Thursday, January 27, 2022
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मुस्लिम संगठनों के डेलिगेशन ने किया असम का दौरा, विस्थापितों के पुनर्वास और न्याय की मांग की

इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | असम के दरांग ज़िले में ‘अतिक्रमण’ हटाने की प्रक्रिया में पुलिस फायरिंग में हुई तीन मुसलमानों की मौत को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिन्द, जमाअत इस्लामी हिन्द (@JIHMarkaz) और स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन @sioindia के प्रतिनिधि मंडल ने दारंग ज़िले का दौरा किया और प्रशासन से मुलाक़ात की.

विभिन्न संगठनों के इस प्रतिनिधिमंडल ने असम के दरांग जिले का दौरा कर मुसलमानों की बेदखली और पुलिस की बर्बरता के मुद्दे को लेकर एसपी सुशांत बिस्वा शर्मा और उपायुक्त प्रभाती थाओसेन से भेंट की.

इस प्रतिनिधिमंडल में जमाअत इस्लामी हिंद, जमीयत उलेमा ए हिंद और स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ इन संगठनों के राज्य स्तरीय नेता भी शामिल थे. यह डेलिगेशन असम में कथित रूप से जबरन मुसलमानों की बेदखली और पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत के बाद ग्राउंड जीरो पर स्थिति का आकलन करने के लिए असम पहुंचा था. इस संयुक्त प्रतिनिधिमंडल में एआईयूडीएफ के विधायक भी शामिल थे.

प्रतिनिधि मंडल ने दारंग ज़िले के एसपी और डेप्युटी कमिश्नर से मुलाक़ात कर उन्हें ज्ञापन भी सौंपा जिसमें पीड़ितों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त मुआवज़े और पुनर्वास की मांग की गई.

दिल्ली से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से कहा कि, “निहत्थे नागरिकों के खिलाफ बल का अनुचित प्रयोग किया गया जो कि ग़लत और अमानवीय था.”

प्रतिनिधि मंडल ने मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवज़ा देने, घायलों को उचित चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने और विस्थापित परिवारों को जल्द से जल्द ज़मीन आवंटित करने की मांग की.

दरांग के डीएम ने प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया कि, “उचित जांच होने और व्यक्ति के निर्दोष पाए जाने के बाद ही मुआवज़ा दिया जा सकता है. जहां तक ​​मरीज़ों का सवाल है, हम उनका इलाज सरकारी अस्पताल में कर रहे हैं. भूमि आवंटन उचित प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जाएगा जिसमें समय लगेगा. उन्हें अस्थायी ज़मीन दी गई है. उन्हें अभी तक पानी की सुविधा, शौचालय और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है.”

ज्ञात हो कि गुरुवार को असम के दरांग जिले में अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में प्रदर्शन कर रहे तीन लोगों की मौत हो गई. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिनमें पुलिस को प्रदर्शन कर रहे नागरिक पर गोली चलाते हुए देखा जा सकता है.

विरोध-प्रदर्शन कर रहे परिवारों की यह मांग थी कि उनको ज़मीन से बेदखल करने के अभियान को रोका जाए और उन्हें पुनर्वास पैकेज दिया जाए. बेदखल किये जाने वाले अधिकतर मुस्लिम समुदाय के हैं.

आरोप है कि पुलिस ने अतिक्रमण हटाने के अभियान में लोगों को लाठी-डंडों से भी मारा. इस घटना में दो लोगों की मौत के अलावा कई लोगों के घायल होने की भी सूचना है.

असम सरकार के इन असंवैधानिक और अमानवीय बर्ताव पर देशभर में प्रदर्शन हो रहा है और सोशल मीडिया पर सरकार की कड़ी आलोचना की जा रही है.

डेलिगेशन में मौलाना हकीमुद्दीन कासमी महासचिव- जमीयत उलमा-ए-हिंद, एस अमीनुल हसन, उपाध्यक्ष -जमाअत इस्लामी हिंद, मोहम्मद शफी मदनी, सचिव- जमाअत इस्लामी हिंद, सलमान अहमद, अध्यक्ष -SIO ऑफ़ इंडिया, अब्दुस सलाम, जीएस – जमीयत उलमा बंगाल, हाफिज़ बशीर अहमद कासमी, जी.एस. – जमीयत उलमा असम, अब्दुल कादिर कासमी जी. एस. -ASJU, महबूब हसन जीएस एएसजेयू, डॉ. हाफिज़ रफीकुल इस्लाम कासमी- विधायक, सचिव ASJU, अमीनुल इस्लाम- विधायक, मुजीबुर्रहमान- विधायक, मोमिनुर रहमान बोरा- ASJU, मौलाना हाशिम और दरांग जमीयत उलमा के सदस्य शामिल थे.

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