Tuesday, May 17, 2022
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एक अनार सौ बीमार-एक सीट के कई दावेदार; लखनऊ की कैंट सीट ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में एक कहावत प्रचलित है- एक अनार सौ बीमार। इस कहावत का अर्थ होता है कि एक वस्तु के कई दावेदार। यह कहावत आज यूपी में विधानसभा चुनाव में भाजपा पर लागू हो रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विधानसभा सीट कैंट को लेकर भाजपा में जंग चल रही है और इस सीट के लिए कई राजनेता अपनी उम्मीदवारी को लेकर इस पर अपना दावा ठोंक रहे हैं। हालांकि, भाजपा इस सीट पर अभी तक कोई उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में राजधानी लखनऊ की विधानसभा सीट कैंट भाजपा के जी का जंजाल बन गई है और भाजपा इस सीट पर अभी तक किसी उम्मीदवार का नाम नहीं तय कर पाई है। इस सीट पर सपा छोड़कर भाजपा में गईं मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव सहित कई दिग्गज राजनेता अपना दावा जता रहे हैं और उम्मीदवार बनने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

लखनऊ की कैंट विधानसभा सीट से 2017 में रीता बहुगुणा जोशी चुनाव जीती थीं। यह चुनाव जीतकर योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री बनी थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इनको इलाहाबाद से अपना उम्मीदवार घोषित कर चुनावी मैदान में उतारा और यह चुनाव जीत कर लोकसभा सदस्य बन गईं।

इसके बाद इन्होंने योगी सरकार से मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इनके इस्तीफा देने से इस सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें भाजपा के सुरेश तिवारी विधायक चुने गए। यहां यह ज्ञात हो कि रीता बहुगुणा जोशी 2012 में इसी कैंट सीट से सपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर विधायक बनी थीं। लेकिन 2017 में वह भाजपा में शामिल हो गईं और भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर विधायक बनी थीं।

इसी सीट पर अपर्णा यादव भी चुनाव लड़ी थीं। अब रीता बहुगुणा जोशी इस सीट पर अपने पुत्र मयंक जोशी को विधानसभा चुनाव लड़ाना चाहती हैं। वे चाहती हैं कि भाजपा उनके पुत्र मयंक जोशी को अपना उम्मीदवार घोषित करे। यही नहीं, रीता बहुगुणा जोशी अपने पुत्र के लिए इलाहाबाद की लोकसभा सीट भी छोड़ना चाहती हैं। वे कहती हैं, “यह मेरा अंतिम चुनाव है। इसके बाद मैं चुनावी राजनीति से दूर हो जाऊंगी। इसलिए मेरे पुत्र मयंक को भाजपा कैंट से उम्मीदवार घोषित करे। लेकिन भाजपा ने अभी तक इस पर अपना मुंह नहीं खोला है।

चर्चा यह भी है कि अगर भाजपा ने रीता बहुगुणा जोशी के पुत्र को उम्मीदवार नहीं बनाया,तो वह भाजपा से इस्तीफा देकर सपा में जा सकती हैं और सपा उनके पुत्र को उम्मीदवार घोषित कर सकती है।

कैंट सीट पर भाजपा में हाल ही में शामिल हुईं अपर्णा यादव भी अपना दावा ठोंक रही हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि वह यहां से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं, इसलिए उनको उम्मीदवार बनाया जाए। अपर्णा यादव के दावा ठोकने से भाजपा बड़े पसोपेश में है। भाजपा समझ रही है कि अगर अपर्णा यादव को उम्मीदवार नहीं घोषित किया गया, तो वह फिर भाजपा को भी छोड़ सकती हैं। भाजपा ने जिस मकसद को ध्यान में रखकर अपर्णा यादव को पार्टी में शामिल किया है, वह पूरा नहीं होगा।

कैंट सीट से डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा भी चुनाव लड़ना चाहते हैं। वह भी इस सीट पर अपना दावा जता रहे हैं। वह अपने लिए इस सीट को सुरक्षित मानते हैं, इसलिए यहां से उम्मीदवार बनने के लिए वह सारी तिकड़में लगा रहे हैं। वह लखनऊ के मेयर रह चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी हिम्मत अन्य जगह से विधानसभा चुनाव लड़ने की नहीं पड़ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण वह हवा-हवाई वाले नेता हैं, उनकी जनता पर कोई पकड़ नहीं है। वह अमित शाह की परिक्रमा कर राजनीति करने वाले नेता हैं।

इसके अलावा इस सीट से मौजूदा विधायक सुरेश तिवारी खुद यहां से अपना दावा कर रहे हैं। सुरेश तिवारी अटल बिहारी वाजपेयी के शिष्य हैं। इनकी संघ पर तगड़ी पकड़ है। इनको हिलाना -डुलाना इतना आसान नहीं है।

इनके अलावा यूपी के जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह भी इस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। महेंद्र सिंह को भाजपा कुंडा से विधानसभा चुनाव लड़ाना चाहती है, किंतु निर्दलीय विधायक कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भईया के सामने इनकी चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं पड़ रही है। फिलहाल यह विधान परिषद के सदस्य हैं। यह मूल रूप से यूपी के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले हैं। लेकिन यह जमीनी स्तर के राजनेता नहीं हैं बल्कि परिक्रमा करने वाले नेता हैं।

लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र से लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया अपनी बहू को उम्मीदवार बनवाना चाहती हैं। संयुक्ता भाटिया चूंकि लखनऊ की मेयर हैं और उनकी आरएसएस से लेकर भाजपा के बड़े नेताओं तक से संपर्क हैं। वह अपने इन्हीं संपर्कों के जरिए अपनी बहू को भाजपा से उम्मीदवार घोषित करवाने की जुगत भिड़ा रही हैं। उनको उम्मीद है कि उनकी बहू को भाजपा कैंट सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर देगी। जबकि भाजपा के लिए यह इतना आसान नहीं है।

लखनऊ की इस कैंट सीट से नीरज सिंह भी अपना दावा ठोंक रहे हैं। नीरज सिंह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे हैं। नीरज सिंह अपने पिता राजनाथ सिंह के प्रभाव के चलते इस सीट पर अपनी उम्मीदवारी पक्की मान रहे हैं।

भाजपा के लिए लखनऊ की यह कैंट विधानसभा सीट जी का जंजाल बन गई है। लखनऊ कैंट से इतने दावेदारों के सामने आने से भाजपा इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं घोषित कर पा रही है।

लखनऊ कैंट सीट पर उम्मीदवार घोषित किए जाते ही भाजपा में बगावत का होना भी तय माना जा रहा है। भाजपा को इस परिस्थिति का आभास है, लेकिन वह इसका समाधान नहीं खोज पा रही है। इस तरह भाजपा एक अनार सौ बीमार वाली कहावत से गुज़र रही है।

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