Thursday, January 27, 2022
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मौलाना कलीम सिद्दीकी की गिरफ़्तारी और असम में पुलिस बर्बरता को लेकर AMU छात्रों का प्रदर्शन

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने युनिवर्सिटी प्रशासन को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें कहा गया कि मुस्लिम विद्वान की अवैध धर्मांतरण के आरोप में गिरफ़्तारी और असम में मुसलमानों को बेदखल करने और प्रताड़ित करने की घटना मुसलमानों में भय का वातावरण पैदा कर रही हैं.

इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्रों ने शुक्रवार को युनिवर्सिटी में असम में प्रदर्शनकारियों की पुलिस फायरिंग में मौत और यूपी एटीएस द्वारा इस्लामिक विद्वान मौलाना कलीम सिद्दीकी की अवैध धर्मांतरण के आरोप में गिरफ़्तारी के विरोध में प्रदर्शन किया.

यह प्रदर्शन जुमा नमाज़ के बाद जामा मस्जिद से शुरू हुआ. मस्जिद से बाब-ए-सैयद तक विरोध मार्च निकाला गया और फिर एक सभा के बाद इसका समापन हुआ. छात्रों ने सरकार के अमानवीय और असंवैधानिक रवैय्ये को लेकर विरोध जताया.

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने युनिवर्सिटी प्रशासन को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें कहा गया कि मुस्लिम विद्वान की अवैध धर्मांतरण के आरोप में गिरफ़्तारी और असम में मुसलमानों को बेदखल करने और प्रताड़ित करने की घटना मुसलमानों में भय का वातावरण पैदा कर रही हैं.

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि, “अल्पसंख्यकों को इस प्रकार निशाना बनाना देश में शांति और स्थिरता के लिए ख़तरा पैदा करेगा.”

प्रदर्शन कर रहे छात्रों में मतीन अशरफ, ज़ैद शेरवानी, अब्दुल वदूद, आरिफ त्यागी, अम्मार खान, ज़कीउर्रहमान और मोहम्मद इमरान के अलावा अन्य छात्र शामिल रहे.

ज्ञात हो कि मशहूर इस्लामिक विद्वान मौलाना कलीम सिद्दीकी को बुधवार को यूपीएटीएस द्वारा अवैध धर्मांतरण के आरोप में मेरठ से गिरफ्तार किया गया जिसे लेकर देशभर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धजीवियों और समाजसेवियों ने नाराज़गी ज़ाहिर की.

आरोप है कि विदेश से करोड़ों रुपये मौलाना कलीम सिद्दीकी के खाते में आए थे. मौलाना कलीम को लखनऊ ATS स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया जिसके बाद उन्हें 5 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया.

एटीएस की प्रेस रिलीज़ में यह दावा किया गया है कि, मौलाना लालच देकर लोगों को धर्मांतरण के लिए उकसाते थे. वह अपना ट्रस्ट चलाने के साथ तमाम मदरसों को भी फंडिंग करते थे.

हालांकि कई सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धजीवियों ने इस गिरफ्तारी का विरोध किया है और इसे चुनाव से पूर्व पोलराइज़ेशन का प्रयास बताया है.

एटीएस द्वारा जारी प्रेस रिलीज़ में जिन लिट्रेचर और वीडियो के लिंक साझा करते हुए उन्हें धर्मांतरण के लिए उकसाने वाला बताया गया है उनमें एकेश्वरवाद पर चर्चा की गई है और ईश्वर को सर्वशक्तिमान बताया गया है.

इसी क्रम में गुरुवार को असम के दरांग जिले में अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में प्रदर्शन कर रहे दो लोगों की मौत हो गई. दोनों मृतकों की पहचान सद्दाम हुसैन और शेख फरीद के रूप में हुई है. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिनमें पुलिस को प्रदर्शन कर रहे नागरिक पर गोली चलाते हुए देखा जा सकता है.

विरोध-प्रदर्शन कर रहे परिवारों की यह मांग थी कि उनको ज़मीन से बेदखल करने के अभियान को रोका जाए और उन्हें पुनर्वास पैकेज दिया जाए. बेदखल किये जाने वाले अधिकतर मुस्लिम समुदाय के हैं.

आरोप है कि पुलिस ने अतिक्रमण हटाने के अभियान में लोगों को लाठी-डंडों से भी मारा. इस घटना में दो लोगों की मौत के अलावा कई लोगों के घायल होने की भी सूचना है.

उत्तर प्रदेश और असम सरकार के इन असंवैधानिक और अमानवीय बर्ताव पर देशभर में प्रदर्शन हो रहा है और सोशल मीडिया पर दोनों राज्यों के सरकार की कड़ी आलोचना की जा रही है.

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