Saturday, August 13, 2022
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IAMC ने इंडियन-अमेरिकन IT कंपनियों की भर्ती में मुसलमानों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया

इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित इंडियन अमेरिकन मुस्लिम कौंसिल (IAMC) नामक एडवोकेसी ग्रुप ने इंडियन-अमेरिकन आईटी कंपनियों में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव के बढ़ते मामलों की निंदा की है.

आईएएमसी द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह आरोप लगाया गया है कि हाल ही में निट्यो इन्फोटेक (Nityo Infotech) में घटित मामले मुस्लिमों के प्रति नफ़रत की क्रूर अभिव्यक्ति का एक उदाहरण है, जो कि कट्टर हिंदुत्व की राष्ट्रवादी मानसिकता और इस्लामोफोबिया से ग्रसित है. 

मोहम्मद तारिक अनवर (परिवर्तित नाम) ने कुछ महीने पहले कैलिफोर्निया में आईटी सेक्टर में अपने प्रथम नाम ‘मोहम्मद’ के साथ आवेदन किया था. उन्हें इंटरव्यू के लिए कोई कॉल नहीं आयी. एक महीने बाद उन्होंने मुस्लिम नहीं लगने वाले नाम “टारिक” का इस्तेमाल करते हुए उसी फर्म में दोबारा आवेदन किया. इस बार उन्हें न सिर्फ कॉल आयी बल्कि उन्हें नौकरी भी मिल गई.

तारिक का मामला अमेरिकी आईटी इंडस्ट्री में घटित होने वाले न जाने कितने छोटे-छोटे धार्मिक भेदभावों में से एक था, जो कि इंडियन अमेरिकन मुस्लिम कौंसिल द्वारा करवाए गए एक अनौपचारिक सर्वे के माध्यम से प्रकाश में आया है.

न्यू जर्सी स्थित आईटी सेवा प्रदाता कंपनी नीत्यो इंफोटेक द्वारा एक रिक्रूटर को मेमो भेजकर उसे मुस्लिम उम्मीदवारों का चयन नहीं करने के लिए कहने के बाद आईएएमसी ने आईटी सेक्टर में काम करने वाले मुस्लिमों के बीच यह सर्वे करवाया है.

इस मेमो के स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद नित्यो इन्फोटेक के ख़िलाफ़ धार्मिक भेदभाव के आरोप के मामले सार्वजनिक परिदृश्य पर आ गए. नित्यो इन्फोटेक में सेल्स एंड ऑपरेशंस के निदेशक अजय गुप्ता ने खुद की छवि पर दाग लगने से बचने के लिए दावा किया है कि रिक्रूटर का ईमेल हैक किया गया था. गुप्ता द्वारा रिक्रूटर को भेजे गए ईमेल मैसेज में कहा गया था कि “कृपया निम्न पदों के लिए मुस्लिम उम्मीदवारों को सबमिट न करें.”

हालांकि, मुस्लिमों के साथ भेदभाव करने की यह कथित घटना इंडियन-अमेरिकन आईटी कंपनियों में व्याप्त इस्लामोफोबिया के बढ़ते मामलों का एक हिस्सा है.

 मुस्लिम विरोधी मैसेज और माफी के स्क्रीनशॉट :

https://www.cair.com/wp-content/uploads/2020/11/NityoEmails.png

आईएएमसी की प्रेस रिलीज़ में कहा गया कि, “आईटी कंपनियों में मुसलमानों के साथ होने वाला धार्मिक भेदभाव न सिर्फ कानून का उल्लंघन करता है बल्कि  निष्पक्षता और धार्मिक स्वतंत्रता के बुनियादी सिद्धांतों की भी अवहेलना करता है.”

अपने बयान में IAMC ने कहा है, “आईएएमसी ने न्यू जर्सी के अटॉर्नी जनरल को नित्यो इन्फोटेक के खिलाफ शिकायत कर जांच की मांग की है. आईएएमसी ने नित्यो इन्फोटेक से विविधता पूर्ण, समान और समावेशी नज़रिए के साथ जायज़ा लेने और इस समस्या का सामना करने के लिए तत्काल सुधार करने व इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है.”

आईएएमसी के अध्यक्ष अहसान खान ने कहा कि, “कार्यस्थलों को धार्मिक कट्टरता और नफ़रत से दूर रखने में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए नित्यो इंफोटेक का मामला नींद से जगाने वाली घटना होनी चाहिए.”

अहसान खान आगे कहते हैं कि, “सच यह है कि जिस फर्म ने बिना हिचकिचाए मुस्लिम उम्मीदवारों को भर्ती से बाहर रखने के लिए कहा है उससे पता चलता है कि इस्लामोफोबिया अब किस हद तक सामान्य हो चुका है.”

आईएएमसी के कार्यकारी निदेशक रशीद अहमद ने कहा कि, “जैसा कि तारिक के मामले से स्पष्ट है, भेदभाव का यह स्तर भारत के मुसलमानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मुस्लिम नाम या मुस्लिम वेशभूषा वाले हर व्यक्ति के साथ ऐसा होता है.” उन्होंने कहा कि “इंडियन-अमेरिकन आईटी कंपनियों में नौकरी पर रखने की  प्रक्रिया की जांच लंबे समय से लंबित है.”

आईएएमसी ने कहा है कि वह कार्यस्थलों पर होने वाली कट्टरता और घृणा के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगा और उन व्यक्तियों के साथ मिलकर काम करेगा जो न्याय और निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए भेदभाव के आरोपों के साथ आगे आए हैं.

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