Sunday, December 5, 2021
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लखीमपुर खीरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से आरोपियों की गिरफ्तारी पर मांगा जवाब

इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी मामले को लेकर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट में आज चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की और यूपी सरकार से आरोपियों की गिरफ़्तारी पर जवाब तलब किया है. कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है कि किन लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज है और उन्हें अभी तक गिरफ़्तार किया गया है या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार से लखीमपुर खीरी घटना के संबंध में दर्ज की गई पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) और गिरफ्तारी पर स्थिति रिपोर्ट मांगी, जिसमें केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा के चार पहिया वाहन द्वारा किसानों सहित आठ लोगों को कुचल दिया गया था.

मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया और उत्तर प्रदेश राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) गरिमा प्रसाद को प्राथमिकी की स्थिति के साथ-साथ घटना के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित याचिकाओं के विवरण के बारे में निर्देश प्राप्त करने का निर्देश दिया है.

बार एंड बेंच के अनुसार, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा, “यहां किसान और अन्य लोगों की भी हत्या हुई है। हमें यह जानने की जरूरत है कि कौन आरोपी हैं जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और किसे गिरफ्तार किया गया है। कृपया इस पर एक स्थिति रिपोर्ट दर्ज करें.”

मामले की शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी।

जस्टिस कांत ने कहा कि किसानों और अन्य लोगों की भी हत्या हुई है. हमे यह जानना चाहते हैं कि कौन लोग आरोपी हैं जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और किसे गिरफ्तार किया गया है. इसपर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें.

चीफ जस्टिस ने कहा, “ऐसी शिकायतें हैं कि आप इस मामले को ठीक से नहीं देख रहे हैं और एफआईआर भी ठीक से दर्ज नहीं है। आयोग का ब्यौरा क्या है?”

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि एसआईटी और न्यायिक आयोग का गठन किया जा चुका है और एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है.

CJI ने कहा-‘ आप इस मामले में स्टेट्स रिपोर्ट फाइल करें। इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्या हुआ ये भी बताएं। कल इस मामले की सुनवाई होगी।’ सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से ये जवाब मांगा कि किन लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज है और उन्हें अभी तक गिरफ़्तार किया गया है या नहीं?

यूपी सरकार की तरफ से कहा गया है कि, “एसआईटी और न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है। प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है.”

CJI ने पूछा, “शिकायत यह है कि आप इसे ठीक से नहीं देख रहे हैं और प्राथमिकी ठीक से दर्ज नहीं की गई है. न्यायिक आयोग का विवरण क्या है।” अदालत ने तब इस मुद्दे पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित जनहित याचिका याचिकाओं का विवरण मांगा.

CJI ने वर्चुअल हियरिंग प्लेटफॉर्म पर अधिवक्ता अमृतपाल सिंह खालसा से प्राप्त संदेश को भी पढ़ा. जिसमें कहा गया है कि मृतक लवप्रीत सिंह की मां की हालत गंभीर है.

अदालत ने निर्देश दिया, “उन्हें तुरंत नज़दीकी चिकित्सा सुविधा में भर्ती कराएं और उसे सभी सुविधाएं दें।”

बार एंड बेंच के अनुसार, उत्तर प्रदेश के दो वकीलों ने CJI एनवी रमना को पत्र लिखकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को उठाया था.

अपने पत्र में, अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी और सीएस पांडा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के साथ-साथ घटना में शामिल दोषी पक्षों को सजा सुनिश्चित करने का निर्देश देने की भी मांग की.

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