Thursday, January 27, 2022
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यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में एक ब्राह्मण परिवार पलायन को मजबूर

पीड़ित परिवार ने अपने घर के बाहर ‘पलायन’ करने का इश्तिहार लगाने के संबंध में बात करते हुए इंडिया टुमारो से बताया कि वह अपराधियों के भय के कारण गोरखपुर से पलायन करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि, “अब हमारा परिवार यहां पर सुरक्षित नहीं हैं। मेरे एक बेटे की हत्या कर दी गई है। इसमें कोई कार्यवाही नहीं की गई है। अब मैं अपने बचे 2 बेटों को नहीं खोना चाहता हूं। हमें अपराधियों से ख़तरा है।”

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में अपराधियों की दहशत से परेशान होकर एक ब्राम्हण परिवार पलायन करने को मजबूर है। लेकिन पलायन रोकने और घर वापसी को लेकर बड़े बड़े दावा करने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ के मुंह पर इस मामले को लेकर ताला लग गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में एक ब्राह्मण परिवार के बेटे की अपराधियों द्वारा हत्या कर दिए जाने से पैदा हुई दहशत से परेशान होकर ब्राह्मण परिवार पलायन करने को मजबूर हो गया है। गोरखपुर शहर के बाहरी हिस्से में ग्राम रामपुर, निकट तारामंडल, थाना रामगढ़ताल के निवासी युवक अंकुर शुक्ला की 24 नवम्बर 21 को अपराधियों द्वारा पीट-पीट करहत्या कर दी गई।

पीड़ित परिवार ने अपने घर के बाहर ‘पलायन’ करने का इश्तिहार लगाने के संबंध में बात करते हुए इंडिया टुमारो से बताया कि वह अपराधियों के भय के कारण गोरखपुर से पलायन करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि, “अब हमारा परिवार यहां पर सुरक्षित नहीं हैं। मेरे एक बेटे की हत्या कर दी गई है। इसमें कोई कार्यवाही नहीं की गई है। अब मैं अपने बचे 2 बेटों को नहीं खोना चाहता हूं। हमें अपराधियों से ख़तरा है।”

इस मामले में मृतक अंकुर शुक्ला के पिता महेन्द्र नाथ शुक्ला ने इसी गांव के निवासी अवधेश साहनी, सोनू, मनीष कट्टा और जयहिंद के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई। लेकिन पुलिस की लचर प्रणाली के कारण इनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। इस मामले के मुख्य आरोपी अवधेश सहनी ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। मनीष कट्टा को पुलिस ने गिरफ्तार किया। जयहिंद और सोनू अभी भी फरार हैं। यह सभी निषाद जाति से ताल्लुक रखते हैं।

बताया जाता है कि इस घटना का मुख्य आरोपी अवधेश सहनी इसी साल 14 जून को अपने 3-4 अपराधी साथियों के साथ रात्रि में चोरी की नियत से महेन्द्र शुक्ला के घर में घुसा था, लेकिन परिवार के लोगों के जाग जाने पर अवधेश सहनी पकड़ लिया गया और उसके बाकी साथी भाग गए। महेन्द्र शुक्ला के पुत्र अंकुर शुक्ला ने 100 नम्बर डायल करके पुलिस को सूचना दिया, जिस पर रामगढ़ताल थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और वह अवधेश सहनी को पकड़ कर अपने साथ ले गई।

इसके बाद रामगढ़ताल थाने के पुलिस इंस्पेक्टर ने अवधेश सहनी के कहने पर उल्टा दबाव बना कर अंकुर शुक्ला को धमकाया और पैसा लेकर जबरन समझौता करवाया। इस घटना को लेकर अवधेश सहनी और अंकुर शुक्ला के बीच मतभेद पैदा हो गए। अवधेश सहनी अंकुर शुक्ला से दुश्मनी मान बैठा। अंकुर शुक्ला ने इस घटना को गम्भीरता के साथ नहीं लिया। इसका परिणाम यह हुआ कि अवधेश सहनी ने अपने 3 साथियों के साथ मिलकर 24 नवम्बर 2021 को दिन दहाड़े दोपहर में अंकुर शुक्ला को गांव में घेर लिया और उसको पीट-पीट कर मार डाला।

घटना की खबर जब अंकुर शुक्ला के पिता महेन्द्र शुक्ला को मिली तो वह घटनास्थल पर गए। वह अंकुर शुक्ला को अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने अंकुर को मृत घोषित कर दिया। इस घटना की सूचना महेन्द्र शुक्ला ने रामगढ़ताल पुलिस को दिया और अवधेश सहनी समेत उसके 3 साथियों को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज कराई। किंतु पुलिस की सुस्ती कहें या ऊपरी दबाव कि पुलिस ने इस मामले में अपनी भूमिका सही तरीके से नहीं निभाई, जिसके चलते मुख्य आरोपी सरेंडर कर जेल चला गया।

हालांकि, मनीष कट्टा गिरफ्तार किया गया। जयहिंद और सोनू फरार हो गए। पुलिस द्वारा कोई सख्त कार्यवाही नहीं किए जाने से महेन्द्र शुक्ला और उनका परिवार दहशत में जी रहे हैं। अपराधियों की इस दहशत से परेशान होकर महेन्द्र शुक्ला ने अपने परिवार समेत गोरखपुर से पलायन करने का फैसला लिया और अपने घर के बाहर बाकायदा एक इश्तिहार लगाकर अपने घर को बेचने की बात कही है। महेन्द्र शुक्ला ने इश्तिहार में लिखा है-अपराधियों के भय से मैं इस मकान को बेंच रहा हूं। महेन्द्र नाथ शुक्ला।

महेन्द्र नाथ शुक्ला ने अपने घर के बाहर इश्तिहार लगाकर गोरखपुर से पलायन करने की बात की है। वह कहते हैं, “अब मैं और मेरा परिवार यहां पर सुरक्षित नहीं हैं। मेरे एक बेटे की हत्या कर दी गई है। इसमें कोई कार्यवाही नहीं की गई है। अब मैं अपने बचे 2 बेटों को नहीं खोना चाहता हूं। अपराधियों की दहशत के आगे सब कुछ फेल हो गया है। पुलिस अपराधियों का कुछ नहीं बिगाड़ पा रही है। ऐसे में हम अपना मकान बेंचकर कहीं भी चले जाएंगे। चाहे कहीं झोपड़ी डाल कर रह लेंगे, लेकिन अब यहां पर नहीं रहेंगे।”

महेन्द्र नाथ शुक्ला के द्वारा परिवार सहित गोरखपुर से पलायन करने की बात कहने से यूपी सरकार की बदतर कानून व्यवस्था की पोल आसानी से खुलती है। इससे यह साफ तौर पर पता चलता है कि यूपी में कानून व्यवस्था ध्वस्त है और अपराधियों का बोलबाला है। यूपी में अच्छी कानून व्यवस्था का केवल फर्जी ढिंढोरा पीटा जाता है। जबकि असलियत इसके ठीक विपरीत है।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में पलायन रोकने और घर वापसी की बात कहते हुए नहीं अघाते हैं। अभी वह पिछले दिनों कैराना गए थे और वहां जाकर एक परिवार के कैराना वापस लौट आने को “कैराना घर वापसी” कहकर खूब प्रचारित किया था। उन्होंने सम्बंधित परिवार के यहां भोजन किया था और इसको भी खूब प्रचारित और प्रसारित किया गया था। योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कैराना से पलायन कर गए लोगों की घर वापसी हो रही है और अब कोई पलायन नहीं करेगा। कैराना में घर वापसी करने वाले लोगों की राज्य सरकार आर्थिक सहायता भी करेगी।

योगी आदित्यनाथ ने घर वापसी करने वाले परिवार के यहां एक छोटी बच्ची के साथ बैठकर बात करते हुए कहा था कि अब कोई पलायन नहीं करेगा, क्योंकि मैं (योगी) हूं। इस तरह की बात करके योगी आदित्यनाथ ने पलायन न करने का संदेश दिया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना में उन्होंने इस प्रकार की बात करके हिंदू धुर्वीकरण का दांव खेला था। क्योंकि आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और मुस्लिम समुदाय के एक साथ खड़े होने से और इनके साथ गूजर वोटरों के साथ आने से भाजपा की दाल नहीं गल रही है। इस लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिंदू वोटों के धुर्वीकरण करने के लिए योगी आदित्यनाथ और भाजपा घर वापसी की बात कर रही है।

लेकिन योगी आदित्यनाथ को अपने गृह जिले गोरखपुर में कोई पलायन होता नहीं दिखाई देता है। बताया जाता है कि गोरखपुर में महेन्द्र नाथ शुक्ला के बेटे अंकुर शुक्ला की हत्या किए जाने की खबर योगी आदित्यनाथ को है। लेकिन वह इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। योगी आदित्यनाथ के मुंह पर ताला लग गया है और वह एक शब्द नहीं बोल पा रहे हैं।

गोरखपुर में यह भी चर्चा है कि योगी आदित्यनाथ चूंकि ब्राह्मण विरोधी हैं और उनका चेहरा ब्राह्मण विरोधी है, इसलिए वह इस मामले पर कोई कार्यवाही करने के लिए पुलिस प्रशासन से नहीं कह रहे हैं। इसके साथ ही वह राजनीतिक नफा-नुकसान का आंकलन करने में भी जुटे हुए हैं।

इस घटना में चारों आरोपी निषाद जाति के हैं। निषाद पार्टी से भाजपा ने चुनावी गठबंधन कर रखा है। भाजपा निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद को नाराज़ नहीं करना चाहती है। संजय निषाद के एक बेटे प्रवीण निषाद संतकबीरनगर से भाजपा के लोकसभा सदस्य हैं। दूसरे बेटे इंजीनियर श्रवण निषाद हैं। श्रवण निषाद, निषाद पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष हैं। यह हत्या आरोपियों को बचा रहे हैं। हत्या आरोपी अवधेश सहनी को इनका खुला संरक्षण प्राप्त है। यह अवधेश सहनी के घर बराबर आ-जा रहे हैं और अवधेश सहनी के परिवार के साथ खड़े हुए हैं।

पुलिस इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। निषाद वोटों के खातिर भाजपा और योगी आदित्यनाथ को अब पूर्वांचल के गोरखपुर में पलायन नहीं नज़र आ रहा है। इस घटना से योगी आदित्यनाथ का चेहरा बेनकाब हो गया है और यूपी सरकार की राज्य में ध्वस्त कानून व्यवस्था की कलई खुल गई है।

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