Sunday, October 17, 2021
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यूपी सरकार का देवबन्द में ATS कमांडो सेंटर बनाने का फैसला, विपक्ष ने इसे ‘ध्रुवीकरण’ बताया

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने योगी आदित्यनाथ की सरकार को आड़े हाथों लेते हुए राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि, "कमांडो सेंटर बनाने की योगी सरकार की नीयत पर हमें शक है। देवबन्द एक मुस्लिम रिसर्च कल्चर का बड़ा सेंटर है। विधानसभा चुनाव के समय एटीएस सेंटर बनाना राज्य सरकार की नीयत पर शक पैदा करता है। राज्य सरकार का मकसद साफ नहीं है। योगी आदित्यनाथ की सरकार राज्य में नए विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है। यह ठीक नहीं है।"

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ | यूपी के देवबन्द शहर में एटीएस सेंटर बनाने को लेकर योगी आदित्यनाथ की सरकार सवालों के घेरे में है। एटीएस सेंटर बनाने के लिए स्थान को लेकर राज्य सरकार पर उंगलियां उठने लगी हैं। एटीएस सेंटर बनाने की आड़ में योगी सरकार मुस्लिम समुदाय को डराने और उनके ऊपर दबाव बनाने का काम कर रही है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एटीएस सेंटर बनाने की बात कही है। एटीएस सेंटर बनाने के लिए राज्य सरकार ने देवबन्द समेत 12 स्थानों का चयन किया है। एटीएस सेंटर बनाने के पीछे राज्य सरकार का तर्क है कि वह इस तरह के सेंटर इसलिए राज्य में बनाना चाहती है, जिससे राज्य में आतंकी घटनाओं को रोका जा सके। आतंकी घटना होने की स्थिति में तुरंत घटना स्थल पर पहुंचा जा सके और आतंकियों को पकड़ा जा सके।

एटीएस सेंटर की स्थापना के करने के पीछे राज्य सरकार के मकसद को स्पष्ट करते हुए उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी कहते हैं कि, “उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को और दुरुस्त करने के साथ ही आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश भर में सुरक्षा बलों के सेंटर खोले जा रहे हैं। इसी के तहत एटीएस की 12 नई इकाईयों की स्थापना प्रस्तावित है। सर्वाधिक संवेदनशील माने जाने वाले जिलों में एटीएस के सेंटर बनाकर कमांडो तैनात करने की योजना है, जिससे आतंकी घटना होने पर तत्काल उससे निपटा जा सके।”

अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि, “अवध क्षेत्र में श्रावस्ती एवं बहराइच और मेरठ, अलीगढ़, ग्रेटर नोएडा (जेवर एयरपोर्ट), आजमगढ़ (निकट एयरपोर्ट), कानपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र तथा सहारनपुर जिले के देवबन्द में एटीएस कमांडो ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलों में भूमि आवंटित कर दी गई है। जल्द ही सेंटर के भवनों के निर्माण की कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।”

उन्होंने कहा कि, “इसके अलावा वाराणसी और झांसी में एटीएस इकाई की स्थापना के लिए जल्द ही भूमि आवंटित की जाएगी। एटीएस को और अधिक मजबूत बनाने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर बहराइच और श्रावस्ती में स्थापित एटीएस की नई फील्ड यूनिट काम कर रही है।”

यूपी में विधानसभा चुनाव होने में अब ज्यादा वक्त नहीं है। ऐसे समय में एटीएस की स्थापना करने की बात करना, योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा एक नया चुनावी दांव खेला गया है। आतंकी घटनाओं को रोंकने का काम करना और आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना, यह राज्य सरकार का बहुत ही अच्छा कार्य है। आतंकवाद और आतंकियों का समर्थन कोई देशभक्त व्यक्ति नहीं करता है। मैं भी आतंकवाद और आतंकियों का समर्थन नहीं करता हूं। आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। लेकिन चुनाव नजदीक आते ही एटीएस सेंटर की स्थापना की बात करना राज्य सरकार का तर्क समझ से परे है।

अगर एटीएस सेंटर की स्थापना पहले की जाती, तो शायद राज्य सरकार के फैसले पर उंगलियां न उठतीं। राज्य सरकार ने चुनाव नजदीक आते ही एटीएस सेंटर बनाए जाने की बात करके स्वंय सवालों में घिर गई है।

यूपी में एटीएस सेंटर बनाए जाने की बात करके योगी आदित्यनाथ की सरकार सवालों में घिर गई है। चुनाव से ठीक पहले एटीएस सेंटर बनाने की बात करकेऔर खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में इस तरह के सेंटर बनाकर राज्य सरकार मुसलमानों को डराना चाहती है। इस तरह सेंटर बनाए जाने वाले स्थानों का चुनाव करके राज्य सरकार अपनी साम्प्रदायिक सोंच का परिचय देने का काम कर रही है।

मुस्लिम बहुल इलाकों में एटीएस सेंटर बनाने से राज्य सरकार की नज़र में हर मुसलमान सन्देहास्पद है। जबकि ऐसा नहीं है, मुसलमान देश भक्त होते हैं और देश के लिए जीते-मरते हैं। देश विरोधी कार्य करने वाले व्यक्तियों को जाति और धर्म की सीमा रेखा में नहीं बांधा जा सकता है। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और आतंकवाद के रास्ते पर चलने वाले लोगों का धर्म और कर्म सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद होता है।

यूपी सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव के ठीक पहले एटीएस सेंटर बनाने और मुस्लिम बहुल इलाकों में बनाने की बात करने से राजनीतिक बू आती है। इससे राज्य सरकार की नीयत में खोट नजर आता है। राज्य सरकार ऐसा करके मुस्लिम समुदाय के लोगों को डराना चाहती है और उन पर दबाव बनाना चाहती है। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले योगी आदित्यनाथ की सरकार एटीएस सेंटर बनाने की बात करके सवालों में घिर गई है।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने योगी आदित्यनाथ की सरकार को आड़े हाथों लेते हुए राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि, “कमांडो सेंटर बनाने की योगी सरकार की नीयत पर हमें शक है। देवबन्द एक मुस्लिम रिसर्च कल्चर का बड़ा सेंटर है। विधानसभा चुनाव के समय एटीएस सेंटर बनाना राज्य सरकार की नीयत पर शक पैदा करता है। राज्य सरकार का मकसद साफ नहीं है। योगी आदित्यनाथ की सरकार राज्य में नए विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है। यह ठीक नहीं है।”

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा एटीएस सेंटर बनाने के लिए स्थानों के चयन को लेकर भी राज्य सरकार पर उंगलियां उठ रही हैं। एटीएस सेंटर के लिए स्थान चुनने पर राज्य सरकार की भूमिका और उसकी नीयत पर भी उंगली उठाई जा रही हैं और योगी आदित्यनाथ को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।

योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा एटीएस सेंटर बनाने में स्थान को चयन करने को लेकर यूपी पुलिस के पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने भी योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है और राज्य सरकार को अनावश्यक विवाद उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि,” एटीएस सेंटर बनाना ठीक है। लेकिन सेंटर बनाने के लिए जानबूझकर ऐसे स्थानों का चयन करना ठीक नहीं है, जिससे विवाद पैदा हो। योगी सरकार का मकसद जनता के लिए काम करने का नहीं है, बल्कि भावनाओं को भड़का कर विवाद पैदा करना है। इसलिए योगी आदित्यनाथ का यह फैसला ठीक नहीं है।”

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार मुस्लिम बहुल इलाकों में एटीएस सेंटर बनाकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को डराना चाहती है और उनके ऊपर मानसिक दबाव बनाने का काम करना चाहती है। वह ऐसा करके विधानसभा चुनाव के वक्त वोटों का धुर्वीकरण करना चाहती है। योगी आदित्यनाथ की सरकार का मानना है कि इससे मुस्लिम समुदाय जहां एक ओर दबाव में रहेगा, वहीं दूसरी ओर हिंदू समाज के वोटर खुश होंगे। हिंदू वोटरों को आसानी से बरगला कर हिंदू-मुस्लिम का दांव पेंच चल करके वोटों का धुर्वीकरण किया जा सकेगा और आसानी से धुर्वीकरण करके विधानसभा चुनाव जीता जा सकेगा।

इसीलिए योगी आदित्यनाथ की सरकार ने चुनावी मौसम को देख कर यह एटीएस सेंटर बनाने का दांव खेला है, जिससे भाजपा की विधानसभा चुनाव में भारी जीत हो जाए और उसकी राज्य में सरकार बन जाए। समाजवादी पार्टी योगी आदित्यनाथ के इस दांव- पेंच को समझती है। वह योगी आदित्यनाथ के इस दांव -पेंच की काट करने में जुट गई है और मुस्लिम समुदाय के लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है और उनसे कह रही है कि राज्य सरकार से घबराने एवं डरने की ज़रूरत नहीं है।

सहारनपुर जिले के सपा के पूर्व जिला महासचिव और सपा के वरिष्ठ नेता देवबन्द के रहने वाले सिकन्दर अली का इस संबंध में कहना है कि, “देवबन्द में एटीएस सेंटर की स्थापना करने का योगी आदित्यनाथ की सरकार का काम मुस्लिम समुदाय के लोगों को डराना है। योगी आदित्यनाथ द्वारा इस्लामिक शिक्षा के प्रमुख केंद्र समझे जाने वाले देवबन्द शहर में एटीएस कमांडो सेंटर को बनाना एक राजनीतिक प्रोपोगंडा है। इसका मकसद देवबन्द के लोगों सहित मुसलमानों को डराने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि देवबन्द दारुल उलूम सहित अनेकों इस्लामिक मदरसों से धार्मिक शिक्षा दी जाती है और विश्व भर के लोग यहां धार्मिक शिक्षा लेने आते हैं। योगी सरकार के इस फैसले से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सरकार मुसलमानों में डर व भय पैदा करना चाह रही है।”

उन्होंने अपनी बात को आगे रखते हुए कहा है कि, “देवबन्द में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान हैं, जहां धार्मिक और सामाजिक शिक्षा दी जाती है और जहां से पूरे विश्व में अमन व भाईचारे का संदेश जाता है। लेकिन योगी सरकार चुनाव से पहले इस तरह के कदम उठा रही है। जबकि पहले से राज्य मुख्यालय लखनऊ में एटीएस हेडक्वार्टर है।”

उन्होंने कहा कि, “मैं आम जनता से यह अपील करता हूं कि आम जनता को इससे डरने की ज़रूरत नहीं है। देवबन्द का मुसलमान बेहद अमन पसंद है। यहां सरकार को शायद उंगली रखने की जगह भी नहीं मिलेगी। सरकार एटीएस छोड़ चाहे कितने भी मुख्यालय बना ले।”

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