Saturday, September 24, 2022
Home देश भीमा-कोरेगांव मामला: 82 वर्षीय वरवर राव को मिली ज़मानत, 13 अन्य अभी...

भीमा-कोरेगांव मामला: 82 वर्षीय वरवर राव को मिली ज़मानत, 13 अन्य अभी भी सलाखों के पीछे

सैयद ख़लीक अहमद

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिमी महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में जातिगत हिंसा की साजिश रचने के आरोपी 82 वर्षीय मानवाधिकार कार्यकर्ता और शिक्षाविद पी. वरवर राव को चिकित्सा के आधार पर स्थायी ज़मानत दे दी है.

वह इस मामले में जमानत पाने वाले दूसरे व्यक्ति हैं. इस से पूर्व ज़मानत पाने वालों में मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज थीं जिन्हें 7 दिसंबर, 2021 को रिहा कर दिया गया था.

वरवर राव को मुंबई उच्च न्यायालय ने फरवरी 2021 में पहली बार मेडिकल आधार पर ज़मानत दी थी. इस साल 13 अप्रैल को मुंबई उच्च न्यायालय ने स्थायी चिकित्सा ज़मानत देने से इनकार कर दिया और उन्हें तीन महीने के बाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए कहा. सुप्रीम कोर्ट ने अब स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) पर अगले आदेश तक उनकी अस्थायी ज़मानत की अवधि बढ़ा दी है.

भीमा-कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए 16 लोगों में वरवर राव और सुधा भारद्वाज भी शामिल थे. इसी मामले में अक्टूबर 2020 में मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी (84) को भी गिरफ्तार किया गया था. जुलाई 2021 में मुंबई की एक जेल में न्यायिक हिरासत में फादर स्टेन स्वामी की मौत हो गई थी.

क्या है पूरा मामला?

भीमा-कोरेगांव हिंसा की पृष्ठभूमि क्या थी जिसके परिणामस्वरूप इन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई? 1 जनवरी 1818 को औपनिवेशिक ब्रिटिश सेना के 800 सैनिकों में महार जाति (वर्तमान में दलित, या अछूत के रूप में जाना जाता है) के सदस्य शामिल थे, जिन्होंने तीसरे एंग्लो-मराठा युद्ध में हिंदू ब्राह्मण उच्च जातियों से आने वाले पेशवा की सेना के 28,000 सैनिकों को हराया था. इससे मराठा शासन समाप्त हो गया और पश्चिमी भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना हुई. बी आर अंबेडकर ने 1927 में युद्ध स्थल का दौरा किया था. इसके बाद से ही महार हर साल भीमा-कोरेगांव स्मारक पर जीत का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा होते थे. भीमा-कोरेगांव की लड़ाई का महत्व इस तथ्य में निहित है कि इतिहास में यह पहली बार था कि महार या दलित एक विजयी सेना का हिस्सा थे.

हमेशा की तरह अपनी जीत के 200 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 1 जनवरी, 2018 को बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हुए थे. जैसे ही उच्च जातियों ने इस कार्यक्रम का विरोध किया, दलितों और उच्च जातियों के बीच संघर्ष के कारण उत्सव हिंसक हो गया.

इस उत्सव के आयोजन से पूर्व, 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवार वाडा में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. 250 दलित और अन्य गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि एल्गार परिषद के बैनर तले शनिवार वाडा में एकत्र हुए. कार्यक्रम में कार्यकर्ता प्रकाश अंबेडकर, जिग्नेश मेवानी और अन्य ने भाषण दिए.

जब 1 जनवरी, 2018 को भीमा-कोरेगांव स्मारक पर लगभग 25,000 की संख्या में दलित इकट्ठा हुए तो दलितों और उच्च जाति के मराठों के बीच झड़प शुरू हो गई. इसमें 28 वर्षीय राहुल पटंगाले की मौत हो गई थी. प्रकाश अंबेडकर और दलित संगठनों ने हिंसा के खिलाफ राष्ट्रव्यापी बंद का आयोजन किया.

पुणे पुलिस ने 2 जनवरी, 2018 को दक्षिणपंथी कार्यकर्ता संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़काने के लिए एफआईआर दर्ज की थी.

मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी कौन हैं?

इसके बाद, पुणे पुलिस ने 6 जून, 2018 को एल्गार परिषद के प्रतिनिधि और दलित कार्यकर्ता और मराठी पत्रिका ‘विद्रोही’ के संपादक सुधीर धावले, सुरेंद्र गाडलिंग (नागपुर स्थित मानवाधिकार वकील और इंडियन एसोसिएशन ऑफ द पीपुल्स लॉयर्स के महासचिव), नागपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शोमा सेन, मानवाधिकार कार्यकर्ता रोना विल्सन और महेश राउत को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया.

पुणे पुलिस ने दावा किया कि एल्गार परिषद की बैठक में कार्यकर्ताओं के कथित भड़काऊ भाषणों के बाद एक जनवरी 2018 को झड़पें शुरू हुईं. 28 अगस्त, 2018 को, पी वरवर राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, वर्नोन गोंजाल्विस और गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया गया था.

इसके बाद, पुलिस ने आनंद तेलतुंबडे, फादर स्टेन स्वामी, हनी बाबू, सागर गोरखे, रमेश गायचोर और ज्योति जगताप को गिरफ्तार किया. पुलिस ने उन पर हिंसा की साजिश रचने और हथियारों की तस्करी करने का आरोप लगाया. इन पर माओवादियों को फंडिंग का भी आरोप लगाया गया. पुणे पुलिस ने यह भी दावा किया कि उसे इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करना चाहते थे और राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ना चाहते थे.

कुल मिलाकर 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया. ऐसा तब हुआ जब महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा की सरकार थी. गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों और उनके सहयोगियों ने कहा कि गिरफ्तारियां राजनीति से प्रेरित थीं, पुलिस ने दावा किया कि उन्हें माओवादियों के साथ उनके संबंधों के कारण गिरफ्तार किया गया.

महाराष्ट्र सरकार से सलाह-मशविरा किए बिना मामला एनआईए को सौंपा गया

22 जनवरी, 2020 को राज्य में भाजपा के सत्ता खोने के बाद, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार ने भीमा-कोरेगांव हिंसा की जांच के आदेश दिए. लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य सरकार से सलाह-मशविरा किए बिना मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को स्थानांतरित कर दिया.

अप्रैल 2021 में एक अमेरिकी फोरेंसिक विश्लेषण फर्म – आर्सेनल कंसल्टिंग – ने दावा किया कि उसके पास यह दिखाने के लिए 30 दस्तावेज थे कि एल्गार परिषद मामले में रोमा विल्सन और अन्य लोगों के कंप्यूटरों में आपत्तिजनक दस्तावेज डाले गए थे. इन आरोपों की जानकारी वाशिंगटन पोस्ट ने दी. इसमें आरोप लगाया गया है कि रोमा विल्सन की गिरफ्तारी से 22 महीने पहले मैलवेयर का इस्तेमाल कर साइबर हमलावर द्वारा हत्या की साजिश का पत्र कंप्यूटर में डाला गया था.

एनआईए ने अक्टूबर 2020 में मामले में आरोप पत्र दायर किया था. हालांकि, इस मामले में अदालत के समक्ष आरोप पत्र दाखिल करने के दो साल बाद भी सुनवाई शुरू नहीं हुई है, किसी को नहीं पता कि ट्रायल पूरा करने में एक साल या 10 साल का समय लगेगा. यूएपीए के प्रावधान के अनुसार किसी को चिकित्सा आधार या आरोपी की उम्र को आधार बनाकर ज़मानत की अनुमति नहीं है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की एक अदालत ने असाधारण परिस्थितियों में वरवर राव को ज़मानत दे दी.

इस मामले में गिरफ्तार फादर स्टेन स्वामी की न्यायिक हिरासत में मृत्यु हो गई, सुधा भारद्वाज और वरवर राव को ज़मानत मिल गई, हालांकि, 13 अन्य अभी भी जेल में हैं.

- Advertisement -
- Advertisement -

Stay Connected

16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe

Must Read

जमाते इस्लामी हिंद ने की PFI पर NIA के छापे की निंदा, कहा-‘एजेंसियां राजनीति से प्रभावित न हों’

इंडिया टुमारो नई दिल्ली | भारत के प्रमुख मुस्लिम धार्मिक-सामाजिक संगठन जमाअत इस्लामी हिन्द के अध्यक्ष सय्यद सआदतुल्लाह हुसैनी...
- Advertisement -

यूपी में वक्फ सम्पत्ति को लेकर नया विवाद, सर्वे कर सरकारी ज़मीनों को वापस लेगी योगी सरकार

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो लखनऊ | उत्तर प्रदेश में वक्फ सम्पत्ति के रूप में दर्ज सरकारी जमीनों को...

मायावती के भाजपा पर लगातार हमले से नए राजनीतिक समीकरण की उम्मीद जताते विश्लेषक

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो लखनऊ | बसपा सुप्रीमो मायावती ने हाल ही में दिए अपने कुछ बयानों से...

मौलवी मोहम्मद बाक़र मेमोरियल लेक्चर: वक्ताओं ने मीडिया से उनके पदचिन्हों पर चलने को कहा

सैयद ख़लीक अहमद नई दिल्ली | प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में बीते शुक्रवार को 19 वीं सदी के पत्रकार...

Related News

जमाते इस्लामी हिंद ने की PFI पर NIA के छापे की निंदा, कहा-‘एजेंसियां राजनीति से प्रभावित न हों’

इंडिया टुमारो नई दिल्ली | भारत के प्रमुख मुस्लिम धार्मिक-सामाजिक संगठन जमाअत इस्लामी हिन्द के अध्यक्ष सय्यद सआदतुल्लाह हुसैनी...

यूपी में वक्फ सम्पत्ति को लेकर नया विवाद, सर्वे कर सरकारी ज़मीनों को वापस लेगी योगी सरकार

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो लखनऊ | उत्तर प्रदेश में वक्फ सम्पत्ति के रूप में दर्ज सरकारी जमीनों को...

मायावती के भाजपा पर लगातार हमले से नए राजनीतिक समीकरण की उम्मीद जताते विश्लेषक

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो लखनऊ | बसपा सुप्रीमो मायावती ने हाल ही में दिए अपने कुछ बयानों से...

मौलवी मोहम्मद बाक़र मेमोरियल लेक्चर: वक्ताओं ने मीडिया से उनके पदचिन्हों पर चलने को कहा

सैयद ख़लीक अहमद नई दिल्ली | प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में बीते शुक्रवार को 19 वीं सदी के पत्रकार...

इंटरव्यू में लगे आरोप पर शेहला रशीद पहुंची कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुधीर चौधरी से मांगा जवाब

नई दिल्ली | शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने जेएनयू छात्र संघ की पूर्व नेता शेहला रशीद की याचिका पर पत्रकार सुधीर चौधरी,...
- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here