Sunday, December 5, 2021
Home एजुकेशन जमाते इस्लामी ने किया जौहर युनिवर्सिटी का दौरा, कहा- यह राष्ट्र...

जमाते इस्लामी ने किया जौहर युनिवर्सिटी का दौरा, कहा- यह राष्ट्र की संपत्ति, इसकी रक्षा सभी का कर्तव्य

सैयद ख़लीक अहमद

रामपुर (उत्तर प्रदेश) | रामपुर शहर के बाहरी इलाके में स्थित मोहम्मद अली जौहर युनिवर्सिटी इन दिनों राजनीतिक दंश झेल रही है और बदले की भावना की शिकार है. हाल ही में यूपी सरकार ने विश्वविद्यालय की कुल 350 एकड़ ज़मीन में से 173 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया है, और इसे राज्य के राजस्व रिकार्ड में सरकारी भूमि के रूप में रजिस्टर कर लिया है. हालांकि अभी यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है.

विश्वविद्यालय के खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई उस वक्त की गई है जब एडमिशन का समय चल रहा है और सरकार की यह कार्रवाई छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से हतोत्साहित कर रही है. मोहम्मद अली जौहर युनिवर्सिटी में 2018 सत्र में छात्रों की संख्या 2500 थी उसके मुकाबले में अब यहां छात्रों की संख्या मात्र 1100 रह गई है. विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग, प्रबंधन, फार्मेसी, लॉ, बी.एड, पैरामेडिकल, ह्युमनिटीज़, इस्लामी अध्ययन और कई अन्य पाठ्यक्रम संचालित होते है. इसके साथ ही इस विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक इमारतें हैं जो देश के किसी भी सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय के समक्ष दिखाई देती है.

युनिवर्सिटी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से मंजूरी मिलने के बाद 2012 में जब समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे उस वक्त यूपी राज्य विधानसभा द्वारा मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को एक निजी विश्वविद्यालय के रूप में स्वीकृति प्रदान की गई थी. हालाँकि मार्च 2017 में भाजपा के सत्ता में आने और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से यह विश्वविद्यालय विवादों के घेरे में आ गया. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने मई 2013 में इसे अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया था.

सपा नेता आज़म खान मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय ट्रस्ट द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय के आजीवन चांसलर हैं.

अजीब इत्तेफ़ाक है कि जब से भाजपा ने राज्य में सत्ता संभाली है तब से विश्वविद्यालय और आज़म खान दोनों ही कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं.

आज़म खान, जिनके खिलाफ भाजपा के सत्ता में आने के बाद 81 आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे, वो वर्तमान में किडनी की बीमारी जूझ रहे हैं और लखनऊ के मेदांता अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

उनके खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप है, उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को 2017 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कथित फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का आरोप है, ज़मीन कब्ज़ा करने के आरोप हैं. अब्दुल्ला आज़म के खिलाफ 44 मामले दर्ज हैं.

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले और अन्य मामलों में आज़म खान, उनके बेटे और पत्नी – ताज़ीन फातिमा को 26 फरवरी, 2020 को गिरफ्तार किया गया और सीतापुर जेल में रखा गया था.

73 वर्षीय आज़म खान को अप्रैल 2021 में कोविड -19 संक्रमण होने पर उन्हें लखनऊ के एक अस्पताल में कोरोना के इलाज के लिए जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था. ठीक होने के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया लेकिन किडनी की समस्या की शिकायत के बाद उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया.

दस महीने की जेल के बाद इकहत्तर वर्षीय ताज़ीन फातिमा को 23 दिसंबर 2020 को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया. उन पर 34 मामले दर्ज किए गए थे. एक सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर रही ताज़ीन फातिमा को अक्टूबर 2019 में रामपुर सदर से विधायक चुना गया था. वहीं आज़म खान रामपुर से सांसद हैं. उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म 2017 में सोअर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे, लेकिन बाद में उन्हें उनके जन्म प्रमाण पत्र के कथित तौर पर जाली होने के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था.

आज़म खान की गिरफ्तारी के बाद विश्वविद्यालय के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए

आज़म खान की कैद के बाद मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने दावा किया है कि विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार पीडब्ल्यूडी की ज़मीन पर बनाया गया था. इसे हटाने के लिए विभाग ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था और नुकसान होने का दावा किया था. पीडब्ल्यूडी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने फोर लेन रोड और 1.5 किमी लिंक रोड का निर्माण किया था जो वर्तमान में विश्वविद्यालय के दायरे में आता है. पीडब्ल्यूडी ने आरोप लगाया कि जब से एक सरकारी विभाग ने विश्वविद्यालय के अंदर सड़क बनाई है, सड़क सार्वजनिक सड़क बन गई है. हालाँकि, विश्वविद्यालय ने इसके मुख्य प्रवेश द्वार पर एक गेट बनाकर आम जनता की आवाजाही को वहां से रोक दिया है जहाँ से “पीडब्ल्यूडी-निर्मित” सड़क शुरू होती है.

कुछ महीने पहले एक निचली अदालत ने जून 2016 से मई 2019 तक सड़क बंद करने पर विश्वविद्यालय पर 3.27 करोड़ रुपये के हर्जाने का जुर्माना लगाया था. अदालत ने फाटक हटाने तक 9.10 लाख रुपए प्रतिमाह का अतिरिक्त जुर्माना लगाने का भी आदेश दिया.

रामपुर जिला और सत्र न्यायाधीश ने 2 अगस्त को निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा लेकिन हर्जाने की लागत में संशोधन किया और विश्वविद्यालय को रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। जून 2016 से मई 2019 तक 1.63 करोड़ और रुपये का भुगतान करने के लिए कहा। फाटक हटाने तक 4.55 लाख प्रतिमाह। इस आदेश को विवि ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

पीडब्ल्यूडी के दावे का विश्वविद्यालय प्रशासन ने खंडन किया

विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के दावे का खंडन किया है. उनका कहना है कि मुख्य द्वार का निर्माण 2006 में हुआ था, जबकि सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी ने बाद में किया था. विवि के अधिकारियों के मुताबिक जिस ज़मीन पर यूनिवर्सिटी का मेन गेट खड़ा है वह यूनिवर्सिटी की जमीन है और ज़मीन की रजिस्ट्री मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नाम पर है. जहां तक ​​विश्वविद्यालय के अंदर सड़क की बात है, तो अधिकारियों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी ने इसका निर्माण सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को विश्वविद्यालय का उद्घाटन करने के लिए कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में आसानी करने के लिए किया था. अधिकारियों का कहना है कि जिस ज़मीन पर पीडब्ल्यूडी ने सड़क बनाई है, वह विश्वविद्यालय की है, पीडब्ल्यूडी की नहीं है और इसलिए पीडब्ल्यूडी उस सड़क को पीडब्ल्यूडी या सार्वजनिक सड़क होने का दावा नहीं कर सकता.

मुख्य द्वार से और “पीडब्ल्यूडी रोड” के माध्यम से जनता की मुक्त आवाजाही को रोकने पर अधिकारियों का कहना है कि वे जनता के लिए गेट खुला रखने के लिए तैयार हैं, बशर्ते कि सड़क का उपयोग करने के लिए लोग उपलब्ध हों. विश्वविद्यालय कोसी नदी के तट पर स्थित है. विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार विश्वविद्यालय के पूर्वी हिस्से में है, कोसी नदी विश्वविद्यालय की पश्चिमी सीमा है. विश्वविद्यालय की पश्चिमी सीमा और कोसी नदी के बीच कोई खाली जमीन, गांव या मानव बस्ती नहीं है. विश्वविद्यालय के अधिकारियों सवाल करते हैं कि “जब दूसरी ओर या पश्चिमी दिशा में कोई नहीं रहता है तो विश्वविद्यालय किसके आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रहा है?”

इसके अलावा, विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार “पीडब्ल्यूडी सड़क” और मुख्य द्वार विश्वविद्यालय की ज़मीन पर हैं, और गेट और सड़क को 24 घंटे खुला रखने से विश्वविद्यालय की सुरक्षा को खतरा होगा. विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की उत्तरी सीमा के साथ चार लेन की सरकारी सड़क है, जिसका उपयोग कोसी नदी की ओर जाने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है। फिर विश्वविद्यालय की सुरक्षा को खतरे में क्यों डालना?

पीडब्ल्यूडी ने विश्वविद्यालय की ज़मीन पर सड़क क्यों बनाई?

एक और सवाल उठता है, पीडब्ल्यूडी ने उस ज़मीन पर सड़क क्यों बनाई जो उनके कब्जे में थी ही नहीं? स्थानीय पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को ऐसा करने के लिए किसने बाध्य किया? उन अधिकारियों के खिलाफ कोई जांच क्यों नहीं हो रही है? जब विश्वविद्यालय के अंदर सड़क बनी थी तब शिवपाल सिंह यादव पीडब्ल्यूडी मंत्री थे. उनसे पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है? और जब विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार बनाया जा रहा था तब पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने चुप्पी क्यों साधी? पीडब्ल्यूडी संपत्तियों का ट्रस्टी होने के नाते स्थानीय पीडब्ल्यूडी प्रमुख को तुरंत आपत्ति दर्ज करवानी चाहिए थी. वर्तमान में अदालत का रुख करने वाले पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को उन पूर्व पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू करनी चाहिए, जिनके कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार बनाया गया था.

स्थानीय ग्रामीण भी विश्वविद्यालय का समर्थन करते हैं

विश्वविद्यालय पर 40 मालिकों की 3.75 बीघा जमीन हड़पने का भी आरोप है. विश्वविद्यालय का कहना है कि उन्होंने मालिकों को भुगतान कर दिया था लेकिन ट्रस्ट के नाम पर जमीन हस्तांतरित नहीं कर सके. जब ज़मीन हथियाने का मुद्दा उठाया गया, तो मालिकों ने शुरू में कहा कि उन्हें भुगतान नहीं मिला है. विश्वविद्यालय ने उन्हें फिर से भुगतान करने की पेशकश की, बशर्ते वे विश्वविद्यालय को भूमि हस्तांतरित करने के लिए सहमत हों. लेकिन विश्वविद्यालय से सटे शौकत नगर गांव के 27 लोगों ने एफआईआर दर्ज करायी. विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने आरोप लगाया कि “जब एफआईआर करवाने वालों को विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने और इसे बंद करने की साज़िश का पता चला, तो ग्रामीणों ने शिकायतों को वापस लेने के लिए एप्लीकेशन दी” और यह शौकत नगर के ग्रामीण ही थे जिन्होंने 2 अगस्त को जिला अदालत के आदेश के बाद विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार को गिराने के इच्छुक सरकारी अधिकारियों का विरोध किया था.”

ग्रामीणों में से एक ने हमें बताया कि ग्रामीण विश्वविद्यालय के खिलाफ नहीं थे. एक ग्रामीण ने बताया कि, “यह हमारी संपत्ति है, और हम किसी को भी विश्वविद्यालय को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं देंगे” गांव के लोगों ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय का समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति या ग्रामीण के खिलाफ प्रशासन बहुत सख्त रहा है. विश्वविद्यालय की उत्तरी सीमा पर स्थित आलिया गांव के निवासियों का कहना है कि वे भी विश्वविद्यालय के साथ खड़े हैं. गांव के कई युवाओं का कहना है कि “हम नहीं चाहते कि विश्वविद्यालय को कोई नुकसान हो.”

पाकिस्तान जा चुके लोगों की लगभग 100 एकड़ ज़मीन को खाली या शत्रु संपत्ति कहा जाता है, अधिकारियों का कहना है कि इस ज़मीन को शुरू में स्थानीय वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित किया गया था. और जब विश्वविद्यालय की योजना बनाई गई, तो वक्फ बोर्ड के लिए खाली की गई संपत्ति को उचित प्रक्रिया के माध्यम से विश्वविद्यालय के ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था. विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि “लेकिन अगर सरकार चाहती है, तो ट्रस्ट इसके लिए वक्फ बोर्ड को भुगतान करने के लिए तैयार है.” अधिकारी ने कहा कि ऐसे कदम उठाना बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है जिसमें एक संस्थान को बंद कर दिया जाएगा जो एक राष्ट्रीय संपत्ति है.

जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय का दौरा किया और कलेक्टर से विश्वविद्यालय के पक्ष में समाधान की मांग

जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIH) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को विश्वविद्यालय की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जमाअत इस्लामी हिंद के कम्युनिटी अफेयर्स के सचिव मलिक मोतसिम खान के नेतृत्व में विश्वविद्यालय का दौरा किया.

विश्वविद्यालय के अधिकारियों से मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर रवींद्र कुमार मंदर से मुलाकात की और उन्हें वास्तविक स्थिति से अवगत कराया. प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से कहा कि, “मुस्लिम समुदाय शिक्षा में बहुत पिछड़ा हुआ है, और रामपुर में जो विश्वविद्यालय बनाया गया है वह सभी समुदायों के कल्याण के लिए है. लेकिन विशेष रूप से अकादमिक प्रवेश के समय की गई प्रशासन की कार्रवाई छात्रों में भय और चिंता पैदा कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या में गिरावट भी आई है. यह समाज के लिए चिंता का विषय है. मुस्लिम समुदाय विशेषकर महिलाएं शिक्षा के मामले में बहुत पिछड़ी हुई हैं. शहर और बाहरी इलाकों के लोग विश्वविद्यालय से लाभान्वित हो सकते हैं, अगर यह बिना किसी बाधा के संचालित होता है.”

जमाअत प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि, “विश्वविद्यालय किसी समुदाय का नहीं होता है. यह अलग बात है कि इसे चलाने वाला कौन है. यह एक राष्ट्रीय संपत्ति है. हर समुदाय इससे लाभान्वित हो सकता है”.

प्रतिनिधिमंडल ने यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि, “विश्वविद्यालय के भवन जो सैकड़ों करोड़ रुपये के निवेश से बनाये गए हैं, उन्हें कोई नुकसान न हो. मुख्य मुद्दा ज़मीन का है, जिसे सरकार शिक्षा के हित में हल कर सकती है. सरकार को अपनी उदारता दिखानी चाहिए. भले ही कुछ सरकारी भूमि विश्वविद्यालय में शामिल हो भी गई हो तब भी, सरकार को या तो इसे विश्वविद्यालय को आवंटित कर देना चाहिए या इसके मुआवज़े का दावा करना चाहिए. लेकिन इमारतों को गिराना या विश्वविद्यालय को बंद करने के लिए कदम उठाना उचित नहीं है.”

जिला कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल की बात को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि प्रशासन भवनों को गिराने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा. जहां तक ​​अदालती मामलों का सवाल है, उन्होंने कहा कि इनका फैसला केवल अदालतें करती हैं, और बाकी बातें सरकार में उच्च स्तर के अधिकारियों द्वारा तय की जाती हैं.

- Advertisement -
- Advertisement -

Stay Connected

16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe

Must Read

CAA त्रुटिपूर्ण, यह संविधान के सिद्धांतों के विरुद्ध है: न्यायामूर्ति ए.के. गांगुली (सेवानिवृत्त)

इंडिया टुमारो नई दिल्ली | न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एके गांगुली ने कहा है कि 2019 में भाजपा सरकार द्वारा पारित...
- Advertisement -

गुरुग्राम: कट्टरपंथियों द्वारा “जय श्री राम” के नारों के बीच मुसलमानों ने अदा की जुमे की नमाज़

सैयद ख़लीक अहमद नई दिल्ली | भारत की संसद से मात्र 30 किलोमीटर दूर स्थित गुरुग्राम में शुक्रवार को...

राजस्थान: मुसलमानों द्वारा शपथ पत्र देने के बाद भी अधिकारी नहीं बना रहे अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र

रहीम ख़ान | इंडिया टुमारो जयपुर | राजस्थान के अजमेर, भीलवाड़ा, पाली और राजसमंद समेत अन्य जिलों में चीता,...

क्या ASI कुतुब मीनार परिसर का संरक्षण कर रहा या इसकी मूल संरचना को नष्ट कर रहा?

सैयद ख़लीक अहमद नई दिल्ली | दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक स्मारक कुतुब मीनार को लेकर दक्षिणपंथी समूहों द्वारा पैदा...

Related News

CAA त्रुटिपूर्ण, यह संविधान के सिद्धांतों के विरुद्ध है: न्यायामूर्ति ए.के. गांगुली (सेवानिवृत्त)

इंडिया टुमारो नई दिल्ली | न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एके गांगुली ने कहा है कि 2019 में भाजपा सरकार द्वारा पारित...

गुरुग्राम: कट्टरपंथियों द्वारा “जय श्री राम” के नारों के बीच मुसलमानों ने अदा की जुमे की नमाज़

सैयद ख़लीक अहमद नई दिल्ली | भारत की संसद से मात्र 30 किलोमीटर दूर स्थित गुरुग्राम में शुक्रवार को...

राजस्थान: मुसलमानों द्वारा शपथ पत्र देने के बाद भी अधिकारी नहीं बना रहे अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र

रहीम ख़ान | इंडिया टुमारो जयपुर | राजस्थान के अजमेर, भीलवाड़ा, पाली और राजसमंद समेत अन्य जिलों में चीता,...

क्या ASI कुतुब मीनार परिसर का संरक्षण कर रहा या इसकी मूल संरचना को नष्ट कर रहा?

सैयद ख़लीक अहमद नई दिल्ली | दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक स्मारक कुतुब मीनार को लेकर दक्षिणपंथी समूहों द्वारा पैदा...

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में एक ब्राह्मण परिवार पलायन को मजबूर

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो लखनऊ | यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में अपराधियों की...
- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here