Sunday, December 5, 2021
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बेंगलुरु का मर्सी मिशन: जिसने कोरोना मरीज़ों की सेवा में दिन-रात संघर्ष किया

रशीदा बकैत | इंडिया टुमारो

बेंगलुरु | घने अंधियारे में भी कहीं उम्मीद की एक किरण ज़रूर होती है. कोविड -19 के दौरान जब महामारी ने बेंगलुरु शहर को दुख के बादलों से ढंक लिया था उस वक्त “मर्सी मिशन” (एमएम) बेंगलुरू शहर के लिए उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आया.

एक करोड़ से अधिक की आबादी वाला बेंगलुरु शहर, जिसमें बड़ी संख्या में प्रवासी और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग भी शामिल हैं, अपनी विशिष्टताओं के कारण देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. अलग अलग क्षेत्रों में काम करने वाले बेंगलुरू के बहुत सारे एनजीओ ने भविष्य में आने वाली बड़ी चुनौतियों और उनकी गंभीरता को भांपकर कोविड के दौरान अपने संसाधनों के ज़रिए लोगों का सहारा बनने का फैसला किया. बेंगलुरु के कुछ चुनिंदा एनजीओ ने 21 मार्च, 2020 को पहली एक बैठक की. यह सभी गैर सरकारी समूह COVID-19 महामारी का सामना करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए व मिलकर “मर्सी मिशन” (एमएम) नामक एक अनौपचारिक गठबंधन बनाया गया.

अगले कुछ दिनों में कई अन्य गैर सरकारी संगठन भी इनके साथ शामिल हो गए. 25 से भी अधिक एनजीओ का गठबंधन और सहयोग समूह बनाने की दिशा में एमएम ने बहुत तेज़ी से प्रगति की है. मर्सी मिशन बनाने के लिए एक साथ आगे आए चुनिंदा एनजीओ में एचबीएस हॉस्पिटल, द यूनाइटेड फाउंडेशन, प्रोजेक्ट स्माइल, लाइफलाइन फाउंडेशन, ह्यूमेन टच, थानल, वीसीईटी, ह्यूमैनिटेरियन रिलीफ सोसाइटी, स्वाभिमान, एचडब्ल्यूए ट्रस्ट, पाम ट्रस्ट, हीलिंग टच, सिग्मा फाउंडेशन और अल-अंसार ट्रस्ट आदि शामिल है. ये सभी एनजीओ काफी पहले से ही बेंगलुरु शहर में स्वास्थ्य, शिक्षा, सूक्ष्म वित्त, आवास, भोजन / राशन सहायता, राहत कार्य आदि क्षेत्रों में काम कर रहे थे.

पिछले वर्ष मर्सी मिशन एनजीओ ने ड्राई राशन किट और फूड किचन वितरण तत्काल शुरू कर दिया था. लॉकडाउन 1 और 2 (23 मार्च से 31 मई) के दौरान मर्सी मिशन एनजीओ ने बेंगलुरु के 300 इलाकों और कर्नाटक के 25 से अधिक कस्बों में रहने वाले लोगों को लगभग 8.5 करोड़ रुपये के 83,000 से अधिक ड्राई राशन किट वितरित किए थे. इसके अलावा एमएम एनजीओ और संबद्ध समूहों ने पूरे बेंगलुरु में 33 मर्सी किचन संचालित किए, जहां उन्होंने 14.5 लाख भोजन के पैकेट बनाए और वितरित किए. एमएम के कार्यकर्ताओं ने विप्रो, अटरिया, कंपास, प्रेस्टीज, बीबीएमपी आदि दानदाताओं द्वारा दिए गए 12.3 लाख भोजन पैकेटों को वितरण की सुविधा भी प्रदान की.

मर्सी मिशन ने बेंगलुरु में कोरोना से मरने वाले लोगों के लिए एकमात्र एम्बुलेंस सेवा संचालित की. मर्सी मिशन के कार्यकर्ताओं ने बेंगलुरु में विभिन्न धार्मिक समुदायों के 1800 से अधिक COVID मृतकों का अंतिम संस्कार किया है.

मर्सी मिशन एनजीओ ने लॉकडाउन की अवधि के दौरान मुफ्त दवाओं की आपूर्ति की, फ्रंट-लाइन वर्कर्स को पीपीई किट वितरित किया, चिकित्सा शिविर, बुजुर्गों की देखभाल और ब्लड बैंक आदि की गतिविधियों को भी अंजाम दिया. पिछले साल से ही लगातार सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर स्लम इलाकों में मर्सी मिशन द्वारा कोविड और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं.

जून-अगस्त 2020 के महीनों में मर्सी मिशन ने लगातार अपने समाज सेवा के दायरे का विस्तार करना जारी रखा और शहर के समक्ष आने वाली हर आकस्मिक आवश्यकताओं के दौरान मदद की. मर्सी मिशन ने सभी को बेहतर चिकित्सा परामर्श प्रदान करने के लिए एक मुफ्त ऑनलाइन क्लिनिक भी खोला. जैसे ही शहर में COVID के मामले बढ़ने लगे मर्सी मिशन ने पूरे बेंगलुरु में ऑक्सीजन केंद्रों का संचालन किया और जब तक कि मरीज अस्पतालों में बेड हासिल करने में सक्षम नहीं हो गए, तब तक मर्सी मिशन द्वारा रोगियों को ऑक्सीजन सिलेंडर मुफ्त में उपलब्ध कराए गए.

मर्सी मिशन के मुख्य गैर सरकारी संगठनों में से एक, एचबीएस हॉस्पिटल ने जुलाई 2020 में 56 बेड्स के साथ कोविड सेवाएं प्रदान करना शुरू किया. मर्सी मिशन ने एचबीएस को 32 रोगियों (हल्के लक्षणों वाले) की केयर के लिए ऑक्सीजन केंद्र खोलने और संचालित करने की सुविधा प्रदान की. अगस्त 2020 में मर्सी मिशन ने शहर में प्लाज़मा दान करने वाले और प्राप्तकर्ताओं के बीच पुल का काम किया.

वर्ष 2020 समाप्त होने के बाद भी मर्सी मिशन लगातार लोगों के जीवन को बचाने के लिए प्रयास कर रहा है क्योंकि वर्ष 2021 में COVID की दूसरी लहर के कारण मौतों में वृद्धि देखी गई हैं. बैंगलोर में वर्तमान हालात पर बात करते हुए एमएम के सचिव अली शरीफ ने कहा कि, “दुर्भाग्य से, शहर में मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है जिसके कारण अप्रैल में मर्सी एंजेल्स के संचालन की क्षमता को बढ़ाना पड़ा. अकेले अप्रैल में हमने बिना किसी धार्मिक भेदभाव के श्मशान, कब्रिस्तान की 250 अंतिम यात्रा करवाने में मदद की है. लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तीन हार्स वैन और 29 स्वयंसेवक लगातार काम कर रहे हैं.”

उन्होंने आगे बताया कि, “अल अंसार ट्रस्ट सहित स्वयंसेवकों की विभिन्न टीमें इस सेवा को प्रदान करने के लिए पूरे शहर में काम कर रही हैं. इस गतिविधि के लिए हलाई मेमन जमात, प्रोजेक्ट स्माइल और एचबीएस अस्पताल द्वारा वैन उपलब्ध कराई गई हैं.”

ऑक्सीजन की भारी कमी को देखते हुए मर्सी मिशन वर्तमान में पूरे बेंगलुरु में छह मर्सी ऑक्सीजन सेंटर संचालित कर रहा है. 14 अप्रैल के बाद से ऑक्सिजन की मांग में तेज़ी बढ़ गई, कुल 9,654 ऑक्सिजन के लिए अनुरोध किए गए जिसमें से 837 सिलेंडर भेजे गए. 18 लोगों की एक स्वयंसेवी टीम छह ऑक्सीजन केंद्रों को संभाल रही है.

बैंगलौर में मर्सी मिशन ने लोगों को अच्छी चिकित्सा सलाह, सही जानकारी और मार्गदर्शन देने के लिए एक निशुल्क मर्सी क्लिनिक मोबाइल ऐप लॉन्च किया. कुल 11 डॉक्टरों को ऐप से जोड़ा गया है जो ऑनलाइन वीडियो परामर्श प्रदान कर रहे हैं. अप्रैल माह में 108 नि:शुल्क परामर्श दिए गए, जिससे 64 मरीज लाभान्वित हुए.

मर्सी मिशन ने प्लाज्मा दाताओं की खोज में मदद की तथा उन्हें प्राप्तकर्ताओं से मिलवाने में सहायता की. पहली लहर के दौरान करीब 550 मरीजों को प्लाज्मा मिला. अप्रैल 2021 से मांग और बढ़ गई थी. प्रोजेक्ट स्माइल और टीयूएफ ने जीवन रक्षा के साथ एंटीबॉडी परीक्षण शिविर आयोजित किए और इस अभियान से 35 संभावित प्लाज्मा दाताओं की पहचान की गई.

अली शरीफ ने बताया कि ‘मरीजों को एम्बुलेंस सेवाओं के भारी खर्चे से बचाने के लिए एमएम के पास मरीजों को ले जाने के लिए ऑक्सीजन से लैस सात एम्बुलेंस का पूरा बेड़ा है.”

उन्होंने आगे कहा कि, “प्रोजेक्ट स्माइल एम्बुलेंस दल का संचालन, प्रबंधन और रखरखाव कर रहा है. अप्रैल में कुल 127 ट्रिप किए गए. इसमें बिना लाभ कमाए नाममात्र शुल्क वसूल किए जाते हैं. शहर के अंदर आईसीयू के मरीजों के स्थानांतरण के लिए अब दो एम्बुलेंस में वेंटिलेटर लगाए गए हैं.”

मर्सी मिशन ने फ्रंट लाइन वर्कर्स (डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों), COVID रोगियों और गरीबों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार करने के लिए एक आधुनिक और स्वच्छ रसोई सुविधा भी तैयार की है.

एमएम ने डोर-टू-डोर जागरूकता अभियान भी चलाया. लाइफलाइन फाउंडेशन द्वारा 15 स्लम बस्तियों में वैक्सीन जागरूकता अभियान चलाया गया तथा इस सिलसिले में वार्ताएं भी आयोजित की है. 29 अप्रैल 2021 को मर्सी मिशन के एक सदस्य एचडब्ल्यूए फाउंडेशन द्वारा वैक्सीनेशन कैंप आयोजित किया गया था. बीबीएमपी द्वारा नि: शुल्क वेक्सिनेशन प्रदान किया गया था और इसके द्वारा 47 लोगों का वैक्सीनेशन भी किया गया था. एचबीएस अस्पताल को भी वैक्सीनेशन सेंटर के रूप में कार्य करने की अनुमति मिल गई है.

आपात स्थिति के दौरान अपने कार्यों को आमजन तक सुलभ बनाने के लिए एमएम द्वारा एक केंद्रीकृत सार्वजनिक हेल्पलाइन की स्थापना की गई थी और प्रोजेक्ट स्माइल द्वारा संचालित किया गया था. इसके अंतर्गत एम्बुलेंस, ऑक्सीजन, प्लाज्मा और परामर्श सेवाओं की आवश्यकता वाले रोगियों तक पहुंचने के लिए टीयूएफ के सहयोग से काम किया गया. हेल्पलाइन का संचालन 50 स्वयंसेवकों और 20 कर्मचारियों की एक टीम कर रही है. अली शरीफ ने बताया कि, “हमें एक महीने के दौरान 51,943 कॉल आए जिनमें से 21,327 यूनिक नंबर हैं. हम एक महीने में 8,177 कॉलों का जवाब देने में सक्षम रहे.”

एपीपीआई के सहयोग से मर्सी मिशन ने एचबीएस अस्पताल को 32 कमरों वाले ऑक्सीजन केंद्र को खोलने और संचालित करने की सुविधा प्रदान की. इस केंद्र में COVID से ठीक होने वाले ऐसे रोगियों को रखे जाने की व्यवस्था है जो छुट्टी के लिए फिट थे लेकिन उन्हें कड़ी निगरानी की आवश्यकता थी. इस सेंटर ने गंभीर रोगियों के लिए फ्री बेड और अस्पताल की क्षमता और बढ़ाने में मदद की. पहली लहर के दौरान 250 से अधिक रोगियों ने इसका लाभ उठाया.

अली शरीफ ने बताया कि, “दूसरी लहर में मांग में वृद्धि के साथ इस मॉडल को सरकार द्वारा भी अपनाया गया और इसका नाम बदलकर “स्टेप डाउन हॉस्पिटल” कर दिया गया, इसे 30 अप्रैल 2021 को खोला गया.”

मर्सी मिशन के गैर सरकारी संगठनों में से एक एचबीएस अस्पताल फिर से अप्रैल में 50 बेड्स के साथ एक समर्पित कोविड केयर सेंटर बन गया है. अप्रैल में HBS ने 250 रोगियों की सेवा की है और यह बेंगलुरु का एक प्रमुख COVID अस्पताल है. यह COVID रोगियों को डायलिसिस प्रदान करने वाले कुछ अस्पतालों में से एक है.

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