Tuesday, May 17, 2022
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राजस्थान: पुलिस थानों में धर्म स्थल निर्माण रोकने वाले आदेश को हाई कोर्ट ने बताया उचित

ख़ान इक़बाल | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | राजस्थान उच्च न्यायलय ने रविवार को सरकारी परिसरों में मंदिर व अन्य धार्मिक स्थल के निर्माण पर रोक लागाने वाले पुलिस महानिदेशक के आदेश को उचित ठहराया है.

राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश अक़ील कुरैशी और न्यायमूर्ति रेखा बोहरा की बेंच ने एक याचिका की सुनवाई में यह फैसला दिया है.

इस याचिका में 25 अक्टूबर 2021 को पुलिस आवास विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. पौन्नुचामी के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई थी जिसमें कहा गया था की कार्यालय परिसर और पुलिस थानों में बनाए गए पूजा स्थल क़ानून सम्मत नहीं हैं.

इस संबंध में सर्कुलर जारी करते हुए राजस्थान पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (आवासन) ए. पौंनुचामी ने कहा था कि, “राजस्थान धार्मिक भवन एवं स्थल अधिनियम 1954’ के नियमों का पालन करवाये जाने के संबंध में जारी परिपत्र का मुख्य उद्देश्य प्रभावशाली लोगों द्वारा थानों में धार्मिक स्थल निर्माण करवाकर अनावश्यक दखल की संभावना को रोकना है.”

पौन्नुचामी द्वारा जारी किये गए इस आदेश पर काफी हंगामा भी हुआ था. बीजेपी ने इस सर्कुलर को “हिन्दू विरोधी” बताया था वहीं कई सामाजिक संगठनों ने इसका स्वागत भी किया था.

राजस्थान उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता पूजा गुरनानी की याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है तथा राजकीय संस्थानों में पूजा स्थल का निर्माण नहीं किया जा सकता.

न्यायालय ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को ख़ारिज किया कि, “राज्य को अधिकार नहीं है की वह पुलिस सहित किसी भी व्यक्ति की धार्मिक आस्था में दखल दे.”

इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि, “सरकारी भवन व परिसर धर्मनिरपेक्ष स्थल हैं और वहां किसी एक धर्म के धार्मिक स्थलों का निर्माण नहीं किया जा सकता, संवैधानिक लोकतंत्र को बहुसंख्यक लोकतंत्र में नहीं बदला जा सकता.”

पिपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ (PUCL) ने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है. पीयूसीएल राजस्थान की अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव का कहना है की, “कानूनी रूप से स्पष्ट है कि कोई भी सरकारी स्थल, भवन, सार्वजनिक स्थान, पार्क इत्यादि में कोई भी धार्मिक स्थल नहीं बनाया जा सकता जब तक की जिला कलेक्टर या अन्य उचित सरकारी अधिकारी अनुमति नहीं दे.”

उन्होंने कहा कि, “कानून का क्रियान्वयन सही ढंग से होना चाहिए, पुलिस थानों में मंदिरों का निर्माण लगातार हो रहा है और अधिकारी आँखें मूंदें रहते हैं, केवल एक सर्कुलर निकाल देने से ज़्यादा कुछ नहीं बदलने वाला.”

उन्होंने कहा कि, “इस कानून का क्रियान्वन तभी संभव होगा जब कोई पुलिस अधिकारी या थाना अधिकारी जो ऐसे निर्माण कार्यों को प्रोत्साहित करता है उनके खिलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज किये जाएं.”

जमाअत इस्लामी हिंद ने भी उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले का स्वागत किया है लेकिन साथ ही चिंता भी व्यक्त की है.

जमाअत इस्लामी हिंद राजस्थान के महासचिव डॉक्टर इक़बाल सिद्दीक़ी ने इंडिया टुमॉरो से बात करते हुए कहा कि, “हम इस फ़ैसले का स्वागत करते हैं. या तो सरकारी संस्थानों में किसी भी धर्म का कोई निशान या उनके प्रार्थना स्थल ना हों या फिर सभी धर्मों का होना चाहिए.”

डॉक्टर सिद्दीक़ी के अनुसार, “राज्य के लगभग हर थाने और सरकारी इमारतों में मंदिर स्थापित हैं, राजस्थान यूनिवर्सिटी परिसर में सात मंदिर हैं ऐसे में इस आदेश की वास्तविक पालना तभी होगी जब पहले से स्थापित ग़ैर क़ानूनी धार्मिक स्थल हटाए जाएँ.”

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए.पौन्नुचामी ने पुलिस अधिकारियों को भेजे गए सर्कुलर में जिस अधिनियम का ज़िक्र किया था वह अधिनियम “राजस्थान धार्मिक भवन एंव स्थल अधिनियम 1954” है. यह अधिनियम सरकारी कार्यालयों और पुलिस थानों में धार्मिक स्थल निर्माण को निषिद्ध ठहराता है.

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