “पुस्तक को गुप्त ढंग से छपाए जाने का आरोप भी इसलिए पूरी तरह से गलत दिखता है, क्योंकि यह पुस्तक वर्षों से अमेजान पर उपलब्ध है, जिसके माध्यम से पिछले कई वर्षों से इसका वितरण हो रहा है।”

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि, “मात्र सत्ताधारी पार्टी के विरोध में पुस्तक लिखने के कारण डा. कफ़ील के खिलाफ यह एफआईआर दर्ज किया गया दिखता है, जिसकी हम और हमारी पार्टी घोर निंदा करते हैं।”

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