Sunday, December 5, 2021
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घरेलू हिंसा की रोकथाम के लिए जमाअत इस्लामी हिन्द ने शुरू किया 10-दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान

इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा पिछले वर्ष अप्रैल में दिए गए एक बयान कि, लॉकडाउन के दौरान ‘घरेलू हिंसा के मामले विश्वस्तर पर बढ़े हैं’ को गंभीरता से लेते हुए और इसकी रोकथाम के लिए, जमाअत इस्लामी हिंद (JIH) की महिला विंग देश भर में परिवार और समाज के बीच शांति स्थापित करने के उद्देश्य से 10-दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान ‘स्ट्रांग फैमिली, स्ट्रांग सोसाइटी’ चला रही है. यह अभियान 19 फरवरी से 28 फरवरी, 2021 के बीच चलेगा.

बुधवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, जमाअत इस्लामी महिला विंग की सह-सचिव श्रीमती रहमथुन्निसा ने कहा कि, “कोविड-19 महामारी के कारण हुए लॉकडाउन से यह बात सामने आई है कि महिलाओं और लड़कियों के लिए सबसे अधिक खतरा उनके घरों में था जहां उन्हें सबसे सुरक्षित महसूस करना चाहिए. यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव को महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने की अपील जारी करना पड़ा.

उन्होंने कहा कि, “भारत में लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा में आश्चर्यजनक वृद्धि देखी गई. राष्ट्रीय महिला आयोग का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि, “घरेलू हिंसा के मामले में भारत में लॉकडाउन अवधि के दौरान 10 साल के उच्च रिकॉर्ड को देखा गया. वास्तविक आंकड़ा और भी अधिक हो सकता है क्योंकि घरेलू हिंसा की घटनाऐं 7 प्रतिशत ही दर्ज की गई क्योंकि शायद पीड़ितों में से अधिकांश मदद के लिए अधिकारियों के पास जाने से बचते थे.”

उन्होंने कहा, “महिलाओं द्वारा मौखिक, शारीरिक, मानसिक और यौन हिंसा व दुर्व्यवहार के मामले बेहद आम हैं जिसका यह एक छोटा आंकड़ा है. उन्होंने बताया, “कोरोना महामारी के साथ, लॉकडाउन ने और भी समस्या पैदा की जिसने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को और बढ़ा दिया.”

घरेलू हिंसा की बढ़ती घटनाओं का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि, “लोग पूंजीवादी कारणों से अधिकतर परिवार से बाहर जीवन जी रहे थे जो परिवार की संस्था के कमजोर पड़ने का मुख्य कारण था.

लेकिन इसका सबसे बुरा प्रभाव उस दौरान देखा गया जब लॉकडाउन लगाया गया. लॉकडाउन कोरोना महामारी के साथ-साथ एक समस्या बन गया जब घरेलू हिंसा के मामले बढ़ गए और जहां तलाक की दर कई गुना बढ़ गई.”

यह बताते हुए कि इस अभियान को शुरू करने के पीछे संयुक्त राष्ट्र महासचिव का भाषण मुख्य प्रेरक था, उन्होंने दावा किया कि, “परिवार की संस्था को मज़बूत व सुरक्षित करने और परिवार में शांति लाने से हम समाज में शांति स्थापित कर सकते हैं, दुनिया भर में शांति स्थापित कर सकते हैं और हम अंततः समाज को मज़बूत कर सकते हैं.”

उन्होंने कहा, “एक मज़बूत परिवार एक स्वस्थ और जीवंत समाज के लिए आवश्यकता है और यह अभियान इसी लिए शुरू किया गया है.”

एक सवाल के जवाब में, उन्होंने कहा कि, “नैतिक मूल्यों में गिरावट धर्म के कारण नहीं है बल्कि इसे छोड़ने के कारण आई है.”

इस अभियान की अखिल भारतीय संयोजक, श्रीमती शाइस्ता रफत ने अभियान का विवरण देते हुए कहा कि, “हम मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ व्यापक समाज तक अपनी पहुंच बनाना चाहते हैं. हमारे पास जमीनी स्तर के कार्यक्रम और साथ ही कुछ राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम हैं. इस अभियान में नुक्कड़ सभाएं, परिवार के साथ भेंट, प्रतियोगिताएं और इंटरफेथ संवाद आयोजित करेंगे. हमारे कुछ कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के रूप में ऑनलाइन भी होंगे और विशेषज्ञों के साथ दैनिक ऑनलाइन इंटरैक्टिव सत्र होंगे. इस विषय की ओर उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए सामुदायिक शख्सियतों, मस्जिदों के इमामों और विभिन्न धार्मिक विद्वानों को पत्र भेजे जाएंगे. हम अभियान में महिला आयोग, शैक्षणिक संस्थानों, परिवार परामर्शदाताओं और वकीलों से भी संपर्क करेंगे.”

इस पत्रकार वार्ता में जुवेरिया फरहीन ने पत्रकारों का स्वागत किया वहीं डॉ० श्रीमती फातिमा तनवीर ने मीडियाकर्मियों का धन्यवाद करते हुए इस अभियान का समर्थन करने की अपील की.

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