Thursday, January 27, 2022
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खालसा एड को NIA का नोटिस दूसरी तरफ कनाडा के सांसदों ने नॉबेल के लिए की सिफ़ारिश

सैयद ख़लीक़ अहमद | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | जहां एक ओर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सिख एनजीओ खालसा एड को नोटिस जारी किया है वहीं दूसरी ओर कनाडा के सांसदों ने इस अन्तराष्ट्रीय सहायता संगठन को नॉबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की सिफ़ारिश की है. कैनेडियन सांसद टिम उप्पल, ब्राम्पटन पैट्रिक ब्राउन के मेयर और ब्राम्पटन दक्षिण के सांसद प्रबमीत सिंह सरकारिया द्वारा खालसा एड को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है.

खालसा एड कई किसान नेताओं और शख्सियतों के साथ मिलकर विवादित कृषि क़ानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले किसानों को सहायता और समर्थन देने वालों में शामिल है. खालसा एड ने दिल्ली की सीमाओं पर जहाँ किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वहां भोजन, आश्रय, दवाइयां और आग बुझाने वाले उपकरण आदि सहायता उपलब्ध करवाई हैं.

एनजीओ ने नोबेल प्राइज नामांकन पर अपने फेसबुक पेज पर कहा है कि, “हम इस नामांकन के लिए बहुत शुक्रगुज़ार हैं. हम जो कुछ भी करते हैं वह दुनिया भर में फैली हमारी शानदार टीमों और स्वयंसेवकों के लिए एक शुक्रिया के समान है. हम इस ऐतिहासिक नामांकन के लिए आभारी हैं.”

खालसा एड को लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन 14 जनवरी 2021 को किया गया.

नोरविजीयन नोबेल कमेटी के चेयरपर्सन बेरिट रीस-एंडर्सन को लिखे गए अपने पत्र में सांसद उप्पल ने खालसा एड को नामित करते हुए कहा कि, “कनाडा की संसद में एडमोंटन मिल वुड्स से संसद सदस्य के रूप में ब्रैम्पटन के मेयर और ब्रैम्पटन दक्षिण के प्रांतीय संसद के सदस्य माननीय परबमीत सिंह सरकारिया और माननीय पैट्रिक ब्राउन के समर्थन के साथ नोबेल शांति पुरस्कार के लिए खालसा एड को नामित करना हमारे लिए सम्मान की बात है. खलसाई एड एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ है जिसका उद्देश्य दुनिया भर के आपदा क्षेत्रों और नागरिक संघर्ष क्षेत्रों में मानवीय सहायता प्रदान करना है. ”

यह कहते हुए कि खालसा एड एक अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन है जो कि “सरबत दा खालसा” की सिख विचारधारा जिसका अर्थ है “सबका कल्याण” और पूरी मानव जाति को एक जाति के रूप में मान्यता देने वाले सिख सिद्धांत पर आधारित है. पत्र में कहा गया कि 1999 में कोसोवो में शरणार्थियों की दुर्दशा से प्रभावित होने के बाद रविंदर (रवि) सिंह द्वारा इसे स्थापित किया गया था.

पत्र में खालसा एड की स्थापना के बाद से दुनिया भर में इसके द्वारा किए गए प्रमुख सहायता कार्यों को सूचीबद्ध किया गया है.

पत्र के अनुसार खालसा एड ने 1999 में तुर्की भूकंप के पीड़ितों, 2000 में ओडिशा चक्रवात पीड़ितों, 2001 में गुजरात भूकंप पीड़ितों को मानवीय सहायता प्रदान की, 2002 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और रवांडा में एक राहत कार्यक्रम शुरू किया, 2003 में अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों को शैक्षिक सामग्री और वित्तीय सहायता प्रदान की और 2006 में इंडोनेशियाई सुनामी के पीड़ितों की मदद की इत्यादि.

पत्र में कहा गया है कि, “इस साल अकेले उन्होंने दुनिया भर के सैकड़ों हज़ारों लोगों को उनकी विभिन्न कठिनाइयों का सामना करने में मदद की है. वे दिल्ली की सीमाओं पर पूरे भारत से आए प्रदर्शनकारियों को आश्रय स्थल, कपड़े, भोजन, पानी, प्राथमिक चिकित्सा-किट, स्वच्छता उपकरण और आग बुझाने के उपकरण मुहैया करा रहे हैं.

पत्र के आख़िर में ये अनुरोध किया गया है कि, “जैसा कि हम मानते हैं, खालसा एड एक बहुत ही योग्य अंतर्राष्ट्रीय सहायता एजेंसी है जिसने दुनिया भर में ज़रूरी सहायताएं प्रदान करके प्रभावी काम किया है. हमें उम्मीद है कि आपकी समिति उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करेगी. नामांकन पर विचार करने के लिए धन्यवाद.”

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