Saturday, August 13, 2022
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यूपी में योगी सरकार ने हाईकोर्ट में नियुक्त सरकारी वकीलों को किया बर्खास्त

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हाईकोर्ट में नियुक्त सरकारी वकीलों को बर्खास्त कर दिया है और इस फैसले को तुरंत लागू कर दिया गया है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अचानक यह फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से इलाहाबाद से लेकर लखनऊ की हाईकोर्ट की पीठ में इसकी चर्चा ज़ोरों पर है।

हालांकि, सरकार की ओर से इन सरकारी वकीलों की बर्खास्तगी का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है। यह कयास लगाया जा रहा है कि बर्खास्त किए गए सरकारी वकीलों का परफार्मेंस (प्रदर्शन) सरकारी पक्ष के प्रति अच्छा नहीं रहा है।

योगी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में नियुक्त 841 सरकारी वकीलों को उनके पद से बर्खास्त कर दिया है। इन बर्खास्त किए गए सरकारी वकीलों में 505 इलाहाबाद हाईकोर्ट में और 336 लखनऊ पीठ से संबंधित हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपर महाधिवक्ता विनोद कांत को भी बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट में 26 अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता भी बर्खास्त कर दिए गए हैं। 179 स्थाई अधिवक्ता भी हटा दिए गए हैं, 111 ब्रीफ होल्डर सिविल को भी हटा दिया गया है। इसके अलावा क्रिमिनल के भी 141 ब्रीफ होल्डर हटा दिए गए हैं, 47 अपर शासकीय अधिवक्ता भी बर्खास्त किए गए हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 2 चीफ स्टैंडिंग काउंसिल को भी बर्खास्त किया गया है। इनके साथ ही 33 एडिशनल सरकारी वकील भी हटाए गए हैं। लखनऊ पीठ के क्रिमिनल के 66 ब्रीफ होल्डर भी हटा दिए गए हैं। साथ ही 176 सिविल ब्रीफ होल्डर को भी बर्खास्त कर दिया गया है। सरकार की ओर से 59 एडिशनल चीफ स्टैंडिंग काउंसिल और स्टैंडिंग काउंसिल को भी हटा दिया गया है।

यूपी में हाईकोर्ट के इन बर्खास्त किये गए सरकारी वकीलों का आदेश यूपी के विधि एवं न्याय विभाग के विशेष सचिव निकुंज मित्तल की तरफ से जारी किया गया है।

यूपी सरकार की ओर से इन सरकारी वकीलों की बर्खास्तगी का कोई कारण नहीं बताया गया है। यह कयास लगाया जा रहा है कि बर्खास्त किए गए सरकारी वकीलों का प्रदर्शन सरकारी पक्ष के प्रति अच्छा नहीं रहा है। इतनी बड़ी संख्या में यूपी सरकार के सरकारी वकीलों की फौज होने के बाद भी सरकारी मुकदमों में राज्य सरकार की हार हो जाती थी और सरकार को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

शायद इसीलिए योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए एक साथ इतनी बड़ी संख्या में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सरकारी वकीलों को बर्खास्त कर दिया। किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि योगी आदित्यनाथ की सरकार इतना बड़ा फैसला लेकर सरकारी वकीलों को उनके पद से बर्खास्त कर देगी।

यूपी सरकार द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़े सरकारी वकीलों को एक साथ बर्खास्त करने के पीछे एक वजह यह भी है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार भाजपा से जुड़े हुए वकीलों को एडजस्ट करना चाहती है। योगी सरकार भाजपा से जुड़े हुए और भाजपा समर्थक वकीलों को हाईकोर्ट में सरकारी वकील बनाकर उनको आर्थिक रूप से मजबूत बनाना चाहती है। इसके साथ ही भाजपा यह मानकर चल रही है कि पार्टी से जुड़े हुए और पार्टी समर्थक वकीलों को सरकारी वकील बनाने से नए बनने वाले सरकारी वकील भाजपा सरकार का कोर्ट में मजबूती के साथ पक्ष रखेंगे और सरकार को मुकदमों में हारने नहीं देंगे।

आमतौर पर अभी तक राज्य में सत्ता परिवर्तन होने पर नई सरकार अपने समर्थक या पार्टी से जुड़े हुए व्यक्ति को महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता बनाती थी। इसके साथ ही अगर कोई सरकारी वकील विवादित होता था तो उसको हटा देती थी। इसके अलावा सरकारी वकीलों को बड़े पैमाने पर नहीं हटाती थी। लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जिस तरह इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़े हुए सरकारी वकीलों को बर्खास्त किया है, उससे समूचे राज्य में वकीलों में हड़कंप मचा हुआ है और न्यायिक क्षेत्र में तमाम तरह के सवाल सुर्खियों में बने हुए हैं।

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