Sunday, December 5, 2021
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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर धर्मगुरुओं का देश की जनता के नाम संदेश

इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | धार्मिक जनमोर्चा के तत्वावधान में शनिवार को एक ऑनलाइन चर्चा आयोजित की गई जिस में विभिन्न धर्मगुरुओं ने स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ‘धर्मगुरुओं का देश की जनता के नाम संदेश’ विषय पर अपने विचार साझा किए.

धार्मिक जनमोर्चा विभिन्न धर्मगुरुओं और धर्माचार्यों का एक संयुक्त मंच है जो प्रेम, सौहार्द, सहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने तथा मानवता के आधार पर देश में आपसी सहयोग व भाईचारे को मज़बूत करने के उद्देश्य से कार्यरत है.

स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगाँठ पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न धर्मगुरु शामिल हुए जिनमें शंकराचार्य श्री ओंकारानन्द सरस्वती (प्रयागपीठ), पीठाधीश गोस्वामी सुशील जी महाराज, गुरुद्वारा बंगला साहब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रंजीत सिंह, आचार्य विवेक मुनि, रविदासीया धर्म संगठन के स्वामी वीर सिंह हितकारी, और जमाअत इस्लामी हिन्द के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर थे.

कार्यक्रम के आरंभ में बात रखते हुए स्वामी ओंकारानंद ने कहा कि आज़ादी की 75वीं वर्षगाँठ में हमें यह सोचना होगा कि क्या हम पूरी तरह इस स्वतंत्रता से संतुष्ट हैं. शायद भारत को अभी और भी स्वतंत्र होना है जहां धर्म के नाम पर किसी के साथ बुरा बर्ताव नहीं किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि, “कुछ लोगों द्वारा देश को चलाया जा रहा है जो कि बहुत ही दुखद है. हमारा देश संविधान और उसमें दी गई स्वतंत्रता से चलना चाहिए.”

ओंकारानंद ने कहा कि, “स्वतंत्रता का सही रूप तब देखने को मिलेगा जब सभी को वो आज़ादी मिलेगी जो संविधान ने हमें दिया है. हमें रास्ता चलते डर न लगे, कोई हिन्दू या मुस्लिम किसी से डरे नहीं और किसी को किसी दूसरे धर्म के पड़ोसी से दिक़्क़त न हो. शायद हमें इस प्रकार की स्वतंत्रता के लिए और प्रयत्न करना होगा.”

उन्होंने कहा, “सभी को अपने धर्म पर चलने, धर्म की पहचान के साथ जीने और अपने विचार को प्रचारित प्रसारित करने की स्वतंत्रता हासिल है. संविधान इसी स्वतंत्रता को सभी के लिए सुनिश्चित करता है.”

उन्होंने कहा, “यह स्वतंत्रता जो हमें मिली है वो बड़ी कुर्बानियों से मिली है लेकिन अभी भी कुछ मामलों में परतंत्र हैं. हमारा और आप का व्यवहार ऐसा हो कि किसी भी नागरिक को हमसे कष्ट न हो और हमारी तरफ से यही देश के लिए सबसे बड़ा योगदान होगा.

शंकराचार्य ने कहा कि, “हम सभी एक हैं और सभी एक स्वतंत्र नागरिक हैं. यदि हर व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता का सही मायने में सदुपयोग करे तो यही देश की सही मायने में स्वतंत्रता होगी.”

गोस्वामी सुशील जी महाराज, कन्वीनर भारतीय सर्व धर्म संसद ने अपनी बात रखते हुए कहा कि, “हमारा कर्तव्य है कि हम सभी का आदर करें, क्योंकि स्वतंत्रता यह नहीं है कि किसी के धर्म को बुरा भला कहा जाए और किसी धर्म का अनादर किया जाए.”

उन्होंने कहा कि, “कुछ मुट्ठी भर लोग अपने कर्म और वचन से अन्य धर्मों के लोगों की भावना को ठेस पहुंचाते हैं. हमें खेद है कि ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती.”

प्रधानमंत्री के साथ धार्मिक जनमोर्चा की पूर्व में हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि, “हमारी बहुत अच्छी चर्चा रही लेकिन एक बात यह कहना चाहते हैं कि जो लोग देश में एक दूसरों पर हमले कर रहे हैं उनपर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए.”

गुरुद्वारा बंगला साहब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रंजीत सिंह, ने स्वतंत्रता दिवस की पुर्व संध्या पर अमेरिका से ऑनलाइन चर्चा में शामिल होकर अपने विचार साझा किए.

ज्ञानी रंजीत सिंह ने कहा कि, “हमें आज़ादी अंग्रेज़ों से लेनी थी मगर हम आज़ादी लेते लेते आपस में बट गए. हमारे सिख धर्म के संस्थापक पाकिस्तान में जन्म हुआ. हमारे गुरु जी की जन्मभूमि है. हम यही दुआ करते हैं कि हम फिर से एक बार मिल जाएं.”

बटवारे के दुख की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि, हमने बहुत कुछ खोया है, नफरत ने बहुत नुकसान पहुंचाया है, हमें फिर से एक होना चाहिए.

उन्होंने कहा, “देश में हम सभी धर्मों के लोगों को स्वतंत्रता दिवस मुबारक हो, हम इस धार्मिक जनमोर्चा के माध्यम से देश को मिलकर रहने का संदेश देते हैं जैसे यह मोर्चा काफी अर्से से एक साथ काम कर रहा है वैसे ही सभी देशवासी एक साथ मिल कर रहने की सीख ले सकते हैं.”

स्वामी वीर सिंह हितकारी, रविदासीय धर्म संगठन के पदाधिकारी ने अपनी बात साझा करते हुए कहा कि देश में जातिवादी एक बड़ी समस्या है और इस से भी स्वतंत्रता हासिल करना होगा.

उन्होंने कहा कि, “देश में दबे कुचले लोगों के हित की रक्षा को सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है, जब तक सभी लोगों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा, उनको स्वतंत्रता का आभास नहीं होगा.”

स्वामी वीर सिंह ने जमाअत इस्लामी और इसके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंजीनियर सलीम का धन्यवाद दिया कि विपरीत परिस्थिति में भी सभी धर्मगुरुओं को धार्मिक जनमोर्चा के माध्यम से साथ लेकर चलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

आचार्य विवेक मुनि ने विषय पर अपनी बात रखते हुए सभी देशवासियों को 75वीं वर्षगांठ की मुबारकबाद दी.

उन्होंने कहा कि, “स्वतंत्रता शब्द बहुत ही सुंदर और सुखद है. व्यक्ति की स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब व्यक्ति अपनी मर्यादा में रहते हुए उसका उपयोग कर सके. इस देश के संविधान की मर्यादा में रहते हुए अपने धर्म को स्वतंत्रता पूर्वक अपना सके.”

उन्होंने कहा कि, “हिंदुस्तान वशुधेवकुटुम्बकं के विचार को जीता है ऐसे में हम भारतवासी सब एक परिवार हैं. धर्म यह कहता है कि अगर हम किसी को पीड़ा पहुंचाते हैं तो यह धर्म नहीं है.”

आचार्य विवेक मुनि ने कहा कि, “यह देश किसी एक धर्म का नहीं है बल्कि यह कई धर्मों का संगम है. हमें सभी का सम्मान करना चाहिए. हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि प्रेम से प्रेम बढ़ता है और घृणा से घृणा बढ़ती है और हमारा मार्ग अहिंसा का मार्ग है.”

कार्यक्रम के समापन पर धर्मिक जनमोर्चा और इस ऑनलाइन चर्चा के कन्वीनर इंजीनियर मोहम्मद सलीम ने कहा कि धार्मिक जनमोर्चा का यह प्रयास है कि देश के सभी लोग प्रेम और सौहार्द के साथ रहें.

उन्होंने कहा कि, “हमारे संविधान ने एकता, न्याय और समानता का अधिकार हमें दिया है. कभी कभी इस विचार को कमज़ोर करने की कोशिश की जाती है. ऐसे में सरकार का यह कर्तव्य है कि संविधान की मूल भावना को देश में स्थापित करने को सुनिश्चित करे.”

इंजीनियर सलीम ने कहा कि, “सरकार को यह भी चाहिए कि संविधान की प्रस्तावना के मूल तत्व को बचाये रखने और इसे स्थापित करने में अपना सहयोग दे.”

दिल्ली और कानपुर में हुई साम्प्रदायिक घटना पर उन्होंने कहा, “जो लोग अपराध, अन्याय और शोषण को देखकर ख़ामोश हैं वो सभी लोग अप्रत्यक्ष रूप से अपराध के समर्थक हैं. हम बुरे को बुरा कहें और क़ानून का राज स्थापित करने के लिए प्रयास करें.”

प्रो. सलीम ने कहा कि, “जब तक देश के सबसे कमज़ोर और गरीब व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का अवसर नहीं मिलेगा, हम स्वतंत्रता को सही शब्दों में समझने में असमर्थ रहेंगे.”

कार्यक्रम में सभी धर्मगुरुओं ने स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ की मुबारकबाद देते हुए धर्मिक जनमोर्चा के विचारों को आम जन तक पहुंचाने और सभी देशवासियों से मिलकर रहने की अपील की.

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