Saturday, September 25, 2021
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यूपी विधानसभा चुनाव में किसानों के भाजपा के खिलाफ प्रचार करने के ऐलान से RSS की चिंता बढ़ी

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ । यूपी विधानसभा चुनाव में किसानों द्वारा भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार करने के ऐलान से आरएसएस की चिंता बढ़ गई है। भाजपा सरकार की उत्तर प्रदेश में वापसी करने के लिए आरएसएस ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया है। लेकिन संघ की राह इतनी आसान नहीं है।

यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भारी अनियमितताओं और गुंडागर्दी के बल पर राज्य में भाजपा ने 75 में से 67 जिला पंचायत अध्यक्ष के पदों पर और दो तिहाई से अधिक ब्लॉक प्रमुख के पदों पर जीत दर्ज करके खूब जश्न मनाया। सत्ता के घमंड में उसने लोकतंत्र की जो धज्जियां उड़ाई हैं, वह किसी से छिपी नहीं हैं। भाजपा इन चुनावों को जीतकर इतने अधिक अहंकार में है कि वह राज्य में विधानसभा चुनाव जीतने और सरकार बनाने की बात कर रही है। भाजपा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अपनी जीत को असली जीत बता कर ख़ुश हो रही है।

हालांकि, भाजपा अपनी असली जमीन खो चुकी है मगर उस पर पर्दा डाल रही है। राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उसके जिला पंचायत सदस्य और बीडीसी सबसे कम जीते थे, ऐसे में वह राज्य में सबसे ज्यादा अपने जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख कैसे बनवा ले गई है यह किसी से छिपा नहीं है। भाजपा की इस जबरिया जीत की खुशी की खुमारी अभी उतर भी नहीं पाई थी कि कृषि कानूनों का विरोध करने वाले आंदोलनकारी किसानों ने यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार करने का ऐलान कर भाजपा की नींद उड़ा दी।

किसानों के नेता राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ गांव-गांव जाकर लोगों को कृषि कानूनों की खराबी और उससे होने वाले किसानों के नुकसान को बताने की बात कही है। राकेश टिकैत ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में किसान गांव-गांव जाएंगे और मोदी सरकार की नाकामी को लोगों को बताएंगे और लोगों से योगी आदित्यनाथ की सरकार को हराने के लिए कहेंगे। लोगों को आंदोलनकारी किसान भाजपा सरकार की नाकामियों को बताएंगे और देश में मोदी सरकार के चलते बढ़ रही मंहगाई के बारे में भी जानकारी देंगे।

इसके साथ ही किसान मोदी सरकार के कारण देश में युवाओं को रोज़गार से वंचित किए जाने और सरकारी संस्थाओं को बेचे जाने की जानकारी देंगे और वोटरों से उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने की अपील करेंगे। किसान नेता राकेश टिकैत के यूपी में विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार करने के ऐलान करने से आरएसएस को तगड़ा झटका लगा है और आरएसएस की आंखों की नींद उड़ गई है। आरएसएस नेताओं के चेहरे पर चिंता की लकीरें आसानी से देखी जा सकती हैं।

आरएसएस को यह अच्छी तरह पता है कि राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव योगी आदित्यनाथ की सरकार ने किस तरह जीता है। आरएसएसयह समझ रहा है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्यों और बीडीसी सदस्यों को डरा धमकाकर अपने साथ करके जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीता गया है। जबकि विधानसभा चुनाव में यह सब संभव नहीं हो सकता है, क्योंकि एक-एक विधानसभा चुनाव क्षेत्र में लाखों वोटर होंगे और लाखों वोटरों को डराना-धमकाना संभव नहीं है। डराने-धमकाने का कार्य चंद लोगों के बीच किया जा सकता है मगर लाखों लोगों के बीच करने पर हिंसा होने से लेकर विधानसभा चुनाव तक रद्द हो सकता है।

आरएसएस यह भी समझ रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की दाल नहीं गलने वाली है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख तो अपने बनवा लिया है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के जिला पंचायत सदस्य और बीडीसी बहुत ही कम संख्या में चुने गए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का साफ असर देखा जा सकता है। दिल्ली में लगातार चल रहे किसान आंदोलन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की बड़ी भूमिका है। इस किसान आंदोलन की खास बात यह है कि इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट, गूजर और मुस्लिम समुदाय के लोग एक -दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए हैं। यही कारण है कि इतने लंबे वक्त से किसानों का आंदोलन नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ सफलता पूर्वक चल रहा है और मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ रही हैं।

इस आंदोलन में हरियाणा और पंजाब के किसानों द्वारा भी सकारात्मक भूमिका निभाई जा रही है। 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले मुज़फ्फरनगर में हुए दंगे के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच मतभेद उत्पन्न हो गया था, जिससे हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग एक दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए थे और हिंदू वोटरों का धुर्वीकरण हो गया था एवं भाजपा इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जीत गई थी।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट, गूजर और मुस्लिम समुदाय के वोटर हमेशा पूर्व प्रधानमंत्री स्व.चौधरी चरण सिंह के साथ रहता था। इनके बाद इनके पुत्र चौधरी अजित सिंह के साथ आ गया था और हमेशा चौधरी अजित सिंह का साथ देता था। लेकिन मुज़फ्फरनगर दंगे के कारण यह वोटर बिखर गया और भाजपा जीत गई। लेकिन किसान आंदोलन के कारण अब यह वोटर फिर एक साथ आ गया है और इसका असर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देखने को भी मिला है। यही कारण है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोक दल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मज़बूत होकर उभरा है। यह अलग बात है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में गड़बड़ी करके अपने जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख अधिक संख्या में बनवा लिया है, लेकिन इसके बावजूद योगी आदित्यनाथ सारी ताकत लगा कर भी बागपत में अपना जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं बनवा पाए हैं।

बागपत में राष्ट्रीय लोक दल का जिला पंचायत अध्यक्ष चुना गया है और इसके अध्यक्ष जयंत चौधरी को नई ताकत हासिल हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलितों के नेता चन्द्रशेखर उर्फ रावण के साथ दलित समाज का वोटर चला गया है, इससे मायावती कमज़ोर हो गई हैं। किसान आंदोलन से पश्चिम उत्तर प्रदेश में भाजपा के विरुद्ध हवा चल रही है। राकेश टिकैत के विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ गांव-गांव जनता के बीच जाकर चुनाव प्रचार करने के ऐलान से आरएसएस को तगड़ा झटका लगा है और संघ के नेताओं की आंखों की नींद गायब हो गई है। आरएसएस के नेता भाजपा की ज़मीनी हकीकत को अच्छी तरह समझ रहे हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ गांव -गांव जाकर प्रचार करने के ऐलान से आर एस एस बहुत डर गया है। आर एस एस यह मानकर चल रहा है कि अगर कृषि कानूनों का विरोध करने और मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन करने वाले किसान भाजपा के विरुद्ध विधानसभा चुनाव में प्रचार करने चुनावी मैदान में उतर जाएंगे तो भाजपा की हार होना तय है। इसीलिए आरएसएस की चिंता बढ़ गई है और भाजपा को लेकर काफी परेशान है।

संघ यह मानता है कि अगर यूपी में भाजपा की वापसी होगी, तभी 2024 में केंद्र सरकार में भाजपा की वापसी होगी। इसीलिए आरएसएस भाजपा की यूपी में वापसी के लिए बहुत परेशान है। आरएसएस यह भी मानकर चल रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस बार भाजपा के खिलाफ हवा चल रही है, इसका कारण किसान आंदोलन में बड़ी भूमिका निभा रहे किसान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं। ऐसी स्थिति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की डगर बड़ी कठिन है।

आरएसएस ने इसी सब ज़मीनी हकीकत को समझ कर भाजपा को यूपी विधानसभा चुनाव में जिताने के लिए खुद मोर्चा संभाल लिया है और मैदान में उतरने का फैसला किया है। इसी फैसले के तहत आरएसएस ने राज्य में गांव-गांव जाकर किसानों को समझाने का फैसला लिया है। आरएसएस ने तय किया है कि वह उत्तर प्रदेश के सभी गांवों में जाकर संघ की शाखाएं लगाएगी और जहां उसकी शाखाएं चल रही हैं उनकी संख्या बढ़ाएगी। आरएसएस की शाखाओं में किसानों को लाने का काम किया जायेगा और उनको जोड़कर मोदी और योगी की सरकार की अच्छाई बताई जाएगी। साथ ही केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा किसानों की भलाई के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देकर उन्हें भाजपा के पक्ष में वोट देने के लिए राजी किया जायेगा। किसानों की छोटी -छोटी दिक्कतों को इकट्ठा करके उन्हें हल करने का काम किया जायेगा, जिससे किसान भाजपा के साथ खड़े रहें। इसके लिए आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के लोग गांवों में जाकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आयोजित करेंगे और इनके ज़रिए किसानों को भाजपा के पाले में लाने और भाजपा के साथ बनाये रखने का काम किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के लोग गांवों में रात्रि विश्राम करेंगे और गांवों में रहेंगे भी।

आरएसएस यह मानकर चल रही है कि इससे गांवों के लोगों को वह अपने साथ लाने में कामयाब हो जाएगी। गांवों के लोगों और किसानों को साथ लेकर आरएसएस यूपी में दोबारा भाजपा की सत्ता को लाने में कामयाब हो जाएगी। आरएसएस यह मानकर चल रही है कि आंदोलनकारी किसान नेताओं के गांवों की ओर जाने के पहले ही वह गांवों के किसानों को अपने साथ जोड़ने में कामयाब हो जाएगा और किसान नेता गांवों की जनता और किसानों को फिर अपने साथ लाने में सफल नहीं होंगे। इस तरह आरएसएस भाजपा को यूपी में दोबारा सत्ता दिलाने में कामयाब हो जाएगा।

आरएसएस भाजपा को यूपी की दोबारा सत्ता दिलाने की कवायद कर रहा है। लेकिन आर एस एस की राह इतनी आसान नहीं है। संघ भाजपा को यूपी की सत्ता दिलाने की योजना तो बना रहा है, लेकिन किसानों की समस्या को समझने का काम नहीं कर रहा है। आज डीजल और खाद की बढ़ी हुई कीमतों ने किसानों की खेती करने की हालत खराब कर दी है। किसानों का खेती करना बड़ा मुश्किल हो गया है। ऊपर से सूखे की पैदा हो गई स्थिति से किसान और परेशान है। डीजल की मंहगाई से खेती चौपट हो गई है। आरएसएस को किसानों की यह समस्या नहीं दिखाई देती है। उसे केवल भाजपा की कुर्सी बचाने की चिंता है।आरएसएस को अपना फायदा दिखाई देता है, उसे किसानों की दिक्कतों से कोई मतलब नहीं है। संघ की इकतरफा सोच उस पर भारी पड़ेगी और गांवों के किसानों द्वारा विधानसभा चुनाव में उसे हार का स्वाद चखाया जाएगा।किसानों के लिए आंदोलन करने वाले नेता आरएसएस पर भारी पड़ेंगे। जब आंदोलनकारी किसान नेता जनता के बीच जाएंगे तो आरएसएस की योजनाएं धराशाई हो जाएंगी।

आरएसएस ने भाजपा को जिताने के लिए किसानों के हित में भाजपा से काम करने के लिए कहा है। लखनऊ में भाजपा की राज्य कमेटी की बैठक हुई, जिसमें किसानों की समस्याओं को हल करने की बात उठी। लेकिन बाद में इस पर फिर कोई चर्चा नहीं हुई। क्योंकि किसानों द्वारा कृषि कानूनों के खिलाफ मोदी सरकार के विरुद्ध लगातार आंदोलन किया जा रहा है और किसान किसानों के हित के लिए अपनी मांगों पर डटे हुए हैं एवं आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा की राज्य कमेटी ने किसानों की समस्या पर चुप्पी साधे रहना ही बेहतर समझा। यही नहीं राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास से कुछ ही फासले पर गन्ना संस्थान में गन्ना भुगतान के लिए किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि,4 वर्ष से उन्हें उनके गन्ना का बकाया भुगतान नहीं किया गया है। योगी आदित्यनाथ की सरकार किसान विरोधी है। हम लोग अपने बकाया भुगतान को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। अब ऐसे में आरएसएस अपनी बात किसानों से किस मुंह से कहेगी और किसान आरएसएस की बातों को क्यों तवज्जो देंगे। इस तरह आरएसएस अपने ही द्वारा बनाए प्लान में उलझ कर रह जाएगी और किसानों के हाथों से विधानसभा चुनाव में उसे हार मिलेगी।

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