Friday, September 24, 2021
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गुजरात: BJP में चल रही राजनीतिक जंग में हारे मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, देना पड़ा इस्तीफा


अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | आखिरकार गुजरात में चल रही राजनीतिक जंग सीएम विजय रुपाणी हार गए हैं। उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। गुजरात में सत्ता की लड़ाई काफी समय से चल रही थी। सीएम विजय रुपाणी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच तालमेल नहीं बैठा। अमित शाह और विजय रुपाणी दोनों पीएम नरेंद्र मोदी के खासमखास आदमी हैं।काफी समय से सत्ता में अपनी दमदारी को लेकर यानी वर्चस्व को लेकर शाह और रुपाणी के बीच टकराव चल रहा था।

चर्चा है कि सीएम विजय रुपाणी अमित शाह की हां में हां नहीं मिलाते थे। वह अमित शाह की जी -हुजूरी भी नहीं करते थे। इसका कारण यह है कि रुपाणी भी पीएम नरेंद्र मोदी के आदमी हैं और अमित शाह भी। जबकि अमित शाह चाहते थे कि विजय रुपाणी उनके अधीन रहें। लेकिन रुपाणी इसके लिए तैयार नहीं थे। इसी अहम को लेकर दोनों के बीच काफी समय से टकराव चल रहा था।

अमित शाह विजय रुपाणी का मतभेत था। अमित शाह विजय रुपाणी को सीएम के पद से हटाने की योजना बनाने लगे। शाह ने अपने लोगों के जरिए भाजपा अलाकमान को और मोदी को यह खबरें पहुंचाने का काम शुरू करवाया कि विजय रुपाणी के गुजरात में सीएम रहते भाजपा अगला विधानसभा चुनाव हार जाएगी। इस प्रकार के समाचारों की भनक जब रुपाणी को लगी तो वह सतर्क हो गए और उन्होंने अमित शाह के विरुद्ध खुलकर मोर्चा खोल दिया।

इसके बाद दोनों के बीच राजनीतिक वर्चस्व की जंग शुरू हो गई। इस जंग में दोनों एक-दूसरे के खिलाफ गोलबंदी करने लगे। इनके बीच चलने वाली जंग की खबर भाजपा और मोदी को लगी तो उन्होंने इन्हें समझाने का काम किया। लेकिन इसके बावजूद इनमें हल नहीं निकला। आज इसका परिणाम यह हुआ कि विजय रुपाणी को सीएम के पद से इस्तीफा देना पड़ा।

विजय रुपाणी को जब इस्तीफा देने के लिए कहा गया तो उन्होंने बगावती तेवर अपनाए। रुपाणी के तेवर देखकर भाजपा अलाकमान डर गया। विजय रुपाणी को मनाने और समझाने के लिए नई दिल्ली से भाजपा के महासचिव संगठन बी एल सन्तोष और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को गांधी नगर भेजा गया। गांधी नगर पँहुच कर इन्होंने विजय रुपाणी को बहुत मनाया, तब वह माने और इस्तीफा देने के लिए राजी हुए।

विजय रुपाणी के बगावती तेवर से भाजपा के नेता इस कदर डरे हुए थे कि विजय रुपाणी के इस्तीफे की घोषणा के वक्त उनके साथ खड़े रहे। उन्हें डर था कि कहीं विजय रुपाणी कुछ और न घोषणा कर दें। गुजरात के सीएम पद से इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा है कि, “भाजपा में यह परम्परा रही है कि नए लोगों को भी मौका मिलना चाहिए। मैं इसी परम्परा को निभाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं, जिससे नए आदमी को काम करने का मौका मिले। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात के विकास के लिए नए ऊर्जावान व्यक्ति की अगुवाई में राज्य का विकास होना चाहिए।”

इसीके साथ विजय रुपाणी ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। बाद में गवर्नर आचार्य देवव्रत को जाकर इस्तीफा दे दिया। विजय रुपाणी का इस्तीफा देने से पूर्व भाजपा से उनको समायोजित करने की बात हो गई है। क्योंकि उन्होंने इस्तीफा देते हुए भाजपा और नरेंद्र मोदी की बड़ी तारीफ की। उन्होंने कहा कि,”मैं पार्टी को धन्यवाद देता हूं कि उसने मुझे काम करने का बड़ा मौका दिया है। आगे भी जो जिम्मेदारी सौंपी जाएगी उसको मैं पूरा करूंगा।”

अमित शाह की ओर से भाजपा आलाकमान को यह समझाने का काम किया गया था कि विजय रुपाणी के कामकाज से जनता नाराज़ है और अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा राज्य में चुनाव हार जाएगी। इसी का तानाबाना बुन कर शाह ने रुपाणी को हटवा दिया है। लेकिन गुजरात में जो भी सीएम बनेगा, उसके सिर पर कांटो भरा ताज होगा।

गुजरात में विधानसभा चुनाव होने में एक साल बाकी है। गुजरात की जनता राज्य की भाजपा सरकार से बेहद नाराज़ है। कोरोना कॉल में यूपी के बाद सबसे ज्यादा गुजरात में कोरोना से मौतें हुई हैं और लोग काफी परेशान हुए हैं और आज भी परेशान हैं। गुजरात में अभी से जनता का मूड बदलाव का है। भाजपा इससे डरी हुई है। मुख्यमंत्री बदलने से उसे दोबारा सत्ता नहीं मिलेगी। गुजरात भाजपा की अंदरूनी कलह से भाजपा की सत्ता का हटना तय माना जा रहा है।

गुजरात कांग्रेस के नेता हार्दिक पटेल ने भाजपा पर मुख्यमंत्री बदलने पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि, “मुख्यमंत्री बदलकर भाजपा जनता का ध्यान भटकाने का काम कर रही है। भाजपा को लगता है कि मुख्यमंत्री बदलने से राज्य में भाजपा की सरकार बन जाएगी, तो वह गलतफहमी में जी रही है। राज्य में जनता परेशान है, भाजपा मुख्यमंत्री बदलने में जुटी हुई है। लेकिन भाजपा को इसका लाभ नहीं मिलेगा। जनता सब कुछ समझती है। भाजपा अपनी अंदरूनी लड़ाई को नहीं निबटा पा रही है, तो वह राज्य का विकास कहां से कर पाएगी?”

इसी बीच यह पता चला है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज गांधी नगर जाने वाले हैं। वह राज्य में अपने किसी करीबी को मुख्यमंत्री बनवाने की कोशिश में हैं। इससे टकराव हो सकता है। भाजपा का अंदरुनी संकट अभी भी टला नहीं है।

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