Friday, August 12, 2022
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मांस निर्यात विवाद: भारत ने बांग्लादेश से मीट एक्सपोर्ट फिर से शुरू करने का आग्रह किया

साल 2022 के अप्रैल से बांग्लादेश द्वारा भारत से मांस आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद, अब भारत सरकार ने बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार से मांस आयात फिर से शुरू करने का अनुरोध किया है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बांग्लादेश सरकार का भारत से मांच आयात रोकने के फैसले के पीछे भारत के सत्तारूढ़ दल के कुछ राजनेताओं द्वारा समय-समय पर दिए गए “गैर-जिम्मेदार” बयानों से कोई लेना-देना है या नहीं? बांग्लादेश की मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि पिछले कुछ महीनों से भारत से पड़ोसी देश ने मांस के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है.

सैयद ख़लीक अहमद

नई दिल्ली | गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में केंद्र में काबिज़ होने के बाद से घरेलू मांस व्यापारियों ने अधिकारियों द्वारा गंभीर उत्पीड़न और धमकी की शिकायत की है, भारत सरकार ने पड़ोसी बांग्लादेश से भारत से मांस का आयात फिर से शुरू करने का आग्रह किया है. मांस कारोबार पर दोनों देशों के व्यापारियों पर असर पड़ा है.

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश की कार्रवाई भारत की सत्ताधारी पार्टी के कुछ वरिष्ठ राजनेताओं द्वारा समय-समय पर दिए गए “गैर-ज़िम्मेदार” बयानों से प्रेरित है या नहीं. बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों का कहना है कि इस साल अप्रैल में बांग्लादेश की आयात नीति में बदलाव के बाद से बांग्लादेश के व्यापारी भारत से मांस का आयात नहीं कर रहे हैं.

पड़ोसी देश के नए कानूनों के तहत, बांग्लादेश में मांस के आयात की अनुमति मत्स्य और पशुधन मंत्रालय द्वारा अनुमोदन के बाद ही दी जाती है.

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने कुछ दिनों पहले एक रिपोर्ट में दावा किया है कि ढाका में भारतीय दूतावास ने बांग्लादेश सरकार से भारत से मांस के आयात को फिर से शुरू करने का आग्रह किया है.

भारत पिछले 7-8 वर्षों से बांग्लादेश को जमे हुए मांस का निर्यात कर रहा था. भारत वर्तमान में इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, हांगकांग, कंबोडिया, ब्रुनेई, सेशेल्स, मॉरीशस, सऊदी अरब, मिस्र, अल्जीरिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित दुनिया के लगभग 70 देशों में जमे हुए मांस का निर्यात करता है.

हालाँकि, भारत बांग्लादेश को बासमती चावल, गेहूं और चीनी का निर्यात भी कर रहा है, लेकिन भारतीय दूतावास के पत्र ने केवल जमे हुए मांस का मुद्दा उठाया है.

भारतीय दूतावास ने बांग्लादेश के पशुधन मंत्रालय से इस मुद्दे को हल करने का आग्रह किया है.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑल इंडिया बफेलो एंड शीप मीट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एआईएमएलईए) और बांग्लादेश मीट इंपोर्टर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन (बीएमआईटीए) ने बांग्लादेश सरकार से भारत से मांस के आयात पर प्रतिबंध हटाने की अपील की है.

लेकिन फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय पशु प्रजनकों के हितों की रक्षा और घरेलू पशुधन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बांग्लादेश ने भारत से मांस आयात बंद कर दिया है.

बांग्लादेश अपनी मांस की मांग को पूरा करने के लिए अब तक भारत सहित 14 देशों से मांस का आयात करता रहा है. हालांकि, इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि बांग्लादेश ने भारत के अलावा अन्य निर्यातकों से भी मांस का आयात बंद किया है या नहीं. भारत कुछ महीने पहले तक बांग्लादेश के लिए मांस आपूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत रहा है.

अखबार की रिपोर्ट कहती है कि, बांग्लादेश अब मांस उत्पादों के मामले में आत्मनिर्भर है. समाचार पत्र ने पशुधन सेवा विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि, बांग्लादेश ने 2020-21 में लगभग 7.4 मिलियन टन की वार्षिक मांग के मुकाबले 8.44 मिलियन टन मांस का उत्पादन किया. हालांकि, बांग्लादेश सरकार ने भारत से मांस के आयात पर प्रतिबंध के पीछे आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई कारण नहीं बताया है.

किसी भी अरब मुस्लिम देश से भी भारत से मांस के आयात पर प्रतिबंध के बारे में कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं है. एक प्रमुख मांस निर्यातक सिराजुद्दीन कुरैशी ने संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि भारत से मांस निर्यात पर किसी भी देश की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है. हालाँकि, यदि कुछ देशों के मांस आयातक भारत से मांस का आयात नहीं करते तो यह एक अलग मुद्दा है.

ऑल इंडिया बफेलो एंड शीप मीट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (AIMLEA) सचिव आर के गोयल ने इस मुद्दे पर बोलने से इनकार कर दिया. हालांकि, AIMLEA के प्रवक्ता फौज़ान अलवी ने जवाब दिया कि बांग्लादेश सरकार को पत्र लिखने का मुद्दा उठाना उचित नहीं, क्योंकि भारत सरकार कई देशों में चीनी, बासमती चावल, गेहूं आदि सहित कई अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात पर ज़ोर दे रही है. उन्होंने कहा, भारत सरकार ने हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत से मछली के निर्यात का मुद्दा उठाया था.

भारत से निर्यात किए जाने वाले पांच शीर्ष कृषि उत्पादों में से मांस भी एक है. अलवी के अनुसार, मांस निर्यात के माध्यम से उत्पन्न वार्षिक राजस्व लगभग 3.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर या मौजूदा विनिमय दर के अनुसार 28 हज़ार करोड़ रुपये है.

कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ज़िम्मेदार कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के अनुसार, मांस के निर्यात के लिए पूरे भारत में कुल 111 बूचड़खाने हैं. उन सभी के पास लाइसेंस हैं और वे एपीडा के साथ पंजीकृत हैं, जिनमें से अधिकांश पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित हैं.

APEDA केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक एजेंसी है. एपीडा द्वारा तैयार भारतीय रेड मीट इंडस्ट्री मैनुअल का दावा है कि भारत ने 2018-19 में 1.24 मिलियन टन भैंस के मांस का निर्यात किया था.

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