Tuesday, May 17, 2022
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बनारस: CAA प्रदर्शन में पुलिस ‘हमले’ में 15 वर्षीय तनवीर के सर का एक हिस्सा अलग हो गया था

मसीहुज़्ज़मा अंसारी

वाराणसी | प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में 20 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के विरोध में निकली रैली पर पुलिस लाठीचार्ज में 15 वर्षीय तनवीर का सर बुरी तरह ज़ख़्मी हुआ था जो लंबे इलाज के बाद भी सामान्य नहीं हो सका है. डॉक्टर के दावे के अनुसार तनवीर का दिमाग़ कमज़ोर हो चुका है.

तनवीर किसी भी प्रदर्शन का हिस्सा नहीं था फिर भी पुलिस ने उसे गली में पकड़कर बुरी तरह मारा. परिवार के अनुसार सर का हिस्सा दो टुकड़े होकर एक तरफ झूल गया था. 55 टांके लगे थे और अब तक इलाज चल रहा है.

तनवीर का परिवार आर्थिक रूप से कमज़ोर है, पिता सलीम साड़ी की बुनाई का काम करते हैं और इलाज में लाखों रुपये ख़र्च कर चुके हैं.

तनवीर के पिता ने इंडिया टुमारो को बताया कि कोई भी सरकारी मदद उन्हें नहीं मिली है.

घटना के दो साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी परिवार ने इस घटना को लेकर कोई भी मामला दर्ज नहीं कराया है.

तनवीर अपने 4 भाई-बहनों में सबसे बड़ा है. उसके दो छोटे भाई और एक छोटी बहन है.

तनवीर के पिता सलीम ने इंडिया टुमारो से बात करते हुए कहा कि, “बेटे के इलाज में पिछले दो सालों में हमने 3 लाख से अधिक रुपये ख़र्च कर दिया है. डॉक्टर के अनुसार अधिक चोट के कारण मेरे बेटे का दिमाग कमज़ोर हो गया है.”

उन्होंने बताया कि, “मेरा बेटा अब सामान्य व्यवहार भी नहीं करता, वह बहुत चिड़चिड़ा हो गया है. डॉक्टरों ने बताया है कि चोट के कारण दिमाग़ सिकुड़ गया है.”

उन्होंने कहा, “लगभग एक महीने तक तनवीर को ट्रॉमा सेंटर में रखना पड़ा. हालत बहुत नाज़ुक थी. बस ऊपर वाले ने किसी तरह बचा लिया.”

हैरत की बात यह है कि तनवीर किसी भी प्रदर्शन का हिस्सा नहीं था फिर भी उसकी मुस्लिम पहचान के कारण पुलिस ने निर्दयतापूर्वक मारा जिसके कारण तनवीर के साथ-साथ परिवार भी दो साल से इलाज को लेकर आर्थिक संकट से जूझ रहा है.

परिवार ने बताया कि, “जब हम घायलों को उठा रहे थे तभी मैंने अपने बेटे को देखा जो दूर लहूलुहान पड़ा था. जब हम उसे ट्रॉमा सेंट्रल ले गए तो उसके बचने की उम्मीद खो चुके थे.”

बजरडीहा के एक बुज़ुर्ग ने बताया कि, “पुलिस वाले छोटे-छोटे बच्चों को भी बहुत बुरी तरह मार रहे थे. 8, 10 और 15 साल तक के बच्चों को पुलिस ने निशाना बनाया जो कि प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे.”

पुलिस ने कई ऐसे बच्चों को मारा जो घर से बाहर सामान लेने के लिए निकले थे और लाठीचार्ज में मची अफरातफरी में घर नहीं पहुंच सके और पुलिस ने उन्हें निशाना बनाया.

पुलिस हमले में बजरडीहा में आठ साल के सग़ीर की मौत और 15 साल के तनवीर की गंभीर चोट भी इस बात की तस्दीक़ करती है कि पुलिस ने बच्चों को मारा और उन्हें निशाना बनाया.

तनवीर के पीड़ित परिवार ने इंडिया टुमारो को बताया कि, “लॉकडाउन में काम बंद था, फिर कोरोना की दो लहर में परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमज़ोर हो गया. उसमें इलाज का ख़र्च उठाना भी बहुत मुश्किल था.”

बनारस के बजरडीहा में नागरिकता क़ानून के विरोध में निकली रैली पर पुलिस बर्बरता की दर्जनों कहानियां हैं जो कहीं दर्ज भी न हो सकीं. बजरडीहा में पुलिस लाठीचार्ज में एक मौत हुई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे.

कुछ घायल लंबे इलाज के कारण आर्थिक रूप से कमज़ोर हो गए, कुछ इलाज के बाद भी नहीं बच सके जिनकी बाद में मौत हो गई. कुछ पुलिस के कथित फर्जी केस से अभी तक परेशानी में हैं.

तनवीर आलम के पिता मोहम्मद सलीम ने इंडिया टुमारो को बताया कि, “पुलिस लाठीचार्ज में मेरे बेटे को चोट लगी और गहरा ज़ख़्म लगा. तनवीर प्रदर्शन में भी शामिल नहीं था, वह तो घर के सामने ही छोटे बच्चे को गोद में लेकर निकला था जिसके बाद पुलिस लाठीचार्ज में चोटिल हो गया.”

उन्होंने बताया, “लाठीचार्ज के बाद हमें ये ख़बर ही नहीं थी कि यह बाहर है. हम लोग घर के सेहन में घायलों को उठाकर लारहे थे जिनमें कुछ बेहोश थे और कुछ लहूलुहान थे.”

एक प्रत्यक्षदर्शी ने इंडिया टुमारो को बताया कि, “प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से रैली निकाल कर आगे बढ़ रहे थे तभी अचानक पुलिस ने हमला कर दिया”.

उन्होंने बताया कि, “20 दिसंबर 2019 को CAA के विरोध में सैकड़ों लोग अपने घरों से निकले थे. जुमा का दिन था, शाम 4 बजे के लगभग लोग सड़क की तरफ बढ़ रहे थे तभी पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया.”

CAA आंदोलन के दैरान बनारस के बजरडीहा में पुलिस लाठीचार्ज में सग़ीर नाम के एक 8 साल के बच्चे की भी मौत हुई थी.

गली को घेर कर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया

स्थानीय लोगों ने इंडिया टुमारो से बात करते हुए आरोप लगाया कि, “पुलिस ने गली को दोनों तरफ से घेर कर ‘हमला’ कर दिया जबकि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण विरोध के लिए जमा हुए थे.”

बजरडीहा के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि, “शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज करने वालों में कुछ लोग पुलिस से नहीं लग रहे थे बल्कि किसी और संगठन के सम्बंधित लग रहे थे.”

लोगों ने बताया कि, “प्रदर्शनकारियों को भागने का मौका नहीं दिया गया जिसमें काफी लोग ज़ख़्मी हुए.”

पुलिस पर सीसीटीवी कैमरा तोड़ने का आरोप

इंडिया टुमारो से बात करते हुए बजरडीहा के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि लाठीचार्ज के बाद पुलिस ने उन घरों को निशाना बनाया जहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे.

नाम नहीं बताने की शर्त पर एक युवक ने इंडिया टुमारो को बताया कि, “रात के अंधेरे में पुलिस ने लोगों के घरों में बांस की सीढ़ियों के सहारे चढ़ कर घर में प्रवेश किया और जिन घरों में सीसीटीवी फुटेज मौजूद थे उसे अपने साथ ले गई या रिकॉर्ड डिलीट कराया और तोड़ दिया.”

पुलिस बर्बरता के साक्ष्यों को नष्ट किया गया

एक युवा ने इंडिया टुमारो को बताया कि, “काफी लोगों ने पुलिस बर्बरता का वीडियो बनाया था जिसमें साफ देखा जा सकता था कि पुलिस ने किस प्रकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हमला कर लोगों को लहूलुहान कर दिया था, इसलिए पुलिस साक्ष्य मिटाने के लिए लोगों पर दबाव बनाकर वीडियो और सीसीटीवी रिकॉर्ड डिलीट करवा रही थी.”

एक और प्रत्यक्षदर्शी ने इंडिया टुमारो को बताया कि, “गलियों में और सड़क पर जो सीसीटीवी कैमरे लगे थे उसे भी पुलिस ने तोड़ दिया और जिन लोगों के मोबाइल में पुलिस बर्बरता की वीडियो मौजूद थी उसको डिलीट करवाया.”

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