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Sunday, June 23, 2024
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उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफाइड उत्पादों पर बैन, जमीयत उलेमा ए हिंद हलाल ट्रस्ट जाएगा कोर्ट

अखिलेश त्रिपाठी, मसीहुज़्ज़मा अंसारी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हलाल लिखे उत्पादों पर रोक लगाए जाने से राज्य में इसको लेकर विवाद गहरा गया है। योगी सरकार के हलाल प्रॉडक्ट पर प्रतिबंध लगाए जाने के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट ने कोर्ट जाने की बात कही है।

इसके साथ ही आज़ाद अधिकार सेना ने हलाल सर्टिफिकेट बैन किए जाने के खिलाफ राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से शिकायत की है।

यूपी सरकार ने राज्य में हलाल लिखे उत्पादों पर पाबंदी लगा दी है। अब इस तरह के उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लागू कर दी गई है।

इस आदेश की अवहेलना करने वालों और आदेश को न मानने वालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। लेकिन विदेश भेजे जाने वाले उत्पादों पर प्रमाणन की छूट रहेगी।

हलाल लिखे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। सभी खाद्य एवं औषधि निरीक्षकों को लगातार इसकी निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

हलाल लिखे उत्पादों का मामला सामने तब आया, जब लखनऊ के हज़रतगंज पुलिस थाने में भाजपा के अवध क्षेत्र के पूर्व अध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन उत्पादों (ख़ासकर शाकाहारी) में हलाल प्रमाण पत्र की ज़रूरत नहीं है। उनके लिए भी प्रमाण पत्र लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा है कि, “इसके ज़रिए जन आस्था से खिलवाड़ कर एक समुदाय विशेष को प्रभावित किया जा रहा है। इसमें राष्ट्र विरोधी साज़िश रचने और आतंकी संगठनों को फंडिंग करने वाले लोग शामिल हैं।”

हज़रतगंज पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने इस सम्बंध में प्रतिबंध का आदेश जारी किया।

लखनऊ के हज़रतगंज पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर में प्रमाण पत्र जारी करने वाली कम्पनियों – संस्थाओं, राष्ट्र विरोधी साजिश रचने वालों, आतंकी संगठनों को फंडिंग करने वाले अज्ञात व अन्य को आरोपी बनाया गया है।

एफआईआर में कहा गया है कि उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए कम्पनियां फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र जारी कर रही हैं। इसे एक विशेष वर्ग को प्रभावित कर आर्थिक लाभ लेने की साज़िश बताया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस इसकी जाँच में जुट गई है।

यूपी सरकार द्वारा हलाल लिखे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद जमीयत उलमाए हिंद ने योगी सरकार के इस फैसले पर नाराज़गी जताई है और इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कही है।

जमीयत उलमा ए हिंद हलाल ट्रष्ट के सीईओ नियाज़ अहमद फारूकी ने यूपी में हलाल लिखे उत्पादों की बिक्री पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने को गलत करार दिया है।

नियाज़ अहमद फारूकी ने कहा है कि, “वह इस मुद्दे को लेकर कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे। हलाल ट्रष्ट में प्रमाणित प्रक्रिया भारत में निर्यात के उद्देश्यों और घरेलू वितरण दोनों के लिए निर्माताओं की आवश्यकता के अनुरूप है। हलाल प्रमाणित उत्पादों की वैश्विक मांग मज़बूत और भारतीय कम्पनियों के लिए ऐसा प्रमाणन प्राप्त करना अनिवार्य है, यह तथ्य हमारे वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भी निर्दिष्ट है।”

उन्होंने कहा कि, “यह उपभोक्ताओं को उन उत्पादों का प्रयोग करने से बचाता है, जो वे कई कारणों से नहीं चाहते हैं। उसलिए यह प्रमाणन बाज़ार में आवश्यकता आधारित उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।”

फारूकी ने कहा कि, “उनकी प्रमाणन प्रक्रिया भारत में निर्यात के उद्देश्यों व घरेलू वितरण और दोनों के लिए निर्माताओं की आवश्यकताओं के अनुरूप है। हलाल सर्टिफाइड उत्पादों की वैश्विक मांग मजबूत है और भारतीय कम्पनियों के लिए ऐसा सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य है।”

उन्होंने कहा, “यह प्रक्रिया केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की अधिसूचना (संख्या 25/2022 – 23) के ज़रिए भी वैध है। इसलिए हम छवि खराब करने के उद्देश्य से लगाए गए निराधार आरोपों के खिलाफ कानूनी कदम उठाएंगे।”

फारूकी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, “हलाल प्रमाणीकरण के खिलाफ झूठे दावों का प्रचार करने वाले कुछ व्यक्ति सीधे तौर पर हमारे राष्ट्रीय हितों को कमजोर कर रहे हैं। हलाल व्यापार 3.5 खरब डॉलर के महत्वपूर्ण उद्योग के रूप में खड़ा है।”

उन्होंने कहा कि, “हलाल सर्टिफिकेशन हमारे देश को लाभ पहुंचाने वाली एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है। यह न केवल
आयात करने वाले देशों के लिए बल्कि भारत आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक आवश्यकता है। विशेष रूप से अपने प्रवास के दौरान हलाल प्रमाणित उत्पादों की तलाश करने वालों के लिए, जैसा कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने भी 6 अप्रैल 2023 के अपने आदेश में रेखांकित किया है।”

यूपी सरकार द्वारा हलाल लिखे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद विदेश भेजे जाने वाले उत्पादों पर प्रमाणन की छूट रहेगी। योगी सरकार का इस तरह का प्रतिबंध आदेश समझ से परे है।

जब भारत सरकार का वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय 6 अप्रैल 2023 के अपने आदेश में रेखांकित करते हुए कह रहा है कि हलाल प्रमाणन ज़रूरी है, उस स्थिति में जब भारत आने वाले पर्यटक हलाल प्रमाणन लिखा हुआ समान तलाशते हैं अपने प्रवास के दौरान।

ऐसी स्थिति में यूपी सरकार का हलाल लिखे उत्पादों पर रोक लगाना कहीं से भी उचित नहीं लगता है। यूपी सरकार इस तरह से घरेलू स्तर पर यानी यूपी में इस तरह की रोक लगाकर भारत सरकार के ही नियम और कानूनों का उल्लंघन कर रही है।

यूपी सरकार के हलाल लिखे उत्पादों पर रोक लगाए जाने से विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले को लेकर अब आजाद अधिकार सेना ने भी योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उसने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से इसकी शिकायत की है।

आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को एक पत्र लिखकर यूपी सरकार की शिकायत की है।

अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में लिखा है कि, “यूपी सरकार का यह आदेश प्रथम दृष्ट्या विधि सम्मत नहीं दिखता है। खाद्य पदार्थ, औषधि, चिकित्सा सामग्री, प्रसाधन आदि से जुड़े किसी भी कानून में ऐसा लिखा नहीं दिखता है कि कोई कम्पनी उन कानून में अपनी ओर से कोई और सर्टिफिकेट या मापन नहीं लिख सकता है।”

अपने पत्र में आगे लिखा है, “अतः यह सही है कि खाद्य पदार्थ, औषधि, चिकित्सा सामग्री, प्रसाधन आदि से जुड़े कानून में अलग से हलाल सर्टिफिकेट की व्यवस्था नहीं है, किंतु इसका यह अर्थ नहीं दिखता है कि यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार से हलाल सर्टिफिकेट लिखता है तो वह गैर कानूनी माना जाए और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।”

उन्होंने आगे पत्र में लिखा है कि, “इन तथ्यों से प्रथम दृष्ट्या ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने जानबूझकर मात्र राजनीतिक कारणों से इन हलाल सर्टिफिकेट वाले पदार्थों पर बैन लगाते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है और ऐसी कानूनी कार्रवाईयां शुरु भी कर दी है। इसलिए मैं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से यह मांग करता हूं कि वह इन तथ्यों का संज्ञान लेते हुए इस संबंध में तत्काल सम्यक कार्रवाई करे।”

यूपी अल्पसंख्यक कांग्रस के प्रदेश अध्यक्ष शाहनवाज़ आलम ने भी हलाल सर्टिफिकेट लिखे उत्पादों पर योगी सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने को गलत बताया है।

उन्होंने कहा है कि, “यूपी सरकार का इस तरह का प्रतिबंध लगाना पूरी तरह राजनीतिक है। योगी सरकार इस तरह से प्रतिबंध लगाकर राजनीतिक फायदा लेना चाहती है, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि लोग समझदार हैं।”

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि, “यूपी सरकार लोगों को आपस में बांटकर राजनीति करने का ख्वाब देख रही है। वह हिंदू-मुस्लिम को आपस में बांटकर वोट हासिल करने का सपना देख रही है। लेकिन यह सपना अब पूरा नहीं होगा, लोग अब समझदार हो गए हैं और अपना भला -बुरा अच्छी तरह से समझते हैं।”

इस प्रतिबंध के पीछे यूपी सरकार द्वारा यह कहा जा रहा है कि हलाल सर्टिफिकेट के जरिए पैसा इकट्ठा किया जाता है और इस पैसे से आतंकवादियों को फंडिग की जाती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि विदेश भेजे जाने वाले उत्पादों पर प्रमाणन की छूट जारी रहेगी, तो क्या विदेश भेजने वाले उत्पादों से आतंकियों को पैसा नहीं मिल सकता है?

इस सवाल का जवाब योगी सरकार नहीं दे सकती है, क्योंकि यूपी में हलाल लिखे उत्पादों पर रोक लगाने का योगी सरकार का फैसला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। यूपी में हलाल लिखे उत्पादों पर रोक लगाकर योगी सरकार तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है।

योगी सरकार ऐसा करके एक समुदाय विशेष को खुश करने की कोशिश कर रही है। योगी आदित्यनाथ इस तरह से मुस्लिमों की भावनाओं और उनकी धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचा रहे हैं। हलाल शब्द मुस्लिमों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है और इसका धार्मिक अर्थ है।

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