Monday, January 18, 2021
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जामिया के पूर्व प्रोफ़ेसर, इस्लामी विद्वान और जमाते इस्लामी के विचारक डॉ. मोहम्मद रफत का निधन

सैयद ख़लीक अहमद | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज़ विभाग के प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए जमाअत इस्लामी हिंद (JIH) के विचारक और वरिष्ठ डॉ० मोहम्मद रफत का शुक्रवार रात 10.30 बजे अलशिफा अस्पताल में निधन हो गया.

वह 65 वर्ष के थे और पिछले सात महीनों से बीमार चल रहे थे. शनिवार की शाम उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया.

परिवार में उनकी पत्नी के अलावा तीन बेटे और दो बेटियां हैं. उनके सबसे बड़े बेटे मोहम्मद साद कुवैत में एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में काम करते हैं.

उनके परिवार के अनुसार, शुक्रवार शाम को सांस लेने में तकलीफ होने के कारण उन्हें अल शिफा अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों के अनुसार उन्हें ‘मृत’ लाया गया.

डॉ० मोहम्मद रफत मूल रूप से पश्चिमी यूपी के मुज़फ्फरनगर जिले के खुर्जा के रहने वाले थे. उन्होंने 1976 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी किया और आईआईटी कानपुर से पीएचडी की. उन्होंने पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के एक साल बाद 1985 में जामिया मिलिया इस्लामिया में शिक्षक के रूप में अपनी सेवा शुरू की.

लम्बे अर्से तक शिक्षक के रूप में अपनी सेवा देने के बाद वह 31 जुलाई, 2020 को सेवानिवृत्त हुए.

डॉ० रफ़त अपने छात्र दिनों से ही इस्लाम के प्रचार-प्रसार और उसके संदेश को आम जनमानस तक पहुँचाने के कार्यों से जुड़े थे. वह 1999 से जमाअत इस्लामी हिंद के केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य बने. उन्होंने विभिन्न विषयों पर 15 से अधिक पुस्तकें लिखीं.

जमाअत इस्लामी हिंद के विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने इस्लाम के सन्देश को जनमानस तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पिछले दो वर्षों से वह सेंटर फॉर स्टडी एंड रिसर्च (CSR) के निदेशक होने के अलावा, जमाअत के प्रशिक्षण विभाग के सचिव के रूप में भी काम किया.

डॉ० रफ़त के लेखन की तुलना इस्लाम के विद्वानों मौलाना सदरुद्दीन इस्लाही और अन्य शीर्ष बुद्धिजीवियों से की जाती है. उन्होंने 2009 से 2019 तक उर्दू मासिक पत्रिका ज़िन्दगी-ए-नौ के संपादक के रूप में भी काम किया.

उनकी मृत्यु की खबर के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में शोक संदेश देखने को मिले. सोशल मीडिया पर लोगों ने दुख व्यक्त करने के साथ-साथ इस्लाम के प्रचार के लिए किए गए उनके योगदान को याद किया.

जमाअत इस्लामी हिन्द के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने अपने फेसबुक वॉल पर पोस्ट किए गए शोक संदेश में उन्हें अपने ज्ञान, सादगी और गहराई के लिए “दरवेश” बताया.

उन्होंने कहा, “डॉ० रफ़त का निधन मुस्लिम उम्मत, इस्लामी आंदोलन और राष्ट्र के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है”. हुसैनी ने उन्हें याद करते हुए, “एक बुद्धजीवी, महान नेता, एक मज़बूत इस्लामिक विचारक और परोपकारी गुरु” कहा.

उनकी मगफिरत के लिए प्रार्थना करते हुए, जमाअत अध्यक्ष ने कहा कि, “वह जमाअत के सबसे महत्वपूर्ण विचारकों में से एक थे. उन्होंने हमेशा इस्लाम के मूल सिद्धांतों को केन्द्रित रखा और उसके लिए कार्य किया.”

उनके जीवन की सादगी का ज़िक्र करते हुए अपने पोस्ट में हुसैनी ने लिखते हुवे कहा, “डॉ० रफत ने बहुत ही सादा जीवन व्यतीत किया और उनका बहुत ही सरल स्वभाव था.”

सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक संदेश में, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र और वर्तमान में अंकारा यिलदिरिम बेयाज़ित विश्वविद्यालय, तुर्की में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सहायक प्रोफेसर, डॉ० ओमैर अनस ने डॉ० रफत की तुलना “सूफी” से की है, जिसमें कोई सांसारिक लालच नहीं होती और जो विनम्रता और सादगी से भरा व्यक्ति हो.”

जमाअत इस्लामी के जनसंपर्क विभाग के निदेशक मुजतबा फारूक ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ० रफत में मुस्लिम “दरवेश” के गुण थे. डॉ० रफत को उन्होंने “आधुनिक ज्ञान और इस्लामी विचार के संगम” के रूप में यद किया क्योंकि उन्हें आधुनिक समकालीन मुद्दों के साथ-साथ इस्लाम के बारे में बहुत ही गहरा ज्ञान था.

जामिया मिलिया इस्लामिया में उनके सहयोगियों ने उन्हें एक प्रतिभाशाली व्यक्ति के रूप में याद किया. उन्हें एक बहुत ही विनम्र इंसान, हमेशा किसी की भी मदद करने के लिए तैयार रहने वाला व्यक्ति बताया.

प्रो० मसूद आलम, जिन्होंने जामिया डॉ० रफत के साथ ही ज्वाइन किया था, ने कहा, “डॉ० रफत बहुत ही उच्च कोटि के व्यक्ति थे. उनके जैसा इंसान मिलना मुश्किल है.” उनके ज्ञान के बारे में बोलते हुए, डॉ० आलम ने कहा कि, “डॉ० रफत भौतिकी पढ़ाते थे मगर उन्हें गणित का अच्छा ज्ञान था और छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों को भी उनके ज्ञान से लाभ हुआ. डॉ० आलम ने कहा, “वो जामिया में हर दिल अज़ीज़ थे.”

डॉ० मुशीर अहमद, एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज़ विभाग के पूर्व प्रमुख, जिन्होंने जुलाई 2020 में सेवानिवृत्त होने पर डॉ० रफत को विदाई दी थी, उन्होंने डॉ० रफत को “बहुत अच्छा सहायक, कोऑपरेटिव और विनम्र” इंसान बताया. कहा, उन्होंने हर उस व्यक्ति की मदद की जो उनके पास समस्या लेकर आया, चाहे वह छात्र हो या शिक्षक.

डॉ० रफत के ज्ञान के बारे में बोलते हुए, डॉ० अहमद ने कहा कि, डॉ० रफत ने भौतिकी पढ़ाया, कई मामलों में उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को सामाजिक विज्ञान विषय पर शोध कार्य में मार्गदर्शन किया. उन्होंने कहा कि कई साल पहले, डॉ० रफत ने उन्हें कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल में इस्लाम और ईसाई धर्म पर एक भाषण तैयार करने में उनका मार्गदर्शन किया, जिसका दर्शकों पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा.

डॉ० अहमद ने डॉ० रफत के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा, “डॉ० रफत एक सज्जन थे. भौतिकी में उनके ज्ञान के समानांतर भी कोई नहीं है.”

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