Thursday, January 27, 2022
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अवैध धर्मांतरण के आरोप में यूपी एटीएस ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया

आज तीन लोगों को गिरफ्तारी के बाद धर्मांतरण मामले में अब तक 14 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. बीते 22 सितंबर को अवैध धर्मांतरण मामले में यूपी एटीएस ने मौलाना कलीम सिद्दीकी को मेरठ से गिरफ्तार किया था. एटीएस ने इसी साल 21 जून को उमर गौतम और जहांगीर आलम को अवैध धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार किया था.

मसीहुज़्ज़मा अंसारी | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | अवैध धर्मांतरण के आरोप में उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने रविवार को तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार होने वालों में मोहम्मद सलीम, हाफिज़ इदरीस और कुणाल चौधरी उर्फ आतिफ चौधरी शामिल हैं.

गिरफ्तार अभियुक्तों में मोहम्मद सलीम व मोहम्मद इदरीस कुरैशी यूपी के मुज़फ्फरनगर के रहने वाले हैं, जबकि अशोक कुणाल चौधरी उर्फ़ आतिफ महराष्ट्र के नासिक का निवासी है.

आरोप है कि इनके खातों में अब तक 20 करोड़ रुपये जमा होना प्रमाणित हुआ है जिसके व्यय की जानकारी नहीं मिल सकी है. एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार के अनुसार तीनों का नाम मौलाना कलीम सिद्दीकी से पूछताछ में सामने आया है.

यूपी एटीएस ने मोहम्मद सलीम, हाफिज इदरीस और आतिफ चौधरी को मौलाना कलीम सिद्दीकी का साथी बताया है.

एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि, “कलीम जहां भी धर्मांतरण के कार्यों के लिए जाता है, वहां उसके सहयोग के लिए हाफिज इदरीस, मोहम्मद सलीम और कुणाल चौधरी उर्फ आतिफ साथ-साथ रहते हैं.”

हालांकि, अचानक हो रही इस प्रकार की गिरफ्तारियों को बुद्द्जीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चुनाव से पूर्व ध्रुवीकरण का प्रयास बताया था.

ज्ञात हो कि मशहूर इस्लामिक विद्वान मौलाना कलीम सिद्दीकी को बुधवार को यूपीएटीएस द्वारा अवैध धर्मांतरण के आरोप में मेरठ से गिरफ्तार किया गया जिसे लेकर देशभर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धजीवियों और समाजसेवियों ने नाराज़गी ज़ाहिर की.

आरोप है कि विदेश से करोड़ों रुपये मौलाना कलीम सिद्दीकी के खाते में आए थे. मौलाना कलीम को लखनऊ ATS स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया जिसके बाद उन्हें 5 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया.

एटीएस की प्रेस रिलीज़ में यह दावा किया गया है कि, मौलाना लालच देकर लोगों को धर्मांतरण के लिए उकसाते थे. वह अपना ट्रस्ट चलाने के साथ तमाम मदरसों को भी फंडिंग करते थे.

हालांकि कई सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धजीवियों ने इस गिरफ्तारी का विरोध किया है और इसे चुनाव से पूर्व पोलराइज़ेशन का प्रयास बताया है.

आज तीन लोगों को गिरफ्तारी के बाद धर्मांतरण मामले में 14 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. बीते 22 सितंबर को अवैध धर्मांतरण मामले में यूपी एटीएस ने मौलाना कलीम सिद्दीकी को मेरठ से गिरफ्तार किया था. एटीएस ने इसी साल 21 जून को उमर गौतम और जहांगीर आलम को अवैध धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार किया था.

इससे पूर्व धर्मांतरण मामले में गिरफ़्तारी पर देशभर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्द्जीवियों ने इन गिरफ़्तारी पर चिंता जताई थी.

आम आदमी पार्टी के नेता, दिल्ली के ओखला से विधायक और दिल्ली वक्फ़ वोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खान ने ट्विट कर कहा था कि, “उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले अब मशहूर इस्लामिक स्कॉलर मौलाना कलीम सिद्दीकी साहब को गिरफ्तार किया गया है, मुसलमानों पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है। इन मुद्दों पर सेक्यूलर पार्टियों की खामोशी भाजपा को और मज़बूती दे रही है. यूपी चुनाव जीतने के लिए बीजेपी आखिर और कितना गिरेगी?”

इंडिया टुमारो से बात करते हुए दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन डॉ ज़फरुल इस्लाम ख़ान ने कहा था कि, “उमर गौतम हों या मौलाना कलीम सिद्दिक़ी हों यह सभी लोग संविधान पर यक़ीन रखने वाले लोग हैं और संविधान हमें किसी भी धर्म को मानने की, उसे प्रचार करने की और किसी भी धर्म को न मानने की आज़ादी देता है. संविधान पर इसी यक़ीन की बुनियाद पर अपने धर्म का प्रचार कर रहे हैं. जिस तरह ईसाई अपने धर्म का प्रचार कर रहे हैं, जैसे बौद्ध कर रहे हैं जैसे सिख कर रहे हैं या हिन्दू ख़ुद अपने धर्म का प्रचार कर रहे हैं लेकिन जब बात मुसलमानों की आती है तो इसे राजनीतिक रंग दे दिया जाता है.”

मौलाना कलीम सिद्दीकी की गिरफ़्तारी पर रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा था कि, “उत्तर प्रदेश में भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर वोटों का ध्रुवीकरण करने के उद्देश्य से मुसलमानों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है. इस अभियान को चलाने की जिम्मेदारी एटीएस को सौंप दी है जो कभी आतंकवाद तो कभी धर्मान्तरण के नाम पर फर्जी गिरफ्तारियां कर रही है.”

मुहम्मद शुऐब ने कहा था कि, “मौलाना कलीम सिद्दीकी एक प्रतिष्ठित इस्लामिक स्कालर हैं. उनके धार्मिक क्रियाकलापों को जिस तरह से आपराधिक बनाकर पेश किया जा रहा है, यह एक साजिश है और संवैधानिक अधिकारों पर हमला है. धर्मान्तरण के नाम पर जो अभियान आरएसएस और बजरंगदल चलाते थे वो काम यूपी एटीएस कर रही है. संविधान को ताक पर रखकर जो नए कानून योगी सरकार ला रही है वो न सिर्फ नागरिक अधिकारों का हनन कर रहे है बल्कि सामाजिक ढांचा छिन्न-भिन्न कर रहे है.”

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