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Sunday, March 3, 2024
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यूपी सरकार के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला, निकाय चुनाव में OBC आरक्षण रद्द


अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के आदेश के खिलाफ फैसला देते हुए उसके नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है और नगर निकाय चुनावों को बिना ओबीसी आरक्षण के ही कराने का आदेश दिया है।

यूपी में होने वाले नगर निकाय चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए ओबीसी आरक्षण को लेकर जारी किया गया सरकार का नोटिफिकेशन रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ओबीसी के लिए आरक्षित अब सभी सीटें जनरल कैटेगिरी की ही मानी जाएगी। साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य में जल्द निकाय चुनाव कराने के भी आदेश दिए हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में रायबरेली के रहने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता वैभव पांडेय ने एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत जब तक राज्य सरकार तिहरे परीक्षण (ट्रिपल टेस्ट) की औपचारिकता पूरी नहीं करती तब तक ओबीसी को कोई आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। राज्य सरकार ने ऐसा कोई परीक्षण नहीं किया है, जो सुप्रीम कोर्ट की नजीर का पूरी तरह से उल्लंघन है।

इसके साथ ही वैभव पांडेय के वकील शरद पाठक ने हाईकोर्ट के समक्ष यह दलील भी दी कि यह औपचारिकता पूरी किए बगैर यूपी सरकार ने 5 दिसंबर को आरक्षण की अनंतिम अधिसूचना जारी कर दी है। इससे यह साफ है कि राज्य सरकार ओबीसी को आरक्षण देने जा रही है। इसके साथ ही याचिका में सीटों का रोटेशन भी नियमानुसार किए जाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील शरद पाठक ने इन कमियों को दूर करने के बाद ही नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने का आग्रह किया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इस मामले की सुनवाई जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और सौरभ श्रीवास्तव की पीठ में पहली बार 12 दिसम्बर 2022 को हुई। पीठ ने इस पर फैसला सुनाते हुए नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने पर रोक लगा दी और साथ ही राज्य सरकार को आदेश दिया कि 5 दिसम्बर को जारी अनंतिम आरक्षण की अधिसूचना के आधार पर अंतिम आदेश जारी न करे।

हाईकोर्ट में राज्य सरकार के वकील ने इसका विरोध भी किया, लेकिन पीठ ने याचिका को सुनवाई के लिए ग्रहण करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि मंगलवार तक नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना न जारी करे। इसके बाद हाईकोर्ट में मंगलवार को फिर इस मामले की सुनवाई हुई और हाईकोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए अगली तारीख निर्धारित कर दी। तब से लेकर 25 दिसम्बर तक अवकाश के दिन भी इस मामले की हाईकोर्ट ने सुनवाई की।

25 दिसंबर को इसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित कर लिया और 27 दिसंबर को अपना फैसला सुनाए जाने का निर्णय किया। आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और सौरभ लवानिया ने यूपी सरकार के 5 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के नगर विकास विभाग द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन को रद्द करते हुए इस आरक्षण नोटिफिकेशन को गैरकानूनी करार दिया। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका को मंजूर किया।

हाईकोर्ट के जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और सौरभ लवानिया की पीठ ने नगर विकास विभाग द्वारा जारी आरक्षण नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया और इसको गैरकानूनी बताया। इस मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा कि, “नगर विकास विभाग का आरक्षण नोटिफिकेशन गैरकानूनी है। चुनाव कब होगा, इसका फैसला सरकार और चुनाव आयोग करे। सरकार चाहे, तो बिना आरक्षण चुनाव कराए। सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 3-टी का पालन करना होगा। संवैधानिक आरक्षण सही तरीके से दिया जाए। कमेटी बनाकर सही तरीके से आरक्षण दिया जाए।”

यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार नगर निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण देकर राज्य में पिछड़ी जातियों को खुश करके भाजपा के साथ लाना चाहती थी। इसीलिए योगी आदित्यनाथ की सरकार ने नगर निकाय चुनावों के लिए राज्य में मनमाने तरीके से ओबीसी आरक्षण लागू करने का मंसूबा बनाया था। इस मंसूबे को पूरा करने के लिए उनकी सरकार के नगर विकास विभाग ने ओबीसी आरक्षण की अधिसूचना भी जारी कर दी थी।

योगी आदित्यनाथ की सरकार जिस तरह से संवैधानिक संस्थाओं को दरकिनार कर मनमाने तरीके से काम करती है, उससे उसके हौंसले बढ़े हुए हैं। योगी आदित्यनाथ को लगता है कि राज्य में मेरा कहना ही सब कुछ है और मेरी जुबान से निकला हुआ हर शब्द ही कानून है।

योगी आदित्यनाथ नगर निकाय चुनावों को अपने तरीके से जीतना चाहते थे।वह चाहते थे कि ओबीसी वर्ग को आरक्षण देकर उनको भाजपा के साथ लाने में वह कामयाब हो जाएंगे और नगर निकाय चुनावों में भाजपा को जिताने में कामयाब हो जाएंगे। इसका देश में बड़ा संदेश जाएगा, जिसका फायदा 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिलेगा। देश की जनता यह समझेगी की यूपी में भाजपा का कोई विकल्प नहीं है। इस तरह लोग भाजपा का लोकसभा चुनाव में समर्थन करेंगे और भाजपा की बड़ी जीत होगी।

योगी आदित्यनाथ के मनमानेपन के खिलाफ वैभव पांडेय जैसे सामाजिक कार्यकर्ता के खड़े होने से और इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा योगी आदित्यनाथ सरकार के मनमानेपन के खिलाफ फैसला सुनाए जाने से योगी आदित्यनाथ की सरकार सकते है। इससे योगी आदित्यनाथ द्वारा संवैधानिक व्यवस्था के विरुद्ध जाने पर भी अंकुश लगा है।इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला योगी आदित्यनाथ और भाजपा के लिए तगड़ा झटका है, इससे उबरने में योगी आदित्यनाथ को बड़ा समय लगेगा।

हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ओबीसी आरक्षण आयोग गठित करने का निर्णय किया है। इस संबंध में ओबीसी आयोग गठित करने के लिए अब से कुछ देर पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है। आयोग ट्रिपल टेस्ट भी करेगा। इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ की सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ आवश्यक होने पर सुप्रीम कोर्ट भी जा सकती है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ट्रिपल टेस्ट का पालन करने के लिए भी आदेश दिया है। ऐसे में योगी की सरकार द्वारा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कहना ओबीसी वर्ग यानि पिछड़ी जातियों को खुश करने का एक शिगूफा है। योगी आदित्यनाथ की सरकार कह रही है कि अब ओबीसी आरक्षण के बाद ही नगर निकाय चुनाव होगा।

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