Thursday, January 27, 2022
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CAA त्रुटिपूर्ण, यह संविधान के सिद्धांतों के विरुद्ध है: न्यायामूर्ति ए.के. गांगुली (सेवानिवृत्त)

इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एके गांगुली ने कहा है कि 2019 में भाजपा सरकार द्वारा पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) त्रुटिपूर्ण है और संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है.

यह बातें जस्टिस गांगुली ने फोरम फॉर डेमोक्रेसी एंड कम्युनल एमिटी (FDCA) द्वारा आयोजित वेबिनार “भारतीय संविधान में समानता, गैर-भेदभाव और नागरिकता” में बोलते हुए कहा.

इस वेबिनार में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एके गांगुली के अलावा पूर्व विदेश सचिव और एफडीसीए के अध्यक्ष मुचकुंद दुबे और जमाअत इस्लामी हिन्द के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व FDCA सचिव प्रो. मुहम्मद सलीम इंजीनियर शामिल थे.

जस्टिस गांगुलीने कहा कि, “संविधान में, आपको धर्म के आधार पर नागरिकता देने का संकेत भी नहीं मिलेगा”, उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि यह संविधान की प्रकृति के खिलाफ है.”

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “धर्म के आधार पर नागरिकता के संबंध में कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है.”

यह बताते हुए कि “सीएए संविधान के अनुच्छेद 6 की अवहेलना करता है, “न्यायमूर्ति गांगुली ने कहा, “संविधान के अनुच्छेद 10 और 11 संसद को नागरिकता पर कानून बनाने की अनुमति देते हैं, लेकिन वे कानून संविधान के खिलाफ नहीं हो सकते.”

उन्होंने कहा, “इस प्रकार, सीएए 2019 त्रुटिपूर्ण क़ानून है.”

जस्टिस गांगुली ने समझाते हुए कहा, “सीएए संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. यह देश को विभाजित करने के लिए औपनिवेशिक शक्तियों द्वारा अपनाए गए हथकण्डों के समान है. संविधान की अपनी नैतिकता है. यह सिर्फ अक्षर और शब्द नहीं हैं.”

पूर्व विदेश सचिव और एफडीसीए के अध्यक्ष मुचकुंद दुबे ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि सीएए बेहद भेदभावपूर्ण है.

उन्होंने कहा, “नागरिकता समानता के सिद्धांत पर आधारित है और इसके बिना अपना अर्थ खो देती है. सीएए भेदभावपूर्ण है. यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है.”

अपने व्याख्यान में मुचकुंद दुबे ने बताया, “एक सुस्थापित ‘नॉन-रेफाउलमेंट का सिद्धांत है जिसके तहत किसी को भी उस देश में वापस नहीं किया जा सकता है जहां उन्हें यातना, अपमानजनक व्यवहार आदि का सामना करना पड़ सकता हो.”

उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में न्यायपालिका लोगों की आखिरी उम्मीद है. हालाँकि, न्यायपालिका को हमारे संविधान की रक्षा के लिए और अधिक करने की आवश्यकता है.”

FDCA सचिव प्रो. मुहम्मद सलीम इंजीनियर ने वेबिनार के समापन पर अतिथि वक्ताओं न्यायमूर्ति गांगुली और अन्य को धन्यवाद दिया.

प्रो. सलीम ने कहा, “हमारे संविधान के चार मूल्य स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व हैं जिनपर खतरा मंडरा रहा है. फिर भी हमारा देश इन्हीं नींव और सिद्धांतों पर खड़ा है.”

प्रो. सलीम ने कहा, “समानता के संदर्भ में, हम देखते हैं कि रोज़गार, शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी के लिए समान अवसर की कमी है. इसी तरह, हमारी न्याय प्रणाली का झुकाव अमीर और शक्तिशाली के पक्ष में दिखता है. हमारे मुख्य वक्ता ने ज़ोर देकर कहा है कि, सीएए संविधान विरोधी है और हमारे संविधान की भावना के खिलाफ है. हमारा संविधान अपने नागरिकों के बीच या नई नागरिकता प्रदान करते समय धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता है. हम सभी इस देश के समान नागरिक हैं जैसा कि संविधान द्वारा इसकी गारंटी दी गई है.”

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