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Wednesday, April 17, 2024
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ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले कथित शिवलिंग के कार्बन डेटिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर से मिले कथित शिवलिंग जैसी आकृति के कार्बन डेटिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह बेहद गम्भीर मामला है, इसमें जल्दबाजी दिखाने की ज़रूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया है, जिसे ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति ने चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने किया।

इस मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले शिवलिंग जैसी आकृति की कार्बन डेटिंग पर तुरंत रोक लगा दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि, “यह बेहद गम्भीर मामला है, इसमें जल्दबाजी दिखाने की ज़रूरत नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि, “हाईकोर्ट के विवादित आदेश के निहितार्थों की बारीकी से जांच की जानी चाहिए। इसलिए इसके निर्देशों का कार्यान्वयन अगली तारीख तक स्थगित रहेगा। आदेश की मेरिट की जांच जरूरी है।”

इस मामले की सुनवाई की शुरुआत में ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति के वकील हुजेफा अहमदी ने पीठ को यह बताया कि, कार्बन डेटिंग और सर्वे सोमवार को शुरू हो जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू हो गई। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सारे मामले को सुना और इसके बाद तुरंत अगले आदेश तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोंक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के 12 मई 2023 के आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिका पर केंद्र सरकार, यूपी सरकार और हिन्दू याचिकाकर्ताओं को नोटिस भी जारी किया। केंद्र और यूपी सरकार ने शिवलिंग के प्रस्तावित वैज्ञानिक सर्वेक्षण को फिलहाल स्थगित करने पर सहमति जताई है।

इस मामले में यूपी सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पीठ के सामने पेश हुए। उन्होंने कहा कि, “उस ढांचे को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए, जिसे एक पक्ष शिवलिंग और दूसरा पक्ष फव्वारा बता रहा है।”

इस पर हिन्दू पक्ष के वकील विष्णुशंकर जैन ने कहा कि, “पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों ने पहले ही बता दिया है कि ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा”

यहां पर यह ज्ञात हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मई 2023 को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे के दौरान मिले शिवलिंग जैसी आकृति की कार्बन डेटिंग कराने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को आदेश दिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र ने लक्ष्मी देवी और अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया था।

याचिका पर लक्ष्मी देवी और अन्य की ओर से वकील हरिशंकर जैन और विष्णुशंकर जैन ने अपना पक्ष हाईकोर्ट में रखा था, जबकि ज्ञानवापी मस्जिद की तरफ से एस एफ ए नकवी ने अपना पक्ष रखा था। इसी मामले में केंद्र सरकार की ओर से वकील मनोज कुमार सिंह, यूपी सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता एम सी चतुर्वेदी और मुख्य स्थाई अधिवक्ता बिपिन बिहारी पांडेय हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुए थे और इन्होंने अपना पक्ष रखा था।

इसके अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग भी हाईकोर्ट के सामने पेश हुआ था और उसने कहा था कि बिना क्षति के कार्बन डेटिंग कराई जा सकती है। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र ने इस पर कार्बन डेटिंग कराने का आदेश दिया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र के द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले शिवलिंग जैसी आकृति के कार्बन डेटिंग कराने का आदेश दिए जाने के बाद ही इस आदेश पर सवाल उठने लगे थे, क्योंकि वाराणसी की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की यथास्थिति कायम रखने के आदेश के चलते इसकी कार्बन डेटिंग कराने से इंकार कर दिया था।

वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में इस मामले की मूल वादिनी राखी सिंह समेत सभी अन्य वादियों ने इस आकृति की कार्बन डेटिंग कराने के लिए मुकदमा दायर किया था, लेकिन जिला जज ने इस पर कार्बन डेटिंग कराने का कभी आदेश नहीं दिया। इसी के बाद लक्ष्मी देवी और अन्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाराणसी जिला जज के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की।

हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई के लिए याचिका स्वीकार कर ली गई। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज अरविंद कुमार मिश्र की पीठ में इसकी सुनवाई हुई। जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र ने इस मामले की सुनवाई करते हुए वाराणसी के जिला जज के आदेश को रद्द कर दिया और कार्बन डेटिंग कराने का आदेश दिया।

वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग जैसी आकृति के कार्बन डेटिंग कराने का आदेश जिस तरह से हुआ था, उसको लेकर तुरंत इस पर सवाल उठने लगे थे। उसी समय यह तय हो गया था कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर जाएगा और वैसा ही हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए जिस तरह से रोक लगाई है और मामले को बेहद गम्भीर बताते हुए इस पर जल्दबाजी दिखाने की जरूरत नहीं है जैसी टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट का यह कहना ही अपने आप में सब कुछ कह देता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में अपने आदेश में यह कहना कि, हाईकोर्ट के विवादित आदेश के निहितार्थों की बारीकी से जांच की जानी चाहिए, से हाईकोर्ट के जज अरविंद कुमार मिश्र की भूमिका और उनका आदेश संदेह के घेरे में आ गए हैं।

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