Thursday, January 27, 2022
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अमेरिकी मुस्लिम समूहों ने राष्ट्रपति बाइडेन द्वारा मुसलमानों पर लगे बैन को हटाने का स्वागत किया

सैयद ख़लीक अहमद | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | संयुक्त राज्य अमेरिका के कुछ मुस्लिम ग्रुप्स ने अमेरिकी राष्ट्रपति, जो बाडेन के मुस्लिम बहुसंख्यक देशों के लोगों के साथ गैर मुस्लिम देशों के अप्रवासियों के अमेरिका में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाने के फैसले का स्वागत किया है.

यह प्रतिबन्ध जनवरी 2017 में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाया गया था जिसे कई बार सिर्फ इसलिए बढ़ा दिया गया था ताकि अन्य देशों के नागरिकों को भी शामिल किया जा सके.

प्रतिबंध के आदेश को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बरकरार रखा था.

प्रतिबंध के आदेश के अनुसार ईरान, लीबिया, सोमालिया, सीरिया और यमन जैसे सभी मुख्य मुस्लिम देशों के साथ वेनेजुएला और उत्तर कोरिया जैसे दोनों गैर-मुस्लिम देशों के नागरिकों को भी अमेरिका में वीज़ा प्रवेश नहीं दिया गया था. शुरू में चाड को भी प्रतिबंधित मुस्लिम देशों की सूची में शामिल किया गया था लेकिन बाद में चाड ने अमेरिका जाने वाले अपने नागरिकों की जांच के लिए अमेरिकी एजेंसियों को जानकारी प्रदान करने के लिए सहमति दे दी तो चाड को प्रतिबन्ध सूची से हटा दिया गया.

इस प्रतिबंध को 2019 में बढ़ा दिया गया था जिसके तहत म्यांमार, इरिट्रिया, किर्गिस्तान, नाइजीरिया, सूडान और तंज़ानिया के नागरिक अमेरिका का दौरा तो कर सकते थे, लेकिन उनके अमेरिका में स्थायी रूप से बसने पर प्रतिबन्ध लगाया गया था.

बाईडेन के व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने बुधवार को मीडियाकर्मियों को बताया कि राष्ट्रपति ने मुस्लिम प्रतिबंध की धार्मिक शत्रुता और विदेशियों से नफ़रत करने पर आधारित नीति को रद्द कर दिया है. मुस्लिम देशों पर लगे प्रतिबंध को ख़त्म करना बाईडेन के कई शीर्ष चुनावी वादों में से एक था.

बाईडेन द्वारा प्रतिबंध को हटाये जाने का स्वागत करते हुए काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) ने इस फैसले को पिछले प्रशासन की मुस्लिम और आप्रवासी विरोधी नीतियों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और पहला कदम बताया.

सीएआईआर के कार्यकारी निदेशक निहाद अवाद ने एक बयान में कहा कि “यह मुस्लिम समुदाय और उनके सहयोगियों के लिए चलाए जा रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.”

अमेरिका स्थित ऐडवोकेसी समूह जस्टिस फॉर ऑल के अध्यक्ष खुर्शीद मलिक ने मुस्लिम प्रतिबंध को ख़त्म करने के लिए राष्ट्रपति बाईडेन को धन्यवाद दिया.

भारतीय मूल के मलिक ने राष्ट्रपति बाईडेन को लिखे एक पत्र में कहा कि, “यह एक शानदार शुरुआत है”. मलिक के पत्र में कहा गया है कि, “हमने सभी अमेरिकियों के लिए उम्मीदों के एक नए युग के लिए प्रार्थना की जिसमें सभी लोगों के खिलाफ भेदभाव का खात्मा हो और देश-विदेश में मानवाधिकारों के लिए खड़े होने की भावना हो.”

ईरानी मूल की मीना महदवी जो सीएआईआर के सैन फ्रांसिस्को एरिया चैप्टर से जुड़ीं हैं वो उम्मीद करती हैं कि अब ईरान में रह रही उनकी 67 वर्षीय मां दुबारा उनके साथ अमेरिका में रहने आ सकती हैं.

सीएआईआर के सैन फ्रांसिस्को एरिया चैप्टर के कार्यकारी निदेशक ज़ेहरा बिल्लू ने कहा कि शपथ लेने के तुरंत बाद राष्ट्रपति बाईडेन द्वारा मुस्लिम प्रतिबंध को रद्द करना यह साबित करता है कि वह अपने चुनावी वादे याद रखेंगे और अमेरिकी मुसलमानों को सुना जाएगा.

ट्रम्प के मुस्लिम यात्रा प्रतिबंध के कार्यकारी आदेश को निरस्त करने का स्वागत करते हुए CAIR के मैरीलैंड कार्यालय की निदेशक ज़ैनब चौधरी ने कहा कि अमेरिका में जब चार साल पहले ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे तब मुस्लिम प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना उनका पहला कार्यकारी आदेश था. यह अमेरिकी संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन था. उन्होंने कहा कि 27 जनवरी 2017 को लागू हुए इस प्रतिबन्ध ने अराजकता पैदा कर दी, कई अप्रवासियों को हवाई अड्डों पर हिरासत में लिया गया और उन्हें प्रवेश से वंचित कर दिया गया. प्रतिबंधित देशों के कई निवासी जो अमेरिका में अध्ययन या नौकरी के सिलसिले में थे, लेकिन प्रतिबंध लगने के समय जो विदेश में थे वो सब लोग ट्रम्प की प्रतिबंध नीति के कारण विदेश में फंसे गए.

जैनब ने कहा कि, ट्रम्प ने मुस्लिम नफ़रत को आधार बनाकर जो कानून बनाया उसने मुसलमानों को अपमानित करने का वारंट प्रदान करने का काम किया.

चौधरी ने एक बयान में कहा कि, “मुसलमानों के प्रति ट्रम्प की दुश्मनी इस कार्यकारी आदेश से कहीं अधिक इस रूप में प्रकट हुई कि इसको आधार बनाकर अमेरिकी मस्जिदों की छानबीन की कोशिश शुरू हो गई.

बाइडेन के राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद चार दर्जन से अधिक ऐडवोकेसी समूहों ने उन्हें एक संयुक्त पत्र लिखा जिसमें अमेरिका में प्रवासियों के प्रवेश पर प्रतिबंध हटाने की मांग की गई थी.

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