Thursday, August 5, 2021
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लखनऊ: आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार लोगों के घर पहुंचा रिहाई मंच, गिरफ्तारी पर उठाया सवाल

इंडिया टुमारो

लखनऊ | रिहाई मंच के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को आतंकवाद के नाम पर लखनऊ से गिरफ्तार किये गए लोगों के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाक़ात की. गिरफ्तार आरोपियों के परिवार से मिलने के बाद रिहाई मंच ने मीडिया को जारी बयान में कहा है कि पीड़ित परिवारों ने एटीएस की कार्रवाई पर सवाल उठाया है और जांच की मांग की है.

रिहाई मंच ने दुबग्गा के मिनहाज के पिता सिराज से और फातिमा नगर, मोहिबुल्लापुर के मसीरुद्दीन की पत्नी सईदा और उनके बच्चों से मुलाकात की. इस प्रतिनिमंडल में रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब, रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव, हाफिज मोहम्मद वसी, अजय तोरिया, टीनू बिंद्रा, मुराद प्रतिनिधि मंडल में शामिल रहे.

मीडिया को जारी बयान में रिहाई मंच ने कहा है कि परिजनों ने एटीएस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है.

रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मुहम्मद शुऐब ने कहा कि, “हर चुनाव के मौके पर मुसलमान नौजवानों को आईएसआई का एजेंट, हूजी का आतंकवादी, इंडियन मुजाहिदीन का खूंखार आतंकवादी और आईएसआईएस के लिए काम करते हुए दिखाकर गिरफ्तार किया जाता है और उनका मीडिया ट्रायल शुरू कर दिया जाता है. चुनाव के समय वोटों के ध्रुवीकरण के लिए ये सब किया जाता है और वर्तमान गिरफ्तारी भी उसी श्रृंखला की कड़ी है.”

उन्होंने कहा कि, “इस समय जन साधारण महंगाई की मार झेल रहा है, लॉक डाउन की मार से परेशान है, बेरोज़गारी झेल रहा है और लॉक डाउन के कारण काम धंधा छूट जाने के कारण भूखा रहने को बेबस है. सामान्य समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के उद्देश्य से तथा वोटों का ध्रुवीकरण करने की मंशा से सरकार ने फर्जी गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू किया है.”

रिहाई मंच के प्रतिनिधि मंडल के अनुसार, मिनहाज के पिता सिराज ने बताया कि, “उस दिन जब एटीएस उनके घर आई तो वे नहा रहे थे. एटीएस के लोग मिनहाज के कमरे में गए और बोरी में बरामदगी का दावा किया. यह तकरीबन सुबह के दस बजे के करीब का मामला है. पहले मालूम चला कि मिनहाज को उठाकर ले गए बाद में पता चला घर के बाहर सड़क पर किसी गाड़ी में उसे बिठाए थे. 6-7 बजे शाम के करीब एटीएस वाले मीडिया से दूर अपने अमौसी स्थित हेड क्वाटर ले गए जहां एक फार्म नुमा कागज पर दस्तखत करवाया. वहां से पुलिस चौकी दुबग्गा उनको और उनकी पत्नी को लाया गया फिर रात 9 बजे के करीब घर पर छोड़ दिया.”

मिनहाज का एक डेढ़ साल का बेटा माज़ है और उनकी पत्नी शिक्षिका हैं. मिनहाज अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं और एक बहन है जिसकी शादी हो चुकी है. मिनहाज इलेक्ट्रिक ट्रेड से डिप्लोमा हैं. 7-8 महीने पहले बैटरी की दुकान खोली थी.

रिहाई मंच का प्रतिनिधिमंडल मसीरुद्दीन के घर पहुंचा तो उनकी 12 साल की बेटी जो दो साल से शुगर की पेशेंट है कि हालात बीमारी और पिता के उठाए जाने के सदमें से और खराब हो गई थी. मसीरुद्दीन की तीन बेटियां और एक बेटा है. मसीरुद्दीन बैटरी रिक्शा चलाते थे. करीब सात महीने पहले इनके पिता का देहांत हो गया.

मसीरुद्दीन की पत्नी सईदा बताती हैं कि, उस दिन सुबह 11 बजे के करीब उनके बारे में पूछा और उन्हें लेकर चले गए. उसके बाद हम मड़ियांव थाने गए. सईदा रोते हुए बताती हैं कि, “वो देर से उठे थे तो चाय पीकर बैठे थे. तभी दो-तीन लोग आए और दरवाज़े पर आवाज़ दी. बाहर गए तो उन्होंने मसीरुद्दीन को पूछा, उन्होंने बताया तो उठाकर ले गए. वो कपड़े भी नहीं पहने थे. उनको कपड़े भी नहीं पहनने दिया और लेकर चले गए. फिर बाद में हमने पैंट-शर्ट दिया. उसके बाद हम उन्ही के साथ थाने चले गए, एक बेटी भी साथ गई. बाद कमांडों लोग आकर घर की तलाशी लिए.”

मसीरुद्दीन की पत्नी सईदा ने बताया कि, “घर का सारा सामान निकालकर फेक दिया. घर में बिखरे सामानों को देख सकते हैं. एक कूकर था उसे भी अपने साथ लेकर चले गए. हमारा कुछ कागज रखा था, पहचान पत्र था सब कुछ निकालकर लेकर चले गए. दोनों बेटियों को भगा दिया ये मेरी सास बैठीं रहीं. हम जब तक थाने पर रहे उनको गाड़ी में बैठाकर रखा गया था. उसके बाद कहा कि उनके पांच भाई हैं वो बता रहे, उनको बुलाकर लाइए और लेकर चले जाइए.”

उन्होंने बताया कि, “हम आए और अपनी बीमार सास को रिक्शे से बैठाकर ले गए. तब तक उनको वहां से कहीं और भेज दिया गया था. हमने पूछा कि कहां गए पर हमको कुछ नहीं बताया गया. कहा कि ठाकुरगंज थाने, काकोरी थाने देख लीजिए. हम आठ बजे तक ठाकुरगंज, काकोरी थाने गए पर हमको कुछ नहीं पता चला. फिर कहने लगे एटीएस वाले ले गए होंगे. हमारे साथ बहुत ज्यादती हो रही, मेरी बेटी जो शुगर की पेशेंट है, कह रही है कि मेरे अब्बू से मिला दो. अब इसकी दवाई कौन लाएगा. इनको इन्सुलिन कौन देगा. मुहल्ले वालों से पूछ लीजिए उन्हें कोई गलत नहीं कहता.”

परिवार ने आरोप लगाया कि एटीएस ने उनके बच्चों की किताबें भी उठा ले गए. मिनहाज के बारे में पूछने पर बताती हैं कि 14 हजार की बैटरी आती है. हमारी इतनी हैसियत नहीं है कि एक साथ पैसा देकर बैटरी खरीद लें, ऐसे में क़िस्त पर बैटरी लेते थे. ऐसे में जब कभी क़िस्त नहीं पहुंचा पाते थे तो मिन्हाज क़िस्त लेने आते थे.

मिन्हाज की पत्नी घर की हालत दिखाते हुए कहती हैं कि इतना बड़ा आतंकवादी कहा जा रहा है और घर के नाम पर टीन शेड में रहने को मजबूर हैं. वो तो बिटिया की बीमारी में ही परेशान थे कि कैसे उसकी दवा हो सके और हम सबको दो जून की रोटी मिल सके.

मेहरून निशा का कहना है कि किसी को मुसलमान होने की वजह से इतना दबाया जा रहा है. वो मेरा छोटा भाई है और लोग आतंकवादी कह रहे हैं. वह रिक्शा चलाकर घर चलाता है, चार बच्चे पाल रहा है. उसे लेकर चले गए, मेरे घर में कोई सामान बरामद हो तो आप बताइए. टीन पड़ी है और आप कह रहे हैं कि आतंकवादी का घर है. मोहल्ले वालों से पूछ लीजिए कि कभी किसी से लड़ाई हुई हो.

उन्होंने कहा, “मीडिया वाले पूछते हैं कि घर कहां से बना है. आप देख लीजिए टीनें ही पड़ी हैं घर कहां बना है. घर में क्या है देखिए दीवार तक नहीं उठी सब खुला पड़ा है. मीडिया सवाल कर रहा है कि कहां से पैसा आ रहा है. जो सच है सामने है. ये ज़मीन हमारे पिता ने तीस साल पहले खरीदी थी. इन्होने कोई ज़मीन भी नहीं खरीदी, ये ज़मीन तीन भाइयों की है. पूरा परिवार भूखे-प्यासे मर रहा है.”

रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने लखनऊ के बाद कानपुर और संभल से आ रही ख़बरों पर कहा है कि इसके पहले भी 2017 के विधानसभा चुनावों के वक्त वोटिंग से एक दिन पहले 7 मार्च को लखनऊ में कानपुर के सैफुल्लाह को आईएस का आतंकी कहकर एनकाउंटर का दावा किया गया था. आईएम के नाम पर जिस तरह से आज़मगढ़ को निशाना बनाया गया ठीक उसी तरह संभल को निशाना बनाया जा रहा है.”

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