Sunday, December 5, 2021
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मेवात के रहने वाले और मदर्से से शिक्षा प्राप्त किए चार लोग भारतीय सेना में नायब सूबेदार नियुक्त

सैयद अली अहमद | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | हरियाणा की सीमा से लगे मेवात के रहने वाले और मदरसे से शिक्षा प्राप्त किये चार लोगों को भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर धार्मिक शिक्षक के रूप में चुना गया है. उन्होंने यह पद, लिखित परीक्षा, कठोर शारीरिक परीक्षा और मेडिकल टेस्ट के बाद हासिल किये हैं.

खेती करने वाले परिवारों से आने वाले इन चारों लोगों, अब्दुल माजिद, तल्हा, अली हसन और माजिद रहीमी हैं. मदरसों से धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के अलावा, इन्होंने आधुनिक विषयों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से स्नातक और स्नातकोत्तर भी किया है. उन्हें इस साल सितंबर में धार्मिक शिक्षकों के 9 खाली पदों के पर चुना गया है.

पच्चीस वर्षीय अब्दुल मजीद ने विश्व विख्यात दारुल उलूम देवबंद से ‘आलिमियत’ किया है और दिल्ली विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में एम.ए किया है और मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) के नूह सेंटर से बीएड किया. “जब मुझे रिक्तियों के बारे में पता चला कि जिनके पास मदरसा की डिग्री है और साथ ही एक विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री है वह अप्लाई कर सकते हैं तो मैंने इसके लिए अप्लाई करने का फैसला किया. इसमें दो पेपर थे – सामान्य ज्ञान और दीनियात (धार्मिक ज्ञान). मैंने कड़ी मेहनत की और अल्लाह की कृपा से मैंने दोनों पेपरों में अच्छे अंक हासिल किए. मैं 1600 मीटर की दौड़, शारीरिक और चिकित्सा परीक्षण में भी सफल रहा.

अब्दुल मजीद, शादीशुदा हैं और उनका एक बच्चा भी है. वह हरियाणा के मेव समुदाय से हैं और वर्तमान में, वह अपने माता-पिता के साथ, दक्षिण दिल्ली में मालवीय नगर के पास गाँव हौज रानी में रह रहे हैं. उनके पिता मोहम्मद कुरैशी खेती करते हैं.

तल्हा (35) जिला पलवल के गांव धोकलपुर के रहने वाले हैं. इन्होंने कश्मीरी गेट स्थित ‘मदरसा’ अमीनिया और जामिया इस्लामिया सनाबिल, शाहीन बाग से धार्मिक डिग्री हासिल की है. जामिया मिलिया इस्लामिया से उर्दू साहित्य में एमए और MANUU के नूंह सेंटर से बीएड किया है. झारखंड में एक शिक्षक मौलाना मुश्ताक अहमद ने उन्हें सेना में सरकारी नौकरी के लिए प्रेरित किया. मुश्ताक ने भी नायब सूबेदार के पद के लिए पिछले साल कोशिश की थी लेकिन सफल नहीं हो सके.

पांच बच्चों के पिता तल्हा ने कहा कि उनकी उच्च शिक्षा और नायब सूबेदार पद का श्रेय उनकी मां को जाता है क्योंकि जब वह छोटे थे तो उनके पिता की मृत्यु हो गई थी. तल्हा कहते हैं, “यह मां ही हैं जिन्होंने परिवार की 11 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण करके परिवार की देखभाल की.”

नूंह जिले के नगीना ब्लॉक के ग्राम रानिका के निवासी अली हसन (26) ने जयपुर के जमीअतुल हिदायत से आल्मियत पूरा किया और MANUU के नूंह सेंटर से उर्दू में एमएए किया. मौलाना खालिद हुसैन रहीमी उनके लिए रक्षा सेवाओं के लिए मुख्य प्रेरक थे. उन्होंने कहा कि, मेरा बचपन से ही सेना में शामिल होने की ख्वाहिश थी. उन्होंने कहा, “जब मुझे मौलाना खालिद हुसैन द्वारा नायब सूबेदार के पद की रिक्तियों के बारे में बताया गया, तो मैंने आवेदन किया और चयनित हो गया.”

उन्होंने कहा कि, “आमतौर पर मदरसे के छात्र इमामत करते हैं या मदरसों में पढ़ाते हैं लेकिन सेना में रोजगार एक अच्छा विकल्प है जिसे सरकार ने विश्वविद्यालय की डिग्री वाले मदर्सों के छात्रों के लिए खोला है. वे कहते हैं, “यह हमारी आर्थिक स्थिति में सुधार करेगा और सामाजिक स्थिति को भी बढ़ाएगा.”

हसन के चार बच्चे हैं. उनके पिता तैयब हुसैन गाँव में खेती करते हैं.

दिल्ली विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में एमफिल के छात्र माजिद रहीमी (28) को एक दोस्त के माध्यम से सेना में नायब सूबेदार के पद के बारे में पता चला. बाद में उन्होंने विस्तृत जानकारी के लिए sarkariresult.com पर विजिट किया. उन्होंने सितंबर में पद के लिए आवेदन किया और चयनित हो गए. उन्होंने 2013 में जयपुर के जामियतुल हिदायत से आलमियत का (धार्मिक कोर्स) किया है, 2016 में जामिया मिलिया इस्लामिया से अरबी (ऑनर्स) में बीए और 2018 में दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए किया है. माजिद, जिला नूंह के गांव देओला से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता भी एक किसान हैं.

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