Thursday, August 5, 2021
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योगी सरकार ने कांवड़ यात्रा को दी मंज़ूरी, सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, जताई नाराज़गी

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कांवड़ यात्रा को अनुमति देते हुए कोविड-19 के नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है। लेकिन यह निर्देश कितना कारगर साबित होगा, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा। कुंभ मेले हरिद्वार में भी उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कोरोना निगेटिव रिपोर्ट के बगैर कुंभ मेले में नहीं आने का निर्देश जारी किया था, लेकिन कुंभ मेले में क्या हुआ यह किसी से छुपा नहीं है। कुंभ मेले हरिद्वार में कोरोना फैला और अनगिनत मौतें हुईं।

अखिलेश त्रिपाठी | इंडिया टुमारो

लखनऊ। यूपी की योगी सरकार ने तुष्टीकरण की नीति अपनाते हुए कांवड़ यात्रा को मंजूरी दे दी है। हालांकि, उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है। कोरोना को देखते हुए इस बार हज यात्रा पर प्रतिबंध है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी मौजूदा समय को धार्मिक यात्रा और पर्यटन के लिए उचित नहीं माना है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा को मंजूरी दिए जाने को लेकर सख्त नाराज़गी जताई है और मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र और यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है।

यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने तुष्टिकरण को अपनाते हुए हिंदुओं के लिए कांवड़ यात्रा को मंजूरी दे दी है। इस यात्रा को मंजूरी दिए जाने का यह समय उचित नहीं है। देश कोरोना संकट से जूझ रहा है। उत्तर प्रदेश कोरोना संकट से अछूता नहीं है। कोरोना की दूसरी लहर में यूपी के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। लोगों ने कोरोना के चलते अपने परिजनों को खो दिया है और अभी तक इस संकट से उबर नहीं पाए हैं। देश में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका जताई जा रही है। संभावित तीसरी लहर को रोंकने के लिए देश में और यूपी में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

मैं सभी जाति एवं धर्म के लोगों की धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करता हूं और लोगों की धार्मिक आस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन इस सबसे ऊपर मानव जीवन है। मौजूदा समय मानव जीवन की हिफाजत करने का है। मानव जीवन जब होगा, तभी धार्मिक आस्था उत्पन्न होगी और मानव जीवन धार्मिक आस्थाओं को स्वीकार करेगा। वर्तमान समय में सबसे पहले जीवन को बचाने का प्रयास किया जाना चाहिए। लेकिन यूपी में योगी आदित्यनाथ को राज्य में पुनः एक बार फिर भाजपा की सरकार बनाने की सबसे बड़ी चिंता है।

इसीलिए योगी हिंदू समाज के वोटरों को हर हाल में भाजपा के साथ रखना चाहते हैं, क्योंकि वे यह मानकर चल रहे हैं कि हिंदू समाज के वोटरों द्वारा भाजपा का विधानसभा चुनाव में साथ दिया जाएगा। यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ हिंदू वोटरों को नाराज नहीं करना चाहते हैं और वह आगे से आगे हिंदू वोटरों को खुश करने का काम करते रहते हैं। कहीं हिंदू वोटर नाराज़ न हो जाएं और वह भाजपा के पाले से खिसक न जाएं, इस को ध्यान में रख कर योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश में सावन माह में होने वाली कांवड़ यात्रा को मंजूरी दी है।

कांवड़ यात्रा सावन माह में हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले हिंदू करते हैं। इस यात्रा में तीर्थ यात्रा करने वाले कांवड़ियों द्वारा गंगा नदी में स्नान करके गंगा जल को लिया जाता है। इसके बाद कांवड़ियों द्वारा गंगा जल लेकर यात्रा शुरू की जाती है और अपने मनोवांछित स्थान पर जाकर शिव जी के शिवलिंग पर गंगा जल चढ़ा कर पूजा अर्चना की जाती है। इस कांवड़ यात्रा में कांवड़ यात्रा करने वाले कांवड़िए जत्थे बनाकर जुलूस की शक्ल में एक लाईन से चलकर यात्रा करते हैं। कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर हरिद्वार में नीलकंठ महादेव को जल चढ़ाते हैं और महादेव से अपनी मनोकामना पूरी करने की विनती करते हैं। कुछ कांवड़ियों द्वारा गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री से गंगा जल लिया जाता है और कांवड़ यात्रा पर चल करके अपने मनोवांछित शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है।

अधिकतर कांवड़ियों द्वारा हरिद्वार से गंगा जल लेकर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित पुरा महादेव मंदिर में जलाभिषेक किया जाता है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश से कांवड़िए बिहार प्रदेश जाते हैं और वहां सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर झारखंड में स्थित बाबा बैजनाथ धाम में गंगाजल चढ़ाते हैं और यात्रा करते हैं। इस दौरान कांवड़ियों द्वारा लगभग 100 किलोमीटर पैदल यात्रा की जाती है। इसी प्रकार इस कांवड़ यात्रा को करने के लिए राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कांवड़िए यात्रा करते हैं और वह हरिद्वार से गंगा जल लेकर अपने मनोवांछित शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा अर्चना करते हैं।

इसी तरह कानपुर और उन्नाव एवं रायबरेली जिले से गंगाजल लेकर कांवड़िए बाराबंकी जिले में लोधेश्वर में लोधेश्वर महादेव को गंगाजल चढ़ाते हैं। इलाहाबाद, भदोही और मिर्जापुर से कांवड़िए गंगाजल लेकर वाराणसी में काशीविश्वनाथ शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। कुछ इसी प्रकार गंगा नदी के आसपास रहने वाले श्रद्धालुओं द्वारा अपने नजदीक के शिवमंदिर की कांवड़ यात्रा की जाती है और वहां पर स्थित शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाकर पूजा अर्चना की जाती है।

कांवड़ यात्रा को वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए थी। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हिंदुओं को खुश करने के लिए कांवड़ यात्रा किए जाने की मंजूरी दे दी। इस यात्रा को किए जाने की अनुमति देकर योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं/लोगों को मौत के मुंह में धकेलने का काम किया है। भाजपा के बड़े- बड़े नेता और खुद योगी आदित्यनाथ गैर भाजपाई सरकारों के ऊपर अक्सर आरोप लगाते हैं कि विपक्षी दलों की सरकार तुष्टीकरण की नीतियों पर चलने का काम करती हैं। लेकिन योगी आदित्यनाथ ने कोरोना कॉल में कांवड़ यात्रा को किए जाने की अनुमति देकर क्या तुष्टीकरण की नीति नहीं अपनाया है?

क्या योगी आदित्यनाथ ने हिंदुओं को भाजपा के साथ रखने के लिए कांवड़ यात्रा करने की मंजूरी नहीं दी है? इन सवालों का जवाब योगी आदित्यनाथ जानते हैं, लेकिन वह इनका जवाब नहीं देंगे। क्योंकि इनका जवाब देकर वे किस मुंह से लोगों का सामना करेंगे। अभी तक तुष्टीकरण की राजनीति करने का विपक्षी दलों और उनके नेताओं पर आरोप लगाने वाले योगी आदित्यनाथ ने खुद हिन्दू वोटरों को खुश करने के लिए कांवड़ यात्रा किए जाने की अनुमति देकर तुष्टीकरण की राजनीति की है। कोरोना कॉल चल रहा है और कोरोना के नए वायरस डेल्टा वैरिएंट के मामले भी राज्य में प्रकाश में आए हैं। अभी भी राज्य में शनिवार और रविवार को लॉक डाउन रहता है। ऐसी स्थिति में कांवड़ यात्रा को किए जाने की मंजूरी देकर योगी आदित्यनाथ ने समझदारी का काम नहीं किया है।

यह भी बात सामने आ गई है कि कोरोना वायरस हवा से भी फैलता है। कांवड़ यात्रा करने वाले कांवड़िए जब जुलूस में लाईन में जत्थे बनाकर एक साथ चलेंगे, तो यह कांवड़िए एक दूसरे के सम्पर्क में भी रहेंगे। ऐसे में जैसा मेडिकल साइंस से जुड़े हुए विशेषज्ञ तीसरी लहर आने की बात कह रहे हैं, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर तीसरी लहर को संभालना बड़ा मुश्किल हो जाएगा और कांवड़ यात्रा करने वाले कांवड़ियों को संभाला जाना बड़ी टेढ़ी खीर साबित होगा।

हालांकि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कांवड़ यात्रा को अनुमति देते हुए कोविड-19 के नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है। लेकिन यह निर्देश कितना कारगर साबित होगा, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा। योगी आदित्यनाथ ने दूसरे राज्यों से आने वाले कांवड़ियों के लिए आर टी पी सी आर जांच रिपोर्ट ज़रूरी कर दिया है। इस जांच के बाद ही दूसरे राज्यों के कांवड़ियों को उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा करने के अनुमति होगी।

योगी आदित्यनाथ ने राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को कांवड़ यात्रा करने वाले संगठनों से संवाद करने के निर्देश दिये हैं। किंतु यह संभव नहीं दिखाई देता है। ज्ञात हो कि कुंभ मेले हरिद्वार में भी उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कोरोना निगेटिव रिपोर्ट के बगैर कुंभ मेले में नहीं आने का निर्देश जारी किया था, लेकिन कुंभ मेले में क्या हुआ यह किसी से छुपा नहीं है।कुंभ मेले हरिद्वार में कोरोना फैला और अनगिनत मौतें हुईं। इसलिए योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कितना अमल किया जाएगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन एक बात तो यह सच है कि योगी आदित्यनाथ ने राज्य में कांवड़ यात्रा किए जाने की अनुमति राजनीतिक फायदे के लिए दी है और खुद राजनीतिक तुष्टीकरण किया है।

उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले हरिद्वार से सबक लेकर कांवड़ यात्रा शुरू करने की राज्य में अनुमति नहीं दी है। पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने राज्य में कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में कांवड़ यात्रा करने वाले कांवड़ियों को उत्तराखंड में हरिद्वार और गंगोत्री से गंगाजल लाने का इरादा पूरा नहीं होगा। कांवड़ियों को उत्तराखंड में प्रवेश करने पर गिरफ्तार कर 14 दिन के लिए क्वारंटाइन में भेजा जा सकता है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में कांवड़ यात्रा सख्ती से प्रतिबंधित किया है और श्रद्धालुओं को कांवड़ यात्रा न करने की सलाह दी है।

उन्होंने कहा है कि, कोरोना के चलते इस बार राज्य में कांवड़ यात्रा नहीं होगी। श्रद्धालुओं को चाहिए कि वह सरकार का सहयोग करें और प्रतीकात्मक रूप में पूजा अर्चना करें। उत्तराखंड की मेडिकल एसोसिएशन ने भी मुख्यमंत्री से कांवड़ यात्रा को इस बार रोंकने की मांग की थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा को शुरू करने के लिए बात की और उन्हें राजी करने का प्रयास किया। लेकिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने योगी आदित्यनाथ की बात को मानने से इंकार कर दिया और राज्य में कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया।

कोरोना के कारण इस बार हर साल की तरह होने वाली हज यात्रा पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। सऊदी अरब सरकार ने कोरोना को देखते हुए इस बार की हज यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बार भारत से हज यात्रा करने के लिए कोई भी शख्स हज यात्रा पर नहीं जा सकेगा। सऊदी अरब की सरकार का मानना है कि कोरोना को देखते हुए इंसान का जीवन बचाया जाना चाहिए, इसलिए भारत से होने वाली हज यात्रा इस बार रद्द रहेगी। हज यात्रा भी धार्मिक यात्रा है। लेकिन इस यात्रा के रद्द होने पर मुस्लिम समुदाय के किसी भी व्यक्ति ने कोई विरोध नहीं किया है।

इसी तरह बकरीद के त्योहार पर इकट्ठा होने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों से देश के मुस्लिम संगठनों ने भीड़ न इकट्ठा करने के लिए कहा है। साथ ही बकरीद को प्रतीकात्मक रूप में मनाए जाने और कोविड-19 के नियमों का पालन करने के लिए कहा है।मुस्लिम संगठनों की अपील पर मुसलमानों ने कोई एतराज़ नहीं जताया है। कोरोना के चलते सभी धर्मों के धार्मिक कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इस प्रतिबंध को लगाये जाने में प्रतिबंध को जाति, धर्म और समुदाय में नहीं बांटा जाना चाहिए।

कोरोना एक बीमारी है, यह जाति, धर्म और समुदाय को देखकर नहीं आती है। इसलिए कोरोना को नियंत्रित करने के लिए प्रतिबंध सभी पर लगाया जाना चाहिए न कि एक दूसरे धर्म के लोगों को केवल परेशान करने के लिए।

कांवड़ यात्रा को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी आपत्ति जताई है। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका प्रकट करते हुए एसोसिएशन ने धार्मिक कार्यक्रमों और पर्यटन पर रोक लगाए जाने की मांग की है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई एम ए) के डॉक्टरों ने इस पर चिंता जाहिर किया है। एसोसिएशन ने कहा है कि अगर लोगों के घुमक्कड़ी, तीर्थ यात्रा और यात्राओं पर लगाम नहीं लगाई गई तो कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है और यह बहुत ही भयावह होगी।

एसोसिएशन ने कहा है कि, धार्मिक आस्थाएं जरूरी हैं, पर अभी इसके लिए कुछ महीने इंतज़ार करना ही बेहतर होगा। दुनिया भर से हमें सीख लेने की ज़रूरत है। किसी भी महामारी का इतिहास उठाकर देख लें, तीसरी लहर को टाला नहीं जा सका है और दूसरी के बाद इसके आने का अंतराल भी बहुत लंबा नहीं रहा है। इसके बाद जब हमें सावधानी बरतनी चाहिए, तब लोग बेफिक्र होकर घूमने के लिए निकल रहे हैं यह दुःखद है।

कोरोना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लापरवाह लोगों पर सख्त नाराजगी जताई है और उन्होंने कहा है कि हिल स्टेशनों, बाजारों में बिना मास्क और सामाजिक दूरी के भारी भीड़ उमड़ना गम्भीर चिंता का विषय है। यह ठीक नहीं है, हमें यह बात हमेशा ध्यान में रखनी है कि तीसरी लहर को आने से कैसे रोंका जाए। हमें सतर्क रहने की ज़रूरत है और लोगों को भी लगातार सतर्क करते रहना पड़ेगा।

हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी ही पार्टी की सरकार के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कांवड़ यात्रा की अनुमति देने से नहीं रोंक पाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पार्टी की उत्तर प्रदेश की सरकार को कांवड़ यात्रा रोंकने के लिए क्यों नहीं कह पाए? क्या कांवड़ यात्रा को करने की राज्य सरकार द्वारा अनुमति देने के पीछे राजनीतिक फायदा उठाने की भाजपा की चाल नहीं है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास इन सवालों का जवाब नहीं है और वह देना भी नहीं चाहेंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार की कांवड़ यात्रा को मंज़ूरी देने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराज़गी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा को किये जाने की मंजूरी दिए जाने के मामले को स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र और यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है और 16 जुलाई को इस मामले की सुनवाई होगी। जस्टिस आर एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया है।

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